बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद धीमीसरकार ने प्याज की खरीद कीमतें बढ़ाई हैं, इसके बावजूद खरीद में कोई तेजी नहीं देखी जा रही है. किसान प्याज की खरीद कीमत (MAPP) का विरोध कर रहे हैं. यही वजह है कि 2026 के बफर स्टॉक के लिए सरकार की तरफ से प्याज की खरीद धीमी गति से शुरू हुई है. खरीद की कीमत तीन बार बढ़ाए जाने के बावजूद, 1 जून से अब तक सिर्फ 2,000 टन प्याज ही खरीदा गया है.
खरीद का काम करने वाली दो नोडल एजेंसियों - नेफेड (Nafed) और नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCCF) - ने अब तक सरकार द्वारा 'प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड' (PSF) के तहत तय किए गए 2 लाख टन के लक्ष्य का सिर्फ 1 प्रतिशत ही हासिल किया है.
सीजन शुरू होने के बाद से खरीद की कीमत में तेजी से बदलाव किए गए हैं- 22 मई को कीमत 12.70 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलोग्राम की गई, फिर 13 जून को इसे 16.50 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया, और हाल ही में 20 जून को इसे 17.30 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने PTI को बताया, "1 जून से अब तक लगभग 2,000 टन प्याज खरीदा गया है."
बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि समस्या प्याज की क्वालिटी में अंतर की वजह से है.
देश की सबसे बड़ी थोक प्याज मंडी, नासिक के लासलगांव के व्यापारी रमेश पाटिल ने PTI को बताया, "बाजार में 'ग्रेड A' प्याज की अच्छी कीमत मिल रही है. 17.30 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर सरकारी एजेंसियां मुख्य रूप से URS (ढीली शर्तों वाले स्पेसिफिकेशन) प्याज तक ही सीमित हैं, क्योंकि ज्यादातर 'ग्रेड A' प्याज निर्यात के लिए भेजा जा रहा है."
लासलगांव के ही एक अन्य व्यापारी नितिन सेठ ने कहा कि किसानों का नजरिया एक अहम बात है.
सेठ ने कहा, "मंडियों में प्याज की आवक अच्छी रही है, लेकिन कुछ किसान बेहतर कीमत की उम्मीद में अपना स्टॉक रोककर रखे हुए हैं. कीमत में तीन बार की बढ़ोतरी भी उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है."
इस बात की संभावना कम है कि सरकार निकट भविष्य में खरीद की दर फिर से बढ़ाएगी.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कीमत में एक और बदलाव से व्यापारियों के बीच कार्टेल बनाने (मिलीभगत) को बढ़ावा मिलने का जोखिम है.
हालांकि, मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने धीमी शुरुआत को ज्यादा अहमियत नहीं दी. उन्होंने कहा कि पहले महीने में खरीद की रफ्तार मोटे तौर पर पिछले साल जैसी ही है और आने वाले महीनों में इसके तेज होने की उम्मीद है.
बफर स्टॉक के लिए प्याज रबी सीजन की फसल से लिया जाता है और इसे सप्लाई कम होने वाले महीनों में कीमतों में अचानक उछाल को रोकने के लिए स्टोर किया जाता है, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों का बचाव होता है. बेमौसम बारिश की वजह से प्याज की क्वालिटी पर असर पड़ा है.
सरकार ने 2026 के लिए खरीद और स्टोरेज के सिस्टम में बदलाव किया है.
सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (CWC) को नोडल स्टोरेज एजेंसी बनाया गया है, जो स्टोरेज के कड़े नियमों के तहत काम करेगी. नेफेड (Nafed) और NCCF ने भी कामकाज की क्षमता बेहतर करने के लिए अपनी खरीद करने वाली सोसायटियों के नेटवर्क को व्यवस्थित किया है.
प्रोडक्शन के मामले में, कृषि मंत्रालय ने 2025-26 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए प्याज का उत्पादन 307.71 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग उतना ही है. अगर खरीद धीमी रहती है, तो सप्लाई के मोर्चे पर इससे कोई खास राहत नहीं मिलेगी.
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