मजदूरों की कमी का समाधान बना पैडी ट्रांसप्लांटर, कम लागत में किसान कर रहे धान की रोपाई

मजदूरों की कमी का समाधान बना पैडी ट्रांसप्लांटर, कम लागत में किसान कर रहे धान की रोपाई

बलौदा बाजार के किसान अब मजदूरों की कमी से निपटने के लिए पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस आधुनिक तकनीक से धान की रोपाई कम समय और कम लागत में हो रही है. मशीन से एक समान दूरी पर पौधों की रोपाई होने से उत्पादन में 15-20% तक बढ़ोतरी की संभावना है.

Advertisement
मजदूरों की कमी का समाधान बना पैडी ट्रांसप्लांटर, कम लागत में किसान कर रहे धान की रोपाईपैडी ट्रांसप्लांटर मशीन

धान की खेती में रोपाई का काम हमेशा से ही सबसे ज्यादा मेहनत और समय लेने वाला माना जाता है. खेतों में मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी के कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अब छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के किसान इस समस्या का समाधान आधुनिक कृषि तकनीक से निकाल रहे हैं. किसान पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई करने के बजाय अब पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि खेती की लागत भी कम हो रही है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

पैडी ट्रांसप्लांटर से 2-3 घंटे में हो रही धान की रोपाई

बलौदा बाजार जिले के विकासखंड पलारी के ग्राम सकरी (स) के प्रगतिशील किसान लेखराम साहू और बहोरन साहू ने अपने खेत में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई शुरू की है. इस मशीन की मदद से किसान कम समय और कम खर्च में बेहतर तरीके से धान की खेती कर रहे हैं. खास बात यह है कि दोनों किसान इस मशीन को दूसरे किसानों के लिए भी कम किराए पर उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे आसपास के किसान भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं.

किसानों के अनुसार, पहले मजदूरों के माध्यम से एक एकड़ खेत में धान की रोपाई करने में 2 से 3 दिन का समय लग जाता था. इस दौरान मजदूरी पर करीब 6000 से 8000 रुपये प्रति एकड़ तक खर्च आता था. वहीं अब पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से यही काम सिर्फ 2 से 3 घंटे में पूरा हो जाता है और लागत घटकर लगभग 2000 रुपये प्रति एकड़ तक रह गई है.

एक दिन में 6 से 8 एकड़ तक रोपाई की क्षमता

पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे खेत में पौधों की रोपाई एक समान दूरी और सीधी लाइन में होती है. इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और उनकी वृद्धि बेहतर होती है. किसान बताते हैं कि इस मशीन की मदद से एक दिन में करीब 6 से 8 एकड़ तक धान की रोपाई की जा सकती है.

इस तकनीक से किसानों को मजदूरों की अनुपलब्धता की समस्या से भी राहत मिल रही है. खरीफ सीजन में जब एक साथ कई किसानों को रोपाई के लिए मजदूरों की जरूरत होती है, उस समय मजदूरों की कमी बड़ी चुनौती बन जाती है. पैडी ट्रांसप्लांटर इस समस्या को दूर करने में मददगार साबित हो रहा है.

सीधी कतार में रोपाई से बढ़ता है उत्पादन

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मशीन से धान की रोपाई करने पर पौधे से पौधे और कतार से कतार के बीच उचित दूरी बनी रहती है. कृषि विकास अधिकारी सुचिन वर्मा ने बताया कि 12 से 15 दिन पुराने पौधों की रोपाई पैडी ट्रांसप्लांटर से करने पर फसल का विकास बेहतर होता है.

उन्होंने बताया कि सही दूरी पर रोपाई होने से पौधों को पर्याप्त पोषण और हवा मिलती है, जिससे कीट और रोगों का खतरा भी कम होता है. इस तकनीक को अपनाने से धान के उत्पादन में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है.

सरकारी योजनाओं और तकनीक से खेती आसान

कृषि विभाग और सरकार की योजनाओं के सहयोग से किसान लगातार नई तकनीकों को अपनाकर खेती को आसान और लाभकारी बना रहे हैं. पैडी ट्रांसप्लांटर जैसी मशीनें न केवल खेती में आधुनिक बदलाव ला रही हैं, बल्कि किसानों की मेहनत, समय और लागत को भी कम कर रही हैं.

बलौदा बाजार जिले के किसानों का यह प्रयास दिखाता है कि आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल कर किसान कम खर्च में अधिक उत्पादन हासिल कर सकते हैं और खेती को अधिक लाभ का व्यवसाय बना सकते हैं.

ये भी पढ़ें:

किसानों के लिए बड़ी सौगात, AI बताएगा मौसम का हाल और बचाएगा फसल का नुकसान
10.18 करोड़ से ज्यादा किसानों की डिजिटल किसान ID बनी, इन सरकारी योजनाओं में आ रही है काम

POST A COMMENT