खेत भारत के... मुनाफा विदेशों का! खाने के तेल में आखिर कौन जीत रहा है बाजी?

खेत भारत के... मुनाफा विदेशों का! खाने के तेल में आखिर कौन जीत रहा है बाजी?

भारत तिलहन उत्पादन में आगे होने के बावजूद अपनी खाद्य तेल जरूरतों के लिए 55-57% तक आयात पर निर्भर है. आखिर क्यों सरसों, सोयाबीन और मूंगफली उगाने वाले किसानों के देश में विदेशी तेल का दबदबा है? जानिए भारत के कमजोर तिलहन सिस्टम, किसानों की चुनौतियों और खाद्य तेल आत्मनिर्भरता की पूरी कहानी.

Advertisement
खेत भारत के... मुनाफा विदेशों का! खाने के तेल में आखिर कौन जीत रहा है बाजी?तेल आयात पर निर्भर भारत

भारत में खेत हैं, किसान हैं, तिलहन की फसलें हैं और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी में शामिल एक बड़ा बाजार भी है. फिर भी जब भारतीय रसोई में तेल का तड़का लगता है तो उसमें बड़ा हिस्सा विदेशी तेल का होता है. सवाल यह नहीं है कि भारत तेल आयात क्यों करता है? बड़ा सवाल यह है कि तिलहन उत्पादन में सक्षम होने के बाद भी भारत आत्मनिर्भर क्यों नहीं बन पाया? क्यों किसान सरसों, सोयाबीन और मूंगफली उगाने के बाद भी बेहतर कमाई नहीं कर पा रहा? क्यों देश को हर साल लाखों टन पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल बाहर से खरीदना पड़ता है? जवाब छिपा है भारत के पूरे तिलहन सिस्टम की कमजोरियों में.

भारत तिलहन उत्पादन में बड़ा खिलाड़ी, फिर भी विदेशी तेल का सहारा

भारत दुनिया के बड़े तिलहन उत्पादक देशों में शामिल है. देश में हर साल करीब 350-400 लाख टन तिलहन उत्पादन होता है.

प्रमुख फसलें:

  • सरसों
  • सोयाबीन
  • मूंगफली
  • सूरजमुखी
  • तिल
  • अलसी

लेकिन इतनी बड़ी खेती के बावजूद भारत अपनी जरूरत का लगभग 55-57% खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है. यानी खेतों में फसल भारत की है, लेकिन रसोई में पहुंचने वाला तेल कई बार इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना और ब्राजील से आता है.

पहली बड़ी समस्या: किसान के लिए तिलहन फायदे का सौदा नहीं

भारत में किसान वही फसल ज्यादा उगाता है जिसमें उसे जोखिम कम और आमदनी ज्यादा दिखाई देती है. गेहूं और धान जैसी फसलों को जहां सरकारी खरीद और MSP का मजबूत सहारा मिलता है, वहीं तिलहन किसानों को ऐसी सुरक्षा कम मिलती है. यानी इसमें किसानों को अधिक खतरा रहता है जिस वजह से वो इससे पीछे भागते हैं.

नतीजा:

  • किसान सरसों और सोयाबीन उगाता जरूर है, लेकिन बाजार की खराब व्यवस्था उसे परेशान करती है.
  • अगर मंडी में कीमत गिर गई तो किसान को नुकसान उठाना पड़ता है.
  • दूसरी बड़ी समस्या: भारत ने उत्पादन बढ़ाया, लेकिन प्रोसेसिंग सिस्टम नहीं बनाया
  • सिर्फ फसल पैदा करना काफी नहीं होता.
  • किसान से लेकर उपभोक्ता तक पूरी वैल्यू चेन मजबूत होनी चाहिए.

लेकिन भारत में:

  • आधुनिक तेल मिलों की कमी
  • छोटे स्तर की प्रोसेसिंग यूनिट की कमी
  • स्टोरेज की कमी
  • बेहतर मार्केट लिंक की कमी

आज भी बड़ी चुनौती है.

यही वजह है कि किसान को अपनी फसल का पूरा फायदा नहीं मिलता और देश को तैयार तेल आयात करना पड़ता है.

तीसरी समस्या: सस्ता विदेशी तेल बना घरेलू किसानों की चुनौती

जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल या सोयाबीन तेल सस्ता होता है तो भारत में आयात बढ़ जाता है. इसका सीधा असर घरेलू किसानों पर पड़ता है. अगर बाजार में सस्ता विदेशी तेल उपलब्ध है तो मिलर्स और कंपनियां घरेलू तिलहन खरीदने में कम रुचि दिखाती हैं ना की किसानों से महंगा तेल खरीदते हैं.

नतीजा:

विदेशी किसान और विदेशी तेल कंपनियां मजबूत होती हैं, लेकिन भारतीय किसान को अपनी फसल का सही मूल्य नहीं मिलता.

10 साल में नहीं बदली भारत की तस्वीर

भारत की खाद्य तेल निर्भरता

साल आयात निर्भरता
2014-15 करीब 60%
2016-17 करीब 55%
2018-19 करीब 55%
2020-21 करीब 65%
2022-23 करीब 57%
2023-24 करीब 55-57%

यानी एक दशक बाद भी भारत अपनी आधी से ज्यादा जरूरत के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है.

भारत किन देशों को दे रहा है अरबों डॉलर?

भारत का खाद्य तेल आयात मुख्य रूप से इन देशों से आता है:

देश तेल
इंडोनेशिया पाम ऑयल
मलेशिया पाम ऑयल
अर्जेंटीना सोयाबीन तेल
ब्राजील सोयाबीन तेल
रूस/यूक्रेन सूरजमुखी तेल

असल समस्या कहां है? खेत में या नीति में?

भारत की समस्या उत्पादन की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की है.

किसान के पास क्या है:

  • जमीन है
  • मेहनत है
  • फसल उगाने की क्षमता है

लेकिन कमी क्या है:

  • बेहतर कीमत की
  • आधुनिक प्रोसेसिंग मशीन की
  • मजबूत बाजार व्यवस्था की
  • लंबी अवधि की नीति की

भारत की खाद्य तेल निर्भरता

खाद्य तेल निर्भरता
खाद्य तेल निर्भरता

भारत के प्रमुख तिलहन उत्पादन

प्रमुख तिलहन उत्पादन
प्रमुख तिलहन उत्पादन

भारत के खाद्य तेल आयात में हिस्सेदारी

खाद्य तेल
खाद्य तेल

बड़ा सवाल: खेत भारत के, फायदा किसका?

भारत में तिलहन उगाने वाले किसान मौजूद हैं, बाजार मौजूद है और मांग भी लगातार बढ़ रही है. लेकिन उत्पादन, प्रोसेसिंग और बेहतर कीमत की कमी के कारण भारत अभी भी विदेशी तेल पर निर्भर है. जरूरत है कि देश सिर्फ तिलहन उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार, आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट और स्थिर कीमतें भी मिले.

क्योंकि जब तक खेत से लेकर बाजार तक पूरी व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक "खेत भारत के और मुनाफा विदेशों का" वाली तस्वीर बदलना मुश्किल रहेगा.

ये भी पढ़ें: 

कैंसर से लड़ने की ताकत रखते हैं ये देसी चावल! जानें लाईचा, गठुअन, करहनी का बड़ा राज
Shrimp Export: जापान, रूस, अमेर‍िका और EU ने लौटाया भारतीय झींगा, ग्लोबल मार्केट में लगा झटका...कौन ज‍िम्मेदार?

POST A COMMENT