सीएम हेल्पलाइन की मदद से किसान को मिली जमीनउत्तर प्रदेश सरकार के एंटी भूमाफिया अभियान के तहत जनपद अमेठी में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां करीब 50 वर्षों से अवैध कब्जे में रही जमीन आखिरकार उसके वास्तविक खातेदार को वापस मिल गई. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज होने के बाद राजस्व प्रशासन सक्रिय हुआ और कार्रवाई करते हुए पीड़ित किसान वीरेंद्र कुमार मौर्य को उनकी पैतृक भूमि का कब्जा दिलाया. जमीन वापस मिलने के बाद किसान ने अपनी पत्नी के साथ पहली बार अपने खेत में धान की रोपाई कर नई शुरुआत की है.
मामला अमेठी कोतवाली क्षेत्र के जंगल रामनगर के पूरे नरपत गांव का है. गांव निवासी वीरेंद्र कुमार मौर्य लंबे समय तक पंजाब के लुधियाना में नौकरी करते थे और परिवार भी वहीं रहता था. वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान नौकरी छूटने के बाद वह परिवार के साथ गांव लौट आए. गांव आने पर उन्हें पता चला कि गाटा संख्या 2148 की लगभग दो बीघा पैतृक भूमि पर पिछले करीब 50 वर्षों से दबंगों का अवैध कब्जा है.
वीरेंद्र कुमार ने अपनी जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें लगातार विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने वर्ष 2021 से कई बार राजस्व अधिकारियों से शिकायत कर न्याय की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
लगातार प्रयासों के बावजूद समाधान न मिलने पर वीरेंद्र कुमार मौर्य ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद राजस्व प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एंटी भूमाफिया अभियान के तहत जांच शुरू की. अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध कब्जा हटवाया गया और वीरेंद्र कुमार को उनकी जमीन पर विधिवत कब्जा दिलाया गया.
जमीन वापस मिलने के बाद वीरेंद्र कुमार मौर्य और उनकी पत्नी अनीता ने पहली बार अपने खेत में धान की रोपाई की. वर्षों बाद अपनी भूमि पर खेती शुरू करने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई दी. भावुक होकर किसान ने कहा कि करीब 50 साल बाद उन्हें अपनी जमीन वापस मिली है और यह मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की व्यवस्था के कारण संभव हो सका.
वीरेंद्र कुमार मौर्य ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिना किसी लड़ाई-झगड़े के उन्हें उनकी जमीन वापस मिल गई. वहीं उनकी पत्नी अनीता ने कहा कि जीवन में पहली बार अपने खेत में धान की रोपाई कर रही हैं और अब इसी खेत से परिवार का भरण-पोषण होगा. उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की मदद नहीं मिलती तो शायद आज भी उन्हें अपनी जमीन का अधिकार नहीं मिल पाता. किसान परिवार ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा कि सरकार की पहल और प्रशासन की कार्रवाई से उन्हें वर्षों बाद न्याय मिला है.(अभिषेक कुमार त्रिपाठी का इनपुट)
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