कृषि मंत्री शिवराज सिंहकेंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और आने वाले खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की. उन्होंने कृषि सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम समय रहते पूरे किए जाएं. बैठक में मौसम के अनुमान, पानी की उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज और अन्य कृषि सामग्री की व्यवस्था, राज्यों की तैयारियां और खराब मौसम से निपटने की योजना पर विस्तार से चर्चा हुई. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार के लिए किसानों का हित सबसे पहले है. उन्होंने कहा कि संभावित अल नीनो के असर को देखते हुए सरकार पहले से तैयार है और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी.
बैठक में बताया गया कि भारतीय मौसम विभाग के अनुसार साल 2026 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है. अनुमान है कि इस बार देशभर में बारिश दीर्घकालीन औसत का करीब 92 प्रतिशत हो सकती है. इसके साथ ही यह भी संकेत मिले हैं कि मॉनसून के दौरान अल नीनो की स्थिति बन सकती है. हालांकि मौसम का अंतिम और नया अनुमान मई 2026 के आखिरी सप्ताह में जारी किया जाएगा. बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार मौसम के इन पूर्वानुमानों को गंभीरता से ले रही है और पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है. उन्होंने किसानों से कहा कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के मिलकर किए जा रहे प्रयास, बेहतर जल प्रबंधन, नई तकनीक, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और मौसम के अनुसार खेती के उपायों से संभावित चुनौतियों का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है.
बैठक में बताया गया कि इस समय देश के जलाशयों में पानी का स्तर अच्छी स्थिति में है और कुल जल भंडारण सामान्य से बेहतर है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जलाशयों में पानी का भंडारण इस समय सामान्य स्तर के करीब 127.01 प्रतिशत तक है. इससे खरीफ सीजन में सिंचाई की जरूरतें पूरी करने में बड़ी मदद मिलेगी और खेतों में नमी की कमी का खतरा भी काफी कम होगा.
बैठक में यह भी कहा गया कि अगर अल नीनो का असर होता है, तब भी कृषि क्षेत्र पर उसका प्रभाव पहले की तुलना में कम रहने की संभावना है. इसका कारण बेहतर जल उपलब्धता, सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था, वैज्ञानिक सलाह, फसल विविधीकरण और समय पर सरकारी कदम है. इन उपायों से खेती अब पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत और बदलते मौसम के अनुसार ढलने वाली हो गई है.
समीक्षा बैठक में बताया गया कि साल 2000 से 2016 के बीच अल नीनो का असर खेती पर ज्यादा साफ दिखाई देता था. उस समय खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर थी और मौसम से जुड़े जोखिमों से निपटने की सुविधाएं आज की तुलना में कम थी. लेकिन हाल के वर्षों में नई तकनीक, बेहतर खेती प्रबंधन, जल संरक्षण, सिंचाई नेटवर्क के विस्तार और उन्नत बीजों के इस्तेमाल से फसलों की पैदावार ज्यादा स्थिर हुई है. बैठक में यह भी कहा गया है कि कुछ फसलें, खासकर धान, मौसम के असर के बावजूद अपेक्षाकृत बेहतर स्थिरता दिखाती हैं. वहीं दूसरी फसलों के लिए भी पहले से जरूरी तैयारी की जा रही है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का ध्यान इस बात पर है कि हर क्षेत्र और हर फसल के हिसाब से अलग रणनीति बनाई जाए. किसानों को समय पर सलाह, अच्छे बीज, जरूरी संसाधन और दूसरे विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे.
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी राज्य किसी भी विपरीत मौसम की स्थिति से निपटने के लिए पूर्ण तैयारी रखें. साथ ही जिला स्तर तक आकस्मिक योजनाओं को सक्रिय किया जाए. उन्होंने कहा कि बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैकल्पिक फसल विकल्प, देरी से बुवाई की रणनीति और सूखा-सहनशील किस्मों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि किसानों को व्यवहारिक और त्वरित समाधान मिल सके. बैठक में यह भी बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए बीज उपलब्धता आवश्यकता से अधिक है साथ ही आकस्मिक स्थितियों के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व की व्यवस्था भी रखी गई है. यह तैयारी इस उद्देश्य से की गई है कि यदि किसी क्षेत्र में मौसम का प्रतिकूल प्रभाव दिखे तो वहां वैकल्पिक बीज और उपयुक्त किस्में तुरंत उपलब्ध कराई जा सके.
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को किसी भी परेशानी से बचाने के लिए सरकार का निगरानी तंत्र पूरी तरह सक्रिय है और हालात की लगातार समीक्षा की जा रही है. उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ लगातार संपर्क रखा जा रहा है. फसलों और मौसम की निगरानी की जा रही है, जिला स्तर की कृषि आपात योजनाओं को अपडेट किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर तुरंत फैसले लेने की व्यवस्था की गई है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ संभावित खतरे का अनुमान लगाना नहीं है, बल्कि समय रहते ऐसे कदम उठाना है, जिससे किसानों का भरोसा बना रहे, खेती का काम प्रभावित न हो और खरीफ सीजन अच्छे से चले. उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेहतर जल प्रबंधन, नई तकनीक, उन्नत खेती के तरीके और पहले से की गई तैयारियों के दम पर आने वाली चुनौतियों का असर कम किया जाएगा और किसानों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी.
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