झींगा फिश. फोटो क्रेडिट-मनोज शर्मा अमेरिका-चीन और यूरोप ऐसे देश हैं जो 100 फीसद भारतीय झींगा खाना पसंद करते हैं. लेकिन मौजूदा वक्त में तीनों ही देशों ने झींगा खरीदने से हाथ खड़े कर दिए हैं. कम डिमांड के चलते झींगा एक्सपोर्ट घट गया है. एक्सपर्ट की मानें तो झींगा के एक्सपोर्ट में 40 फीसद की कमी आई है. सबसे बड़ी परेशानी ये है कि देश में झींगा की घरेलू डिमांड ना के बराबर है. ऐसे में किसानों के सामने परेशानी ये आ गई है कि वो झींगा कहां बेचें. एक आंकड़े के मुताबिक देश में हर साल करीब 10 लाख टन झींगा का उत्पादन होता है.
इसमे से करीब सात लाख टन झींगा एक्सपोर्ट होता है. गुजरात और आंध्र प्रदेश में बड़ी मात्रा में झींगे का उत्पादन होता है. उत्तर भारत की बात करें तो पंजाब और हरियाणा में भी झींगे का उत्पादन होने लगा है. झींगा के घरेलू बाजार की बात करें तो उंगलियों पर गिनने लायक है.
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झींगा हैचरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि कुमार येलांकी ने किसान तक को बताया कि साल 2021-22 में झींगा का 6.9 लाख टन एक्सपोर्ट हुआ था. लेकिन 2022 के आखिर से अचानक अमेरिका और चीन के बाजार में मंदी आ गई. रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोप के बाजार में भी झींगा की डिमांड कम हो गई. जबकि सबसे ज्यादा भारतीय झींगा खरीदने वाले ये तीनों ही लोग हैं. अब हालत ये है कि झींगा का एक्सपोर्ट 35 से 40 फीसद तक कम हो चुका है. तालाब में जो झींगा बचा हुआ है उसके लिए कोई ग्राहक नहीं मिल रहा है.
रवि कुमार ने बताया कि ऐसा भी नहीं है कि भारतीय झींगा खरीदने वाले सिर्फ अमेरिका-चीन और यूरोप देश ही हैं. जापान, अरब देश और साउथ-ईस्ट एशिया भी भारतीय झींगा खरीदते हैं. लेकिन इनकी झींगा खरीदने की मात्रा बहुत कम है. अगर तीनों देशों के बीच की बात करें तो जापान 40 से 45 हजार टन सबसे ज्यादा झींगा खरीदता है.
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गुजरात के रहने वाले और मछलियों के डॉक्टर मनोज शर्मा ने बताया कि अमेरिका-चीन और यूरोप के बाजारों में आए बदलाव को देखें तो ये कोई बहुत बड़ा नहीं है. लेकिन हमारे देश के झींगा किसानों पर इसलिए फर्क पड़ा है कि उनके पास अपना झींगा बेचने के लिए कोई और विकल्प नहीं है. घरेलू बाजार तो ना के बराबर ही है.
आज झींगा किसानों को बचाने के लिए घरेलू बाजार तैयार करने की जरूरत है. एक सर्वे के मुताबिक देश में 75 फीसद लोग नॉनवेज खाते हैं. अगर यही लोग साल में एक किलो झींगा भी खाने लगें तो झींगा किसानों के लिए एक बड़ा बाजार तैयार हो जाएगा. और एक्सपोर्ट पर से हमारी निर्भरता कम हो जाएगी.
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