गन्ने के दाम पर आर-पार की लड़ाई, जालना में स्वाभिमानी किसान संगठन ने रोका हाईवे

गन्ने के दाम पर आर-पार की लड़ाई, जालना में स्वाभिमानी किसान संगठन ने रोका हाईवे

महाराष्ट्र के जालना में स्वाभिमानी किसान संगठन ने गन्ने का अंतिम भाव 5 हजार रुपये प्रति टन करने की मांग को लेकर धुले-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रास्ता रोको आंदोलन किया. संगठन ने सूखे गन्ने की पहले कटाई और किसानों के भुगतान से कोई कटौती नहीं करने की मांग भी उठाई. आंदोलन के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.

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गन्ने के दाम पर आर-पार की लड़ाई, जालना में स्वाभिमानी किसान संगठन ने रोका हाईवेजालना में गन्ना किसानों का गुस्सा सड़क पर आया

महाराष्ट्र के जालना जिले में गन्ना किसानों को उचित दाम दिलाने की मांग को लेकर स्वाभिमानी किसान संगठन ने धुले-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रास्ता रोको आंदोलन किया. संगठन ने चालू पेराई सीजन के लिए गन्ने का अंतिम भाव 5 हजार रुपये प्रति टन घोषित करने की मांग की है. इसके साथ ही पानी की कमी के कारण सूखकर खराब हो रहे गन्ने की पहले कटाई करने और किसानों के भुगतान से किसी भी तरह की कटौती नहीं करने की मांग भी उठाई गई. आंदोलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ.

गन्ने का अंतिम भाव 5 हजार रुपये प्रति टन करने की मांग

स्वाभिमानी किसान संगठन ने मांग की है कि जालना जिले की सभी चीनी मिलें और गुड़ पाउडर बनाने वाली इकाइयां चालू पेराई सीजन के लिए गन्ने का अंतिम भाव 5 हजार रुपये प्रति टन घोषित करें. संगठन का कहना है कि गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलना चाहिए. इसी मांग को लेकर संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. संगठन चाहता है कि गन्ना किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिले, ताकि खेती पर होने वाले खर्च को पूरा करने में उन्हें मदद मिल सके. गन्ने की खेती में किसानों को पानी, खाद, मजदूरी और फसल की कटाई जैसे कई कामों पर पैसा खर्च करना पड़ता है. ऐसे में गन्ने का उचित भाव मिलना किसानों के लिए बहुत जरूरी है.

सूखे और खराब गन्ने की पहले कटाई करने की मांग

इस आंदोलन में किसानों की एक और बड़ी समस्या उठाई गई. संगठन ने मांग की कि पानी की कमी के कारण सूखकर खराब हो रहे गन्ने की कटाई को प्राथमिकता दी जाए. जालना जिले के कुछ इलाकों में पानी की कमी के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हो रही है. ऐसी स्थिति में खेतों में खड़े गन्ने को ज्यादा समय तक छोड़ने से किसानों को और नुकसान होने का डर है. संगठन का कहना है कि चीनी मिलों को ऐसे गन्ने की कटाई पहले करनी चाहिए, जो पानी की कमी के कारण सूख रहा है. इससे किसानों को अपनी खराब होती फसल को जल्द से जल्द मिल तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है. अगर कटाई में देरी होती है, तो किसानों की मेहनत और खेती पर लगाया गया पैसा बर्बाद होने का खतरा बढ़ जाता है.

किसानों के भुगतान से कोई कटौती नहीं करने की मांग

स्वाभिमानी किसान संगठन ने यह भी मांग की कि सूखे और खराब गन्ने की कटाई के दौरान किसानों के भुगतान से किसी भी तरह की रकम नहीं काटी जाए. संगठन के मुताबिक, पानी की कमी के कारण फसल पहले ही प्रभावित हो रही है. ऐसे में किसानों को उनके गन्ने का पूरा भुगतान मिलना चाहिए. संगठन चाहता है कि चीनी मिलें किसानों की स्थिति को समझें और खराब हो रही फसल को लेकर जरूरी कदम उठाएं. किसानों को उनकी उपज का उचित भाव देने के साथ-साथ भुगतान में किसी भी तरह की कटौती नहीं करने की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा रही.

अंकुशनगर में चीनी मिल के सामने हुआ आंदोलन

यह रास्ता रोको आंदोलन जालना जिले के अंबड तालुका के अंकुशनगर में कर्मयोगी अंकुशराव टोपे समर्थ सहकारी चीनी मिल के सामने किया गया. स्वाभिमानी किसान संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता धुले-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर इकट्ठा हुए. यहां उन्होंने गन्ने के भाव और सूखे गन्ने की कटाई से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. संगठन के कार्यकर्ताओं ने गन्ना किसानों की समस्याओं को उठाते हुए मांग की कि चालू पेराई सीजन में किसानों को उचित दाम दिलाने और उनकी खराब होती फसल को बचाने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं.

रास्ता रोको आंदोलन से हाईवे पर लगी वाहनों की कतारें

राष्ट्रीय राजमार्ग पर आंदोलन होने के कारण सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. इससे धुले-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा. सड़क पर वाहनों की आवाजाही बाधित होने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की. पुलिस ने स्वाभिमानी किसान संगठन के कार्यकर्ताओं से बातचीत की. इसके बाद प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाया गया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात फिर से शुरू कराया गया. इस तरह आंदोलन के कारण कुछ समय तक प्रभावित रहा यातायात बाद में सुचारु हो गया.

गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर संगठन ने उठाई आवाज

जालना में हुए इस आंदोलन के जरिए स्वाभिमानी किसान संगठन ने गन्ना किसानों की तीन प्रमुख मांगें उठाईं. इनमें गन्ने का अंतिम भाव 5 हजार रुपये प्रति टन घोषित करना, पानी की कमी से सूख रहे गन्ने की प्राथमिकता से कटाई करना और किसानों के भुगतान से कोई कटौती नहीं करना शामिल है. अब इन मांगों पर चीनी मिलों और संबंधित प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर किसानों की नजर रहेगी. संगठन की मांग है कि किसानों को उचित दाम मिले और पानी की कमी के कारण खराब हो रही फसल से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय पर कार्रवाई की जाए.

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