बासमती चावल का रकबा 4% घटा, उत्पादन कम होने की आशंका; कीमतों में तेजी

बासमती चावल का रकबा 4% घटा, उत्पादन कम होने की आशंका; कीमतों में तेजी

भारत में इस साल बासमती चावल की खेती का रकबा करीब 4% घटा है. इससे उत्पादन कम होने की संभावना जताई जा रही है. वहीं, बासमती की कीमतों में 15-20% तक तेजी देखी जा रही है, जिससे किसानों और निर्यातकों की उम्मीदें बढ़ी हैं.

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बासमती चावल का रकबा 4% घटा, उत्पादन कम होने की आशंका; कीमतों में तेजीबासमती चावल

इस साल भारत में बासमती चावल का उत्पादन कम होने की संभावना है. इसकी मुख्य वजह बासमती की खेती के रकबे में आई कमी है. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस साल बासमती की खेती का क्षेत्र करीब 1 लाख हेक्टेयर घट गया है. यह 2025 के मुकाबले लगभग 4 प्रतिशत कम है. रकबे में सबसे ज्यादा कमी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में है. वहीं, बासमती का रकबा घटने का असर आने वाले समय में इसकी कीमतों पर भी पड़ सकता है. अगर उत्पादन कम रहा और देश-विदेश में बासमती की मांग बनी रही, तो किसानों को फसल के बेहतर दाम मिल सकते हैं. साथ ही निर्यातकों को भी विदेशी खरीदारों के साथ बेहतर कीमत पर सौदा करने का मौका मिल सकता है.

दो साल से लगातार घट रहा रकबा

'बिजनेस लाइन' के मुताबिक,  इंडस्ट्री के अनुसार, 2025 में देश में करीब 24.9 लाख हेक्टेयर जमीन पर बासमती की खेती हुई थी. वहीं, इस साल इसमें करीब 1 लाख हेक्टेयर की कमी बताई जा रही है. हालांकि, पंजाब में बासमती का रकबा पिछले साल के लगभग बराबर बना हुआ है. यहां इस साल उत्पादन पिछले साल की तुलना में ज्यादा हो सकता है. इसकी वजह यह है कि 2025 में पंजाब में भारी बारिश और बाढ़ के कारण बासमती की फसल को नुकसान हुआ था. अगर पिछले कुछ सालों की बात करें तो 2024 में बासमती की खेती का रकबा करीब 27.5 लाख हेक्टेयर बताया गया था. यानी लगातार दूसरे साल बासमती की खेती का क्षेत्र घटा है.

मध्य प्रदेश में भी कम हुई खेती

बासमती की खेती कुछ ऐसे राज्यों में भी होती है, जिन्हें GI टैग वाले प्रमुख बासमती क्षेत्रों में शामिल नहीं किया जाता. इनमें मध्य प्रदेश भी शामिल है. इस साल कम बारिश का असर MP में भी चावल की खेती पर पड़ा है. 4 सितंबर तक मध्य प्रदेश में चावल का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 1.75 लाख हेक्टेयर कम था. 2025 के खरीफ सीजन में राज्य में करीब 42.10 लाख हेक्टेयर में चावल की खेती हुई थी. इंडस्ट्री का अनुमान है कि मध्य प्रदेश में करीब 6-7 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती होती है. इस साल चावल के रकबे में जो कमी आई है, उसका बड़ा हिस्सा बासमती के रकबे में कमी के कारण बताया जा रहा है.

बासमती की कीमतों में 15-20% की तेजी

रकबा घटने के बीच भारतीय बासमती की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है. अभी भारतीय बासमती का भाव करीब 1,160 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 15-20 फीसदी ज्यादा है. इससे भारतीय निर्यातकों को विदेशी खरीदारों के साथ बेहतर दाम पर सौदा करने का मौका मिल सकता है. खासकर पश्चिमी एशिया के बाजार में भारतीय बासमती की अच्छी मांग रहती है. इस क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच भी निर्यातकों को बाजार से बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है.

करनाल में पूसा 1509 की आवक शुरू

हरियाणा के करनाल में किसानों ने पूसा 1509 बासमती की फसल बाजार में लाना शुरू कर दिया है. यह किस्म दूसरी कई बासमती किस्मों की तुलना में जल्दी तैयार हो जाती है, इसलिए इसकी आवक भी पहले शुरू हो जाती है. फिलहाल करनाल में पूसा 1509 करीब 3,950 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है. व्यापारियों के मुताबिक, करनाल के साथ उत्तर प्रदेश के शामली जिले से आने वाली बासमती की भी अच्छी मांग है. व्यापारियों का कहना है कि प्रीमियम किस्म पूसा 1121 का रकबा कम बताया जा रहा है. ऐसे में आने वाले समय में बासमती की कीमतों में और तेजी की उम्मीद जताई जा रही है.

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