कृषि मंत्री शिवराज सिंह केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि दक्षिणी राज्यों के किसानों के लिए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) नए निर्यात के अवसर खोल सकते हैं. उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ समेत दूसरे देशों के साथ हुए FTA के तहत दक्षिण भारत की कई नकदी फसलों को बिना आयात शुल्क यानी ड्यूटी-फ्री एक्सपोर्ट के विदेशी बाजारों में भेजने का मौका मिलेगा. इनमें इलायची, काली मिर्च, हल्दी, कॉफी, चाय, नारियल, काजू, फल और समुद्री उत्पाद शामिल हैं.
दक्षिणी राज्यों के क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से नकदी फसलों को बढ़ावा देने के लिए ठोस योजना बनाने को कहा. उन्होंने कहा कि इन फसलों की विदेशों में मांग है और दक्षिणी राज्यों में इनका उत्पादन भी बड़े स्तर पर होता है. ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने के लिए इन फसलों को एक्सपोर्ट से जोड़ने पर ध्यान देना चाहिए. कृषि मंत्री ने कहा कि राज्यों को अलग-अलग FTA के प्रावधानों का अध्ययन करना चाहिए. इसके बाद उन फसलों और कृषि उत्पादों की पहचान करनी चाहिए, जिन्हें विदेशी बाजारों में बेहतर दाम मिल सकता है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि सिर्फ FTA से फायदा नहीं मिलेगा, बल्कि किसानों और उत्पादकों को एक्सपोर्ट क्वालिटी के मानकों को पूरा करना भी जरूरी होगा.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सम्मेलन में अल नीनो और कम बारिश के असर पर भी चर्चा हुई, जिन जिलों में बारिश कम हुई है, वहां के लिए आपातकालीन योजनाएं तैयार की गई हैं. इनमें कम पानी में तैयार होने वाली और कम अवधि वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना शामिल है. उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए केंद्र सरकार ने बीज बैंक भी बनाया है. केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर अल नीनो से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करेंगी. कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि मॉनसून की वापसी से पहले पर्याप्त बारिश होगी.
कृषि मंत्री ने बताया कि 28 और 29 सितंबर को दिल्ली में रबी फसलों को लेकर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इसमें अलग-अलग राज्यों के कृषि मंत्री शामिल होंगे और रबी सीजन में अलग-अलग फसलों के तहत क्षेत्र बढ़ाने को लेकर अपनी योजनाएं रखेंगे. उन्होंने कहा कि आने वाले रबी सीजन के लिए अभी से तैयारी करना जरूरी है, ताकि किसानों को समय पर बीज और दूसरी जरूरी सुविधाएं मिल सकें.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर किसान के पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) होना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि शुरुआत में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थी किसानों को KCC उपलब्ध कराने पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है. इससे किसानों को कम ब्याज दर पर कृषि लोन मिलने में मदद मिलेगी. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर देते हुए कहा कि किसानों की जमीन और उनकी खेती राज्यों से जुड़ी है, इसलिए कृषि के विकास के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा.
उन्होंने राज्यों से उनकी स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग कृषि रोडमैप तैयार करने को कहा. इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य कृषि संस्थान राज्यों की मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि इस रोडमैप का मकसद उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना, फसल बीमा का लाभ पहुंचाना, फसल विविधीकरण बढ़ाना और मिट्टी की सेहत सुधारना होना चाहिए.
कृषि मंत्री ने राज्यों से कहा कि वे किसानों की बीज जरूरत का पहले से आकलन करें, ताकि उन्हें समय पर अच्छी क्वालिटी के बीज मिल सकें. उन्होंने खराब क्वालिटी वाले बीज और कीटनाशकों से किसानों को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज और कीटनाशकों को लेकर नए कानून बनाने की जरूरत है, लेकिन जब तक नए कानून नहीं बनते, तब तक राज्यों को मौजूदा कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करना चाहिए.
शिवराज सिंह चौहान ने नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए नई योजना लागू करने की भी बात कही. उन्होंने राज्यों से सम्मेलन में तय किए गए कार्यों पर तेजी से अमल करने को कहा. उन्होंने बताया कि तेलंगाना और कर्नाटक में किसान ID बनाने का काम करीब 75 प्रतिशत तक पहुंच गया है. वहीं, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना ने जियो-रेफरेंसिंग के क्षेत्र में भी अच्छी प्रगति की है. उन्होंने केरल, तमिलनाडु और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से किसान ID बनाने की गति बढ़ाने की अपील की.
किसानों को मोबाइल फोन के जरिए कृषि संबंधी सलाह देने वाली 'भारत विस्तार' पहल का भी विस्तार किया जाएगा. शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह सेवा फिलहाल हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है. इसे आगे 13 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की योजना है. इनमें तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी भाषाएं भी शामिल होंगी. कृषि मंत्री ने कहा कि इन सभी प्रयासों का मकसद किसानों की आय बढ़ाना, देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा मजबूत करना, खेती में रोजगार के अवसर बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार बनाना है. (PTI)
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