खाड़ी तनाव से चावल निर्यात संकट में, राइस मिलर्स ने सरकार से मांगी तत्काल राहत

खाड़ी तनाव से चावल निर्यात संकट में, राइस मिलर्स ने सरकार से मांगी तत्काल राहत

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण भारत के चावल निर्यात पर गंभीर असर पड़ा है. राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सरकार से ईरान के साथ बार्टर ट्रेड, सब्सिडी और लॉजिस्टिक सहायता जैसे तत्काल राहत उपायों की मांग की है, ताकि निर्यातकों को भारी नुकसान से बचाया जा सके.

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खाड़ी तनाव से चावल निर्यात संकट में, राइस मिलर्स ने सरकार से मांगी तत्काल राहतईरान युद्ध का असर बासमती निर्यात पर

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के चावल निर्यात पर साफ दिखाई देने लगा है. भारत के बासमती और अन्य चावल के खरीदारों में खाड़ी और पश्चिम एशिया के देश प्रमुख हैं. लेकिन ईरान-अमेरिका-इजरायल की लड़ाई ने इस सप्लाई चेन को पूरी तरह से बाधित कर दिया है. भारत से जाने वाले कंटेनर या तो बीच रूट में फंसे हैं या ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं. इससे निर्यातकों और किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है. इस नुकसान को देखते हुए  Punjab Rice Millers Exporters Association ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस गंभीर संकट से उबरने के लिए तुरंत राहत और विशेष कदम उठाने की मांग की है.

एसोसिएशन ने यह पत्र केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal को भेजा है, जिसमें बताया गया है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण भारत के चावल व्यापार पर भारी असर पड़ा है. खासकर, 80% से अधिक बासमती चावल का निर्यात पश्चिम एशियाई देशों को होता है, जहां मौजूदा हालात के चलते बड़ी मात्रा में माल समुद्र और बंदरगाहों पर फंसा हुआ है.

निर्यात पर पड़ा गहरा असर

एसोसिएशन के मुताबिक, भारत हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात करता है, जिसकी कीमत लगभग 55,000 करोड़ रुपये होती है. यह चावल 100 से ज्यादा देशों में भेजा जाता है. लेकिन 28 फरवरी 2026 से खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के बाद से निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इस प्रभाव को कम करने और निर्यात को नुकसान से निकालते हुए दोबारा पटरी पर लाने के लिए सरकार से कुछ जरूरी मांगें की गई हैं.

सरकार से की गई प्रमुख मांगें

राइस मिलर्स ने सरकार से कई अहम मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • ईरान के साथ बार्टर सिस्टम लागू कर कच्चा तेल मंगाया जाए. एसोसिएशन ने कहा है कि बार्टर सिस्टम के जरिये ईरान से तेल के बदले चावल भेजा जा सकता है और यह व्यापार रुपये में हो सकता है. इससे भारत में तेल का संकट दूर होगा और ईरान को बदले में चावल की खेप मिलेगी.
  • युद्ध के दौरान दौरान बैंक ब्याज में छूट की मांग की गई है.
  • लड़ाई के दौरान निर्यातकों को हुए वित्तीय नुकसान पर सब्सिडी देने की मांग की गई है.
  • बंदरगाहों और जहाजों में फंसे माल की सुरक्षा की मांग की गई है. देश-विदेश में कई जगह पोर्ट पर चावल की खेप फंसी है जिसे सुरक्षित रखने की गारंटी की मांग की गई है.
  • बढ़े हुए शिपिंग, बीमा और लॉजिस्टिक खर्चों पर सरकारी मदद.

ईरान के साथ व्यापार बढ़ाने का सुझाव

एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि भारत ईरान के साथ रुपये में व्यापार (बार्टर सिस्टम) शुरू कर सकता है. इससे एक तरफ भारत की तेल जरूरतें पूरी होंगी, वहीं दूसरी तरफ चावल निर्यात को भी राहत मिलेगी.

सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील

एसोसिएशन ने कहा है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और इसका असर किसानों तक भी पहुंचेगा. उन्होंने केंद्र सरकार से इस संकट के समाधान के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है.

राइस मिलर्स ने भरोसा जताया है कि सरकार इस कठिन समय में उद्योग के साथ खड़ी होगी और जल्द जरूरी कदम उठाएगी. जितनी जल्द राहत मिलेगी, निर्यातकों की परेशानी दूर होगी और लोकल बाजारों में भी इसका अच्छा असर दिखना शुरू होगा.

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