Climate Change के बीच खेती बचाने की बड़ी तैयारी, सरकार ने बनाया ये बड़ा प्लान

Climate Change के बीच खेती बचाने की बड़ी तैयारी, सरकार ने बनाया ये बड़ा प्लान

केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन' (NMSA) शुरू किया है, जिसका मकसद खेती को मौसम के बदलते हालात के अनुसार मजबूत बनाना है. सरकार अब ऐसी खेती पर जोर दे रही है, जिसमें कम पानी में ज्यादा उत्पादन हो, मिट्टी की क्वालिटी अच्छी बनी रहे और किसानों की कमाई भी बढ़े.

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Climate Change के बीच खेती बचाने की बड़ी तैयारी, सरकार ने बनाया ये बड़ा प्लानजलवायु परिवर्तन

भारत की खेती आज सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. कभी सूखा तो कभी बाढ़, कहीं लू तो कहीं बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ाई हैं. खासतौर पर वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के लिए हालात ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनते जा रहे हैं. देश में करीब 60 प्रतिशत खेती अब भी बारिश पर निर्भर है और यही क्षेत्र भारत के कुल खाद्य उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत योगदान देता है. ऐसे में सरकार अब खेती को जलवायु परिवर्तन के असर से बचाने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है.

इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन' (NMSA) शुरू किया है, जिसका मकसद खेती को मौसम के बदलते हालात के अनुसार मजबूत बनाना है. सरकार अब ऐसी खेती पर जोर दे रही है, जिसमें कम पानी में ज्यादा उत्पादन हो, मिट्टी की क्वालिटी अच्छी बनी रहे और किसानों की कमाई भी बढ़े.

'एकीकृत खेती मॉडल' पर सबसे ज्यादा फोकस

इस मिशन के तहत सबसे ज्यादा फोकस 'एकीकृत खेती मॉडल' पर किया जा रहा है. यानी किसान सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहें, बल्कि खेती के साथ बागवानी, पशुपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियां भी जोड़ें. इससे जोखिम कम होगा और सालभर आमदनी बनी रहेगी. सरकार ने 2025-26 में इस योजना के लिए 343 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट रखा है और करीब 96 हजार किसानों को प्रशिक्षण भी दिया गया है.

तेजी से बढ़ाया जा रहा 'प्रति बूंद अधिक फसल' योजना

पानी की कमी से निपटने के लिए 'प्रति बूंद अधिक फसल' योजना को तेजी से बढ़ाया जा रहा है. इसके तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कम पानी में ज्यादा सिंचाई हो सके. सरकार के अनुसार, 2015 से अब तक करीब 109 लाख हेक्टेयर जमीन को माइक्रो इरिगेशन के दायरे में लाया जा चुका है. इसके लिए 26 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी गई है. अब अगले पांच साल में 100 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन को सूक्ष्म सिंचाई से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.

सरकार मिट्टी स्वास्थ्य सुधार पर दे रही जोर

खेती की असली ताकत मिट्टी होती है, इसलिए सरकार मिट्टी स्वास्थ्य सुधार पर भी बड़ा जोर दे रही है. “मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना” के जरिए किसानों को उनकी जमीन की गुणवत्ता और जरूरत के हिसाब से खाद इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है. फरवरी 2026 तक 25 करोड़ से ज्यादा मिट्टी का स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं. नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे यूरिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल में कमी आई है और मिट्टी की सेहत बेहतर हुई है.

जलवायु-अनुकूल खेती पर काम कर रहा ICAR

वहीं, Indian Council of Agricultural Research यानी ICAR भी जलवायु-अनुकूल खेती पर लगातार काम कर रहा है. ICAR ने 2011 में NICRA कार्यक्रम शुरू किया था, जिसके तहत सूखा, बाढ़ और लू जैसी परिस्थितियों को सहने वाली फसलों की नई किस्में विकसित की जा रही हैं. पिछले 10 वर्षों में करीब 3 हजार जलवायु-प्रतिरोधी फसल किस्में विकसित की गई हैं. सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों का मानना है कि आने वाले समय में खेती को बचाने का रास्ता सिर्फ पारंपरिक तरीकों में नहीं, बल्कि आधुनिक और टिकाऊ कृषि मॉडल में छिपा है. यही वजह है कि अब खेती को 'जलवायु स्मार्ट' बनाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है, ताकि किसान बदलते मौसम के बावजूद बेहतर उत्पादन और स्थिर आय हासिल कर सकें. 

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