सीआईआरजी, मथुरा ने बकरियों के लिए प्लास्टिक का ये रेडीमेड हाउस तैयार किया है. फोटो क्रेडिट-किसान तकगर्मियों के मौसम में बकरे-बकरियों को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. एक तो गर्म मौसम से बचाते हुए उन्हें हवादार शेड देना और दूसरा उन्हें खुद की गंदगी से दूर रखना. क्योंकि गर्मियों में मूत्र और मेंगनी की गंदगी के चलते भी बकरे-बकरियां बीमार होते हैं. लेकिन किसी भी बकरी पालक के लिए एक ही शेड में सभी तरह के इंतजाम करना कई बार थोड़ा मुश्किल हो जाता है. लेकिन, शायद गर्मी की इसी परेशानी को देखते हुए खासतौर पर बकरे-बकरियों के लिए हवादार और साफ-सुथरा रहने वाला दो मंजिला रेडीमेड मकान तैयार किया गया है.
प्लास्टिपक के बने इस मकान की लाइफ करीब 20 साल है. इस मकान की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इस मकान में रहने वाले बकरे-बकरियां कई तरह की छोटी-बड़ी बीमारियों से बचे रहते हैं. दो मंजिला मकान के इस मॉडल में बकरी की मेंगनी सीधे मिट्टी के संपर्क में नहीं आती है. जिससे मेंगनी पर मिट्टी नहीं लगती है और उसकी खाद बनाने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आती है.
गोट एक्सपर्ट का कहना है कि दो मंजिला मकान से जगह की बचत होती है. लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बकरी के बच्चे बीमारियों से बच जाते हैं. वो बीमारियां जिन पर अच्छी खासी रकम खर्च हो जाती है. इस तरह के मकान में नीचे बड़ी बकरियां रखी जाती हैं. वहीं ऊपरी मंजिल पर छोटे बच्चे रखे जाते हैं. ऊपरी मंजिल पर रहने के चलते बच्चे मिट्टी के संपर्क में नहीं आ पाते हैं तो इससे वो मिट्टी खाने से बच जाते हैं. वर्ना छोटे बच्चे मिट्टी खाते हैं तो इससे उनके पेट में कीड़े हो जाते हैं.
दूसरा पहलू यह भी है कि बकरियों के शेड में बहुत सारा चारा जमीन पर गिर जाता है. जिसके चलते चारे पर बकरी का यूरिन और मेंगनी (मैन्योर) भी लग जाता है. बकरी या उनके बच्चे जब इस चारे को खाते हैं तो इससे भी वो बीमार पड़ जाते हैं. इतना ही नहीं अगर जमीन कच्ची नहीं है तो यूरिन से उठने वाली गैस से भी बकरी और उनके बच्चे बीमार पड़ जाते हैं.
एक बड़ी बकरी को डेढ़ स्वायर मीटर जगह की जरूरत होती है. हमने दो मंजिला मकान का जो मॉडल बनाया है वो 10 मीटर चौड़ा और 15 मीटर लम्बा है. इस मॉडल मकान में नीचे 10 से 12 बड़ी बकरी रख सकते हैं. वहीं ऊपरी मंजिल पर 17 से 18 बकरी के बच्चों को बड़ी ही आसानी से रख सकते हैं. और इस साइज के मकान की लागत 1.80 लाख रुपये आती है. इस मकान को बनाने में इस्तेमाल होने वाली लोहे की एंगिल और प्लास्टिक की शीट बाजार में आसानी से मिल जाती है. रहा सवाल ऊपरी मंजिल पर बनाए गए फर्श का तो कई कंपनियां इस तरह का फर्श बना रही हैं और आनलाइन मिल भी रहा है.
आप बकरी पालना चाहते हैं. लेकिन शहर में रहने के चलते आपके पास जगह की कमी है. तो इसमे परेशान होने वाली बात नहीं है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा ने बकरी पालन में जगह की कमी को दूर करने के लिए दो मंजिला मकान बनाया है. एक बार बनाने के बाद 18 से 20 साल तक यह मकान चल जाता है. खास बात यह है कि इस मकान के दोहरे फायदे हैं. एक तो इससे जगह की कमी पूरी हो जाती है. वहीं बकरी के बच्चे तमाम तरह की बीमारियों से भी बच जाते हैं.
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