महाराष्ट्र कृषि भूमि खरीद में होंगे बदलावमहाराष्ट्र सरकार ने कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में केवल वास्तविक किसान ही कृषि भूमि खरीद सकेंगे. इसके लिए सरकार एक नई सत्यापन प्रणाली लागू करने जा रही है, जिससे किसान होने का वैध प्रमाण प्रस्तुत किए बिना किसी भी व्यक्ति को कृषि भूमि खरीदने की अनुमति नहीं मिलेगी. विधानसभा में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि भूमि अभिलेख आयुक्त के माध्यम से राज्यभर में सख्त सत्यापन तंत्र तैयार किया जा रहा है. यह व्यवस्था लैंड मैपिंग आधारित होगी, जिससे खरीदार की किसान पहचान और भूमि से जुड़े रिकॉर्ड का डिजिटल तरीके से मिलान किया जा सकेगा. राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैर-किसान या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कोई भी व्यक्ति कृषि भूमि अपने नाम न करा सके.
राज्य सरकार ने स्टाम्प शुल्क विभाग को भी भूमि अभिलेख आयुक्त के डेटाबेस से सीधे जोड़ दिया है. अब किसी भी कृषि भूमि के पंजीकरण से पहले यह जांच की जाएगी कि खरीदार वास्तव में किसान है या नहीं और उसके नाम पहले से कृषि भूमि दर्ज है या नहीं. अगर जांच के दौरान कोई संदिग्ध लेनदेन या गैर-किसान खरीदार सामने आता है तो भूमि पंजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोक दी जाएगी और विस्तृत जांच कराई जाएगी.
राजस्व मंत्री ने धुले जिले के वडजई, पिंपरी और नरवाहल गांवों से जुड़े कथित भूमि घोटाले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश भी दिए हैं. इस मामले की जांच संभागीय आयुक्त की निगरानी में अलग तंत्र करेगा, जबकि धुले के पुलिस अधीक्षक को फर्जी दस्तावेज और भूमि रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के आरोपों की जांच सौंपी गई है.
मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें खरीदारों के किसान होने का कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिला. अगर जांच में धोखाधड़ी, जालसाजी या सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे.
राज्य सरकार ने बताया कि धुले जिले की विवादित भूमि पहले मूल मालिकों द्वारा जयप्रकाश हाउसिंग सोसायटी के 44 सदस्यों को बेची गई थी. बाद में वर्ष 2010 में कथित मिलीभगत के जरिए मूल मालिकों के उत्तराधिकारियों के नाम फिर से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिए गए और जमीन दोबारा बेच दी गई.
अब भूमि अभिलेख अधीक्षक की समीक्षा के बाद वर्ष 2010 की म्यूटेशन एंट्रीज रद्द की जाएंगी और 44 मूल भूखंड धारकों के अधिकार बहाल किए जाएंगे. धारा 155 के कथित दुरुपयोग के आधार पर किए गए बदलाव भी निरस्त किए जाएंगे.
वहीं, सिंधुदुर्ग जिले के डोडामार्ग क्षेत्र, खासकर प्रस्तावित मोपा हवाई अड्डे के आसपास बाहरी लोगों द्वारा कृषि भूमि खरीदने के मुद्दे पर भी सरकार ने सतर्क रुख अपनाया है. राज्य सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे सभी सौदों की गहन जांच होगी और नियमों के अनुरूप पाए जाने पर ही जमीन का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. (पीटीआई)
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