मक्का के भाव में गिरावट से किसान परेशानहरियाणा के करनाल जिले की अनाज मंडियों में जायद मक्का की आवक तेजी से बढ़ रही है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद नहीं होने से किसानों में असंतोष बढ़ गया है. किसानों ने राज्य सरकार से समर मक्का की सरकारी खरीद तुरंत शुरू करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि मंडियों में अच्छी मात्रा में फसल पहुंचने के बावजूद उन्हें निजी व्यापारियों को कम कीमत पर उपज बेचनी पड़ रही है. जायद मक्का एक इंटरक्रॉपिंग फसल है, जिसकी खेती रबी और खरीफ मक्का सीजन के बीच की जाती है. इसकी बुवाई आमतौर पर फरवरी के पहले हफ्ते से मार्च के पहले हफ्ते के बीच आलू, सरसों और मटर की फसल कटने के बाद की जाती है. इसकी कटाई जून महीने में होती है.
दि ट्रिब्यून के मुताबिक, 23 जून तक करनाल जिले की मंडियों में इस सीजन में कुल 3 लाख 58 हजार 610 क्विंटल मक्का पहुंच चुकी है. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1 लाख 89 हजार 864 क्विंटल था. सबसे ज्यादा 1 लाख 63 हजार 724 क्विंटल आवक कर्नाल अनाज मंडी में दर्ज की गई. इसके बाद इंद्री मंडी में 97 हजार 500 क्विंटल, घरौंडा में 67 हजार 116 क्विंटल, निसिंग में 26 हजार 935 क्विंटल और कुंजपुरा में 3 हजार 335 क्विंटल मक्का पहुंची.
किसानों का आरोप है कि सरकार की ओर से मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,410 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, लेकिन समर मक्का की खरीद शुरू नहीं होने से उन्हें निजी व्यापारियों को 1,100 रुपये से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच फसल बेचनी पड़ रही है. किसानों का कहना है कि इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
भारतीय किसान यूनियन (सर छोटू राम) के प्रवक्ता बहादुर सिंह मेहला ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को धान की खेती छोड़कर मक्का और अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर जाने के लिए प्रोत्साहित तो करती है, लेकिन जब फसल मंडियों तक पहुंचती है तब खरीद की व्यवस्था नहीं होती.
बहादुर सिंह मेहला ने कहा कि सरकार हर साल मक्का का MSP घोषित करती है, लेकिन जब किसान उपज लेकर मंडी पहुंचते हैं तो प्रभावी खरीद तंत्र दिखाई नहीं देता. उन्होंने कहा कि इसी कारण किसानों को अपनी उपज कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. उन्होंने जायद मक्का की MSP पर खरीद शुरू करने की मांग दोहराई.
किसान सुखजिंदर सिंह ने कहा कि सरकार को खरीफ, रबी और जायद तीनों प्रकार की मक्का की खरीद MSP पर करनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था किसानों को MSP का वास्तविक लाभ नहीं दे पा रही है. सुखजिंदर सिंह ने कहा कि केवल MSP घोषित करना पर्याप्त नहीं है. सरकार को कानूनी गारंटी के साथ सभी मंडियों में 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए.
ट्रिब्यून के मुताबिक, नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने कहा कि खरीफ और रबी मक्का की खरीद MSP पर होती है, लेकिन जायद मक्का को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है. उन्होंने कहा कि यह हैरानी की बात है कि जायद मक्का उत्पादकों को समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल रहा और उन्हें निजी व्यापारियों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है.
डॉ. लाठर ने कहा कि सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि उन्होंने फसल उत्पादन में पर्याप्त निवेश किया है. उन्होंने सरकार से किसानों की मांग पर विचार करने और समर मक्का को भी MSP खरीद व्यवस्था में शामिल करने की अपील की.
डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने किसानों को सलाह दी कि वे जायद मक्का के बजाय समर मूंग की खेती पर विचार करें. उन्होंने कहा कि जायद मक्का में गर्मी के मौसम के दौरान 15 से अधिक सिंचाई की जरूरत पड़ती है, जबकि जायद मूंग केवल 3 से 4 सिंचाई में तैयार हो जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि मूंग की खेती मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है.
वहीं, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के एक अधिकारी ने कहा कि समर मक्का की खरीद को लेकर निर्णय मंडी समिति स्तर पर नहीं लिया जाता. उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला सरकार तय करती है.
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