प्याज के ताजा भाव जानेंदेशभर में जुलाई 2026 के दौरान प्याज की थोक कीमतों में बड़ी तेजी दर्ज की गई है. राज्यवार होलसेल रेट एनालिसिस के अनुसार, जून के मुकाबले जुलाई में अधिकांश राज्यों में प्याज के दाम बढ़े हैं. राष्ट्रीय स्तर पर प्याज की औसत थोक कीमत बढ़कर 2,532.35 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई, जबकि जून 2026 में यह 2,017.16 रुपये प्रति क्विंटल थी. यानी एक महीने में औसतन करीब 25.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नई फसल की कम आवक, भंडारण लागत और कई प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में आपूर्ति के दबाव की वजह से कीमतों में यह उछाल देखने को मिला है. हालांकि किसानों को बेहतर दाम मिलने से राहत मिली है, लेकिन उपभोक्ताओं की रसोई का बजट प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
जुलाई के दौरान सबसे अधिक मासिक बढ़ोतरी तेलंगाना में दर्ज की गई, जहां प्याज की कीमतें जून की तुलना में 48.5 फीसदी बढ़कर 1,796 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गईं.
इसके अलावा कर्नाटक में 47.1% बढ़ोतरी और कीमत 2,231 रुपये प्रति क्विंटल, बिहार में 46.1% बढ़ोतरी के साथ कीमत 2,554 रुपये प्रति क्विंटल, पश्चिम बंगाल में 41.3% बढ़ोतरी के साथ कीमत 2,589 रुपये प्रति क्विंटल, छत्तीसगढ़ में 41.9% बढ़ोतरी के साथ कीमत 2,116 रुपये प्रति क्विंटल और
दिल्ली (एनसीटी) में 41.4% बढ़ोतरी के साथ कीमत 2,190 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई.
इन राज्यों में बाजारों में आवक कम रहने और मांग स्थिर रहने से कीमतों में तेजी बनी रही.
पूर्वोत्तर राज्यों में प्याज की कीमतें देश के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी अधिक रहीं. मणिपुर में 4,548 रुपये प्रति क्विंटल, मेघालय में 4,406 रुपये प्रति क्विंटल, केरल में 3,919 रुपये प्रति क्विंटल, तमिलनाडु में 3,661 रुपये प्रति क्विंटल और जम्मू-कश्मीर में 3,082 रुपये प्रति क्विंटल भाव रहा.
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी परिवहन दूरी और सीमित स्थानीय उत्पादन के कारण इन क्षेत्रों में कीमतें कुछ अधिक रहती हैं.
जुलाई 2025 की तुलना में भी कई राज्यों में प्याज की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इससे साफ पता चलता है कि पिछले एक साल के दौरान प्याज बाजार में मजबूती बनी रही है और कई राज्यों में भाव लगभग दोगुने के करीब पहुंच गए हैं.
जहां अधिकांश राज्यों में कीमतें बढ़ी हैं, वहीं कुछ राज्यों में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई. इसमें नागालैंड में 50% गिरावट तो बिहार में 21.8% गिरावट दर्ज की गई. इन राज्यों में लोकल उपलब्धता बेहतर रहने और पिछले साल के उच्च आधार प्रभाव को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा सकता है.
प्याज उत्पादक किसानों के लिए मौजूदा कीमतें राहत लेकर आई हैं, क्योंकि पिछले कुछ साल में कई बार उन्हें लागत से कम दाम मिलने की शिकायत रही है. दूसरी ओर, लगातार बढ़ते भाव खुदरा बाजारों में भी असर दिखा सकते हैं. यदि आगामी महीनों में आवक नहीं बढ़ी तो उपभोक्ताओं को और महंगा प्याज खरीदना पड़ सकता है.
कुल मिलाकर जुलाई 2026 की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि देश का प्याज बाजार फिलहाल मजबूती के दौर से गुजर रहा है. आने वाले महीनों में खरीफ प्याज की आवक और मौसम की स्थिति कीमतों की दिशा तय करेगी.
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