क्रॉपलाइफ इंडिया ने फसलों के लिए नए समाधानों की बताई जरूरतअल नीनो और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों के चलते किसानों के सामने कीटों और फसल रोगों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. बदलते मौसम के साथ कीटों का प्रकोप और उनका फसलों पर असर भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. ऐसे में किसानों को नई और बेहतर फसल सुरक्षा तकनीकों तक पहुंच दिलाने की जरूरत है. फसल सुरक्षा क्षेत्र की 17 प्रमुख कंपनियों के संगठन क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार से नियामकीय व्यवस्था में सुधार कर नई तकनीकों के प्रवेश को बढ़ावा देने की मांग की है.
क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा कि भारत में किसानों के पास करीब 380 सक्रिय तत्व (एक्टिव इनग्रेडिएंट्स) उपलब्ध हैं, जबकि दुनियाभर में यह संख्या लगभग 1,200 है. संगठन का कहना है कि फसल सुरक्षा समाधानों के सीमित दायरे को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों के विकास और उनके भारत में रजिस्ट्रेशन को प्रोत्साहित करना जरूरी है.
क्रॉपलाइफ इंडिया ने नियामकीय ढांचे में पांच वर्ष के रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन (आरडीपी) की शुरुआत का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत नए उत्पादों के पंजीकरण के लिए कंपनियों द्वारा तैयार किए जाने वाले सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रभावकारिता संबंधी आंकड़ों को निर्धारित अवधि तक संरक्षण दिया जाएगा. संगठन के मुताबिक, इससे कंपनियों को भारतीय परिस्थितियों में अध्ययन और नई तकनीकों के विकास में निवेश करने का प्रोत्साहन मिलेगा. इससे किसानों के लिए फसल सुरक्षा समाधानों के विकल्प बढ़ सकते हैं.
संगठन के अनुसार, भारतीय किसानों को कीटों और बीमारियों के कारण हर साल फसल का करीब 10 से 35 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ता है. इस नुकसान का आर्थिक मूल्य लगभग दो लाख करोड़ रुपये सालाना आंका गया है. क्रॉपलाइफ इंडिया का कहना है कि नई और अधिक प्रभावी तकनीकों तक पहुंच से किसान बदलते कीट परिदृश्य से निपटने में सक्षम हो सकते हैं.
धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राहुल धानुका ने कहा कि अल नीनो और जलवायु परिवर्तन के कारण कीट दबाव अधिक गतिशील और चुनौतीपूर्ण हो रहा है. उन्होंने विज्ञान, नवाचार और तकनीक आधारित उत्पादों के प्रवेश के लिए मजबूत नियामकीय ढांचे की जरूरत बताई.
क्रॉपलाइफ इंडिया के उपाध्यक्ष और बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड के सीओओ मोहन बाबू बोप्पना ने कहा कि समयबद्ध आरडीपी व्यवस्था नई तकनीकों के प्रवेश और नवाचार को बढ़ावा दे सकती है. बीएएसएफ एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस, इंडिया के बिजनेस डायरेक्टर गिरिधर रनुवा ने भी किसानों के लिए बेहतर फसल सुरक्षा समाधानों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया.
क्रॉपलाइफ इंडिया ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फसल सुरक्षा उत्पादों की बिक्री के नियमन की मांग भी की है. संगठन ने लाइसेंसिंग संबंधी आवश्यकताओं और डिजिटल ट्रेसेबिलिटी लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि ऑनलाइन माध्यमों से अनधिकृत उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई जा सके.
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