Maize Export: सस्‍ते दामों से बढ़ी विदेशों में भारतीय मक्‍का की मांग, निर्यात 24 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान

Maize Export: सस्‍ते दामों से बढ़ी विदेशों में भारतीय मक्‍का की मांग, निर्यात 24 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान

घरेलू बाजार में कमजोर कीमतों और पड़ोसी देशों से बढ़ती मांग के चलते भारत का मक्का निर्यात मार्केटिंग वर्ष 2025-26 में 24 लाख टन तक पहुंच सकता है. USDA के स्थानीय कार्यालय ने निर्यात अनुमान 10 लाख टन से बढ़ाकर 24 लाख टन कर दिया है. नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत ने 9.96 लाख टन मक्का निर्यात किया, जो पिछले साल से तीन गुना अधिक है.

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सस्‍ते दामों से बढ़ी विदेशों में भारतीय मक्‍का की मांग, निर्यात 24 लाख टन तक पहुंचने का अनुमानमक्‍का निर्यात में तेजी

घरेलू बाजार में मक्का की कमजोर कीमतों ने भारत के लिए निर्यात का नया मौका खोल दिया है. पड़ोसी देशों से बढ़ती मांग के चलते चालू मार्केटिंग वर्ष 2025-26 (अक्‍टूबर तक) में भारत का मक्का निर्यात 24 लाख टन तक पहुंच सकता है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के स्थानीय कार्यालय ने हालिया शिपमेंट रुझानों को देखते हुए निर्यात अनुमान में बड़ा संशोधन किया है. USDA के स्थानीय कार्यालय ने मार्केटिंग वर्ष 2025-26 के लिए भारत के मक्का निर्यात का अनुमान बढ़ाकर 24 लाख टन कर दिया है. इससे पहले विभाग ने 10 लाख टन निर्यात का अनुमान जताया था. वहीं, आयात अनुमान घटाकर 50 हजार टन कर दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में निर्यात गतिविधियों में लगातार तेजी दर्ज की गई है.

पहले पांच महीने में तीन गुना बढ़ा निर्यात

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, USDA ने अपने अनुमान में बताया कि नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच यानी मार्केटिंग वर्ष 2025-26 के शुरुआती पांच महीनों में भारत ने 9.96 लाख टन मक्का निर्यात किया. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले तीन गुना से अधिक रहा. औसतन हर महीने करीब 2 लाख टन मक्का की शिपमेंट दर्ज की गई.

बांग्लादेश से वियतनाम तक बढ़ी भारतीय मक्का की मांग

USDA के स्थानीय कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अपेक्षाकृत कमजोर मक्का कीमतों के कारण पड़ोसी बाजारों में भारतीय मक्का की मांग दोबारा मजबूत हुई है. बांग्लादेश, वियतनाम, नेपाल, श्रीलंका और भूटान जैसे देशों में कम शिपिंग लागत और छोटे आकार की खेप भेजने की सुविधा से भारतीय निर्यातकों को फायदा मिला है. रिपोर्ट में कहा गया कि अगर भारतीय मक्का अन्य देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध रहा तो पूरे मार्केटिंग वर्ष में निर्यात मजबूत बना रह सकता है.

अगले साल दबाव में आ सकता है निर्यात

USDA के स्थानीय कार्यालय ने संकेत दिया कि मार्केटिंग वर्ष 2026-27 में मक्का निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. इसकी वजह घरेलू आपूर्ति में संभावित सख्ती और देश के भीतर मांग में लगातार वृद्धि बताई गई है. विभाग ने अगले मार्केटिंग वर्ष के लिए निर्यात अनुमान घटाकर 10 लाख टन रखा है, जबकि आयात 1 लाख टन रहने का अनुमान जताया है.

धीमे मॉनसून के बावजूद बढ़ी मक्का बुवाई

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 19 जून तक देश में मक्का की बुवाई 5.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 5.34 लाख हेक्टेयर थी. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज हुई है, जब मध्य भारत के प्रमुख उत्पादक इलाकों में मॉनसून की शुरुआत देर से हुई और उसकी प्रगति भी धीमी रही. पिछले खरीफ सीजन में रिकॉर्ड 98.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती की गई थी.

रिकॉर्ड उत्पादन के बाद बाजार में दबाव

तीसरे अग्रिम अनुमान के आधार पर वर्ष 2025-26 के लिए भारत का मक्का उत्पादन बढ़ाकर रिकॉर्ड 5.5 करोड़ टन आंका गया है. यह पिछले वर्ष के मुकाबले 27 प्रतिशत अधिक है. बेहतर मॉनसून, रिकॉर्ड बुवाई और मजबूत उपज ने उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. साथ ही पिछले मार्केटिंग वर्ष में बेहतर कीमतों ने भी किसानों को मक्का क्षेत्र बढ़ाने के लिए प्रेरित किया.

MSP बढ़ा, लेकिन बाजार भाव बेहद कम

सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 10 रुपये बढ़ाकर 2410 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. लेकिन बाजार में मक्का के दाम कई महीनों से MSP से नीचे बने हुए हैं. मई 2026 में प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता राज्यों में औसत स्पॉट कीमत 17,950 रुपये से 21,000 रुपये प्रति टन के बीच रही.

यह पिछले साल के मुकाबले 14 प्रतिशत कम और MSP स्तर से करीब 19 प्रतिशत नीचे रही. USDA का अनुमान है कि मार्केटिंग वर्ष 2026-27 में भारत का मक्का उत्पादन घटकर 4.7 करोड़ टन रह सकता है. ऐसे में घरेलू मांग और सीमित आपूर्ति के कारण निर्यात क्षमता पर दबाव बढ़ने की संभावना जताई गई है.

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