AI की सटीक भविष्यवाणी से बदली खेतीखेती को आसान और बेहतर बनाने के लिए सरकार अब नई तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही है. एआई की मदद से किसानों को फसल, मौसम, कीटों और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी समय पर दी जा रही है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ऐसी कई परियोजनाएं शुरू की हैं, जिनसे किसानों को सही समय पर सही सलाह मिल सके और खेती में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.
सरकार का लक्ष्य है कि देश के किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए, ताकि वे कम खर्च में अच्छी पैदावार ले सकें. इसके लिए डिजिटल कृषि मिशन के तहत राज्यों को भी एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों के इस्तेमाल में मदद दी जा रही है.
सरकार ने राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) शुरू की है. इस प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी मदद से फसलों में लगने वाले कीटों की पहचान पहले ही की जा सकती है. इस तकनीक से किसान अपनी फसल में लगे कीट की तस्वीर लेकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इससे किसानों को समय रहते कीटों को रोकने में मदद मिलती है और फसल खराब होने का खतरा कम होता है.
वर्तमान में 10 हजार से ज्यादा कृषि विस्तार कार्यकर्ता इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह प्रणाली 73 फसलों और 436 तरह के कीटों की निगरानी करने में मदद करती है.
खेती में मौसम की भूमिका सबसे ज्यादा होती है. बारिश, गर्मी और ठंड का सीधा असर फसलों पर पड़ता है. इसे देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से AI आधारित मौसम और मानसून सलाह दी जा रही है.
इस तकनीक की मदद से किसानों को उनके इलाके के हिसाब से मौसम की जानकारी मिलती है. किसान यह तय कर सकते हैं कि कब बुवाई करनी है, कब सिंचाई करनी है और कब फसल की देखभाल करनी है. सरकार के अनुसार, अब तक इस पहल से करीब 5.28 करोड़ किसानों को फायदा मिल चुका है.
किसानों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने के लिए सरकार ने 'भारत विस्तार' नाम का एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है. यह किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराता है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए किसान फसल और पशुपालन से जुड़ी सलाह, मौसम की जानकारी, मंडी के भाव, कीट और बीमारी की पहचान, मिट्टी की सेहत से जुड़ी सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
अब तक इस प्लेटफॉर्म से 3 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं और 72 लाख से अधिक किसानों के सवालों का समाधान किया जा चुका है.
भारत विस्तार प्लेटफॉर्म किसानों की सुविधा के लिए कई माध्यमों से उपलब्ध है. किसान इसे वेबसाइट, मोबाइल ऐप, एआई चैटबॉट और टेलीफोन सेवा के जरिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
फिलहाल इसकी टेलीफोन सेवा हिंदी और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है, जबकि मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और चैटबॉट को 10 भाषाओं में तैयार किया गया है. इससे अलग-अलग राज्यों के किसान आसानी से इसका उपयोग कर सकते हैं.
सरकार पिछले कुछ वर्षों से डिजिटल कृषि और एआई आधारित योजनाओं पर लगातार खर्च बढ़ा रही है. साल 2022-23 में डिजिटल कृषि पहलों के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, जो 2026-27 में बढ़ाकर 502.40 करोड़ रुपये कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि एआई आधारित तकनीकों की मदद से छोटे और सीमांत किसानों तक भी आधुनिक कृषि सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं. राज्यों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण के लिए भी आर्थिक मदद दी जा रही है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एआई खेती को और आसान बना सकता है. इससे किसानों को बीमारी, मौसम और बाजार से जुड़ी सही जानकारी समय पर मिलेगी. इससे फसल उत्पादन बढ़ाने और खेती में होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी.
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