हरियाणा में धान की सरकारी खरीद (सांकेतिक तस्वीर)हरियाणा की मंडियों में धान की सरकारी खरीद लगातार जारी है. राज्य सरकार के मुताबिक, 21 अक्टूबर 2026 तक मंडियों में 30.26 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है. इसमें से सरकारी खरीद एजेंसियां 24.93 लाख मीट्रिक टन धान खरीद चुकी हैं. प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले के मंत्री राजेश नागर ने बताया कि सरकार किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीदने और उन्हें समय पर भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है. मंडियों में धान की आवक, खरीद, उठान और भुगतान पर लगातार नजर रखी जा रही है.
मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने हरियाणा में धान खरीद का कुल लक्ष्य 58 लाख मीट्रिक टन रखा है. वहीं, 21 अक्टूबर तक इस लक्ष्य के मुकाबले करीब 52 फीसदी धान मंडियों में पहुंच चुका है. सरकारी एजेंसियों ने कुल आवक का लगभग 82 फीसदी धान खरीद लिया है. खरीदे गए धान में से 17.54 लाख मीट्रिक टन का उठान भी हो चुका है. यानी खरीदे गए धान का करीब 70 फीसदी मंडियों से उठाया जा चुका है.
राजेश नागर ने बताया कि अब तक प्रदेश के 1,84,794 किसानों को धान खरीद प्रक्रिया का लाभ मिला है. किसानों को उनकी फसल के MSP के रूप में 3,447 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. सरकार का कहना है कि किसानों को फसल बेचने में परेशानी न हो और भुगतान में अनावश्यक देरी न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
धान खरीद में खाद्य विभाग, हैफेड और हरियाणा राज्य भंडारण निगम की भूमिका अहम है. 21 अक्टूबर तक इन एजेंसियों की खरीद का आंकड़ा इस प्रकार है:
- खाद्य विभाग: 13.60 लाख मीट्रिक टन
- हैफेड: 7.63 लाख मीट्रिक टन
- हरियाणा राज्य भंडारण निगम (HSWC): 3.70 लाख मीट्रिक टन
तीनों एजेंसियों ने मिलकर कुल 24.93 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा है.
मंत्री ने बताया कि खरीद के साथ-साथ धान को मंडियों से उठाने का काम भी जारी है. खाद्य विभाग ने 9.83 लाख मीट्रिक टन, हैफेड ने 5.41 लाख मीट्रिक टन और हरियाणा राज्य भंडारण निगम ने 2.30 लाख मीट्रिक टन धान का उठान किया है. सरकार संबंधित अधिकारियों और खरीद एजेंसियों के कामकाज की नियमित समीक्षा कर रही है, ताकि मंडियों में धान जमा न हो और खरीद प्रक्रिया सुचारू बनी रहे.
सरकारी एजेंसियों के अलावा निजी व्यापारियों ने भी 21 अक्टूबर तक करीब 24,054 मीट्रिक टन धान खरीदा है. निजी व्यापारियों के यहां धान का औसत भाव 2,467 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. अलग-अलग सौदों में भाव 2,461 रुपये से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा. मंत्री राजेश नागर ने किसानों से अपील की कि वे अपनी फसल निर्धारित मानकों के अनुसार मंडियों में लाएं. खरीद से जुड़ी किसी भी समस्या पर संबंधित अधिकारियों को जानकारी दें, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके. सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है. खरीद सीजन के दौरान फसल की खरीद, उठान और भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.
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