10.18 करोड़ से ज्यादा किसानों की डिजिटल किसान ID बनी, इन सरकारी योजनाओं में आ रही है काम

10.18 करोड़ से ज्यादा किसानों की डिजिटल किसान ID बनी, इन सरकारी योजनाओं में आ रही है काम

केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 2026 तक देशभर में 10.18 करोड़ से अधिक किसानों की डिजिटल किसान आईडी तैयार कर ली है. राज्यसभा में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि इससे पीएम-किसान, फसल बीमा, एमएसपी खरीद, कृषि लोन, इनपुट वितरण और आपदा राहत जैसी योजनाओं में DBT और सेवाओं का बेहतर एकीकरण होगा. उत्तर प्रदेश किसान आईडी बनाने में सबसे आगे है.

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10.18 करोड़ से ज्यादा किसानों की डिजिटल किसान ID बनी, इन सरकारी योजनाओं में आ रही है काम10 करोड़ से ज्‍यादा किसान आईडी बनकर तैयार

केंद्र सरकार ने देशभर में किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. 20 जुलाई 2026 तक 10.18 करोड़ से ज्‍यादा किसानों की किसान आईडी बनाई जा चुकी है, जिसका इस्‍तेमाल अब विभिन्न कृषि योजनाओं और सेवाओं को इंटीग्रेट करने में किया जा रहा है. यह जानकारी कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में दी. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि किसान आईडी का उद्देश्य किसानों को अलग-अलग सरकारी सेवाओं और योजनाओं से एक ही डिजिटल पहचान के माध्यम से जोड़ना है. 

इसके जरिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद, कृषि लोन, कृषि इनपुट वितरण और प्राकृतिक आपदा राहत जैसी योजनाओं में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को ज्‍यादा असरदार बनाया जा रहा है.

यूपी सबसे आगे, महाराष्ट्र और MP भी शीर्ष राज्यों में

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, किसान आईडी बनाने में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां 2.43 करोड़ से अधिक किसान आईडी तैयार की जा चुकी हैं. इसके बाद महाराष्ट्र में 1.35 करोड़, मध्य प्रदेश में 1.13 करोड़ और राजस्थान में 87.23 लाख किसान आईडी बनाई गई हैं. बिहार में 55.31 लाख, कर्नाटक में 64.43 लाख और गुजरात में 62.25 लाख किसान इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़ चुके हैं.

राज्य कितनी किसान आईडी तैयार?
उत्तर प्रदेश 2,43,52,649
महाराष्ट्र 1,35,05,033
मध्य प्रदेश 1,13,53,326
राजस्थान 87,23,010
कर्नाटक 64,43,972
गुजरात 62,25,462
बिहार 55,31,133
आंध्र प्रदेश 50,42,388
तेलंगाना 50,02,227
तमिलनाडु 36,48,841
छत्तीसगढ़ 35,13,508
केरल 25,57,460
ओडिशा 20,20,174
असम 13,35,174
हरियाणा 12,05,181
हिमाचल प्रदेश 5,95,485
पंजाब 3,52,049
उत्तराखंड 3,23,259
त्रिपुरा 81,433
सिक्किम 28,885
कुल 10,18,40,649

सैटेलाइट तकनीक से फसल बीमा होगा ज्‍यादा सटीक

सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में उपग्रह चित्रों और रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. तकनीक आधारित उपज अनुमान प्रणाली (YES-TECH) के माध्यम से बीमा इकाई स्तर पर फसल उत्पादन का अधिक सटीक आकलन किया जा रहा है. इससे फसल कटाई प्रयोगों के आंकड़ों को बेहतर समर्थन मिलेगा और उत्पादन संबंधी अंतर का ज्‍यादा भरोसेमंद आकलन किया जा सकेगा.

फसल नुकसान और विवादों का जल्दी होगा निपटारा

सैटेलाइट आधारित निगरानी से बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों की तेजी से पहचान की जा रही है. सरकार का कहना है कि इससे बीमा कंपनियों और राज्य सरकारों के बीच क्षेत्रफल और उपज से जुड़े विवादों के समाधान में तेजी आएगी. साथ ही किसानों के दावों के निपटान में होने वाली देरी भी कम करने में मदद मिलेगी.

ड्रोन खरीद पर 50% तक मदद

केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) के तहत कृषि स्नातकों और पूर्वोत्तर राज्यों के छोटे औ सीमांत किसानों को किसान ड्रोन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक वित्तीय मदद दी जा रही है. अन्य किसानों के लिए ड्रोन खरीद पर 40 प्रतिशत तक मदद उपलब्ध है. इसके अलावा किसान ड्रोन के कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने के लिए भी 40 प्रतिशत तक वित्तीय मदद का प्रावधान किया गया है. योजना के तहत अब तक 2,122 ड्रोन वितरित या मंजूर किए जा चुके हैं.

ड्रोन पायलट प्रशिक्षण पर भी जोर

वहीं, कृषि मंत्रालय के अधीन बुदनी, हिसार और बिश्वनाथ चारियाली स्थित कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थानों में ड्रोन पायलट प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है. ये संस्थान नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से मान्यता प्राप्त हैं और अब तक 155 ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित कर चुके हैं.

'नमो ड्रोन दीदी' योजना से महिला समूहों को बढ़ावा

सरकार ने बताया कि 'नमो ड्रोन दीदी' योजना के तहत चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को 15 दिन का व्यापक ड्रोन संचालन प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें ड्रोन पायलट लाइसेंस भी शामिल है. वर्तमान में देशभर में DGCA से मान्यता प्राप्त 274 रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठन इस प्रशिक्षण का संचालन कर रहे हैं. इस योजना के तहत अब तक 1,094 ड्रोन महिला स्व सहायता समूहों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं.

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