अब नहीं होगी खेतों के रास्ते की टेंशन (AI- तस्वीर)महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या को दूर करने के लिए अहम फैसला लिया है. अब खेती की जमीन, खेत तक जाने वाले रास्ते, आने-जाने के अधिकार (राइट ऑफ वे) और पानी के रास्ते में रुकावट से जुड़े विवादों का निपटारा पहले से ज्यादा तेजी से किया जाएगा. इतना ही नहीं, अगर कोई व्यक्ति तहसीलदार के आदेश का पालन नहीं करता है, तो प्रभावित किसान को मुफ्त पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को बताया कि राज्य सरकार ने 'मामलतदार कोर्ट्स एक्ट, 1906' में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. इन बदलावों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के विवादों को जल्दी सुलझाना और सरकारी आदेशों को प्रभावी तरीके से लागू कराना है.
अब तक कई मामलों में सुनवाई में देरी इसलिए होती थी क्योंकि संबंधित पक्ष यह दावा कर देते थे कि उन्हें नोटिस नहीं मिला या वे जानबूझकर नोटिस लेने से बचते थे. इस समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने नया प्रावधान लागू किया है. अब अर्ध-न्यायिक मामलों में नोटिस सीधे ईमेल के माध्यम से भेजे जाएंगे. इससे सुनवाई की प्रक्रिया तेज होगी और अनावश्यक देरी नहीं होगी. राजस्व विभाग ने इस संबंध में एक सर्कुलर भी जारी किया है. इसमें बताया गया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश और राजस्व मंत्री बावनकुले की पहल पर यह सुधार किए गए हैं.
सरकार ने कानून में एक नई धारा 21(5) भी जोड़ी है. इसके तहत यदि कोई व्यक्ति तहसीलदार के आदेश के बावजूद खेत का रास्ता खाली नहीं करता, पानी के रास्ते में बनी रुकावट नहीं हटाता या किसी प्रकार का अवैध कब्जा नहीं हटाता, तो प्रभावित किसान पुलिस से मदद मांग सकता है. ऐसी स्थिति में पुलिस को किसान को मुफ्त सुरक्षा देना अनिवार्य होगा, ताकि तहसीलदार के आदेश को बिना किसी बाधा के लागू कराया जा सके.
नए नियमों के अनुसार, तहसीलदार अपने आदेश में साफ तौर पर लिखेंगे कि यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो प्रभावित किसान धारा 21(5) के तहत पुलिस सुरक्षा लेने का अधिकार रखता है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी कारण से तहसीलदार के आदेश में मुफ्त पुलिस सुरक्षा का उल्लेख छूट भी जाए, तब भी पुलिस किसान की मदद करने से इनकार नहीं कर सकेगी.
राज्य सरकार का मानना है कि इन बदलावों से खेतों तक पहुंचने के रास्ते, सिंचाई के पानी के मार्ग और जमीन पर कब्जे से जुड़े मामलों का जल्द समाधान होगा. इससे किसानों को लंबे समय तक अदालतों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. सरकार का कहना है कि इन सुधारों से न केवल विवादों का तेजी से निपटारा होगा, बल्कि किसानों को समय पर न्याय मिलेगा और खेती-किसानी का काम भी बिना रुकावट जारी रह सकेगा. यह फैसला विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जो वर्षों से खेतों के रास्ते, पानी के बहाव और अवैध कब्जों से जुड़े विवादों का सामना कर रहे थे. (PTI)
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