यूपी में 14 से 16 जून तक लगेगा कृषि मेला, कम बारिश की आशंका के बीच दलहन खेती बढ़ाने पर सरकार का जोर

यूपी में 14 से 16 जून तक लगेगा कृषि मेला, कम बारिश की आशंका के बीच दलहन खेती बढ़ाने पर सरकार का जोर

उत्तर प्रदेश में 14 से 16 जून तक सभी जिलों में कृषि मेला एवं आरोग्य मेला आयोजित किया जाएगा. सरकार ने संभावित अल नीनो और कम बारिश की आशंका को देखते हुए किसानों को अरहर और अन्य दलहन फसलों की खेती बढ़ाने और खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण अपनाने की सलाह दी है.

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यूपी में 14 से 16 जून तक लगेगा कृषि मेला, कम बारिश की आशंका के बीच दलहन खेती बढ़ाने पर सरकार का जोरकृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने की समीक्षा बैठक की अध्‍यक्षता

उत्तर प्रदेश सरकार ने बदलते मौसम और खेती की चुनौतियों को देखते हुए जून महीने के लिए कृषि गतिविधियों की विस्तृत योजना तैयार की है. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विभागीय अधिकारियों के साथ शुक्रवार को समीक्षा बैठक कर किसानों तक योजनाओं को प्रभावी तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिए. बैठक में खेती को मौसम के अनुरूप बनाने, फसल विविधीकरण बढ़ाने और किसानों की आय मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया.

14 से 16 जून तक कृषि मेला एवं आरोग्य मेला

बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी जनपदों में 14 से 16 जून के बीच कृषि मेला एवं आरोग्य मेला आयोजित किया जाएगा. इन आयोजनों के माध्यम से किसानों को नई कृषि तकनीक, बेहतर उत्पादन प्रबंधन, कृषि योजनाओं और टिकाऊ खेती की जानकारी दी जाएगी. इसके बाद 17 से 18 जून तक प्राकृतिक खेती विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित होगी, ताकि किसानों को रसायन मुक्त खेती की ओर प्रोत्साहित किया जा सके. साथ ही 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन कृषि फार्मों और विभागीय कार्यालयों में किया जाएगा.

अल नीनो-कम बारिश की आशंका को लेकर सलाह

बैठक में संभावित अल नीनो के असर और कम बारिश की स्थिति को गंभीरता से लिया गया. कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण करें और अरहर जैसी फसलों को अपनाएं. उन्‍होंने कहा कि इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को अतिरिक्त आय का विकल्प भी मिलेगा. सरकार खेती को मौसम के जोखिमों के अनुसार ढालने की रणनीति पर काम कर रही है.

दलहन और तिलहन फसलों की खेती पर फोकस

बैठक में बताया गया कि इस साल उड़द, मूंग, सोयाबीन और तिल जैसी दलहन और तिलहन फसलों के क्षेत्रफल में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. विभाग इसे खेती के बदलते पैटर्न और किसानों की बढ़ती रुचि का संकेत मान रहा है. सरकार चाहती है कि कम पानी वाली परिस्थितियों में अधिक किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रेरित किया जाए, जिससे उत्पादन और आय दोनों में संतुलन बना रहे.

सह-फसली खेती और कृषि योजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश

कृषि मंत्री ने गन्ना आधारित सह-फसली खेती को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए. इसके तहत गन्ने के साथ मूंगफली, उड़द, मूंग, लोबिया, सरसों और भिंडी जैसी फसलों के प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जा रहे हैं. साथ ही कृषि यंत्रों की बुकिंग दोबारा शुरू करने, बीज वितरण से जुड़े भुगतान और विभागीय कार्यों में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए.

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