सीमांचल में सिंचाई क्रांति की तैयारीबिहार सरकार कोसी के पानी से अब सीमांचल के खेतों की तस्वीर बदलने की तैयारी में जुट गई है. सरकार की महत्वाकांक्षी कोसी-मेची अंतरराज्यीय रिवर लिंक परियोजना इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है. इस परियोजना के पूरा होने पर अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार की कृषि भूमि को जबरदस्त फायदा होने वाला है. बिहार सरकार का मानना है कि इससे कुल 2,14,813 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलेगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को सुपौल के छातापुर प्रखंड के चैनपुर गांव पहुंचकर निर्माणाधीन परियोजना का जायजा लिया. अधिकारियों को तय समय-सीमा के भीतर क्वालिटी वाला काम करने का निर्देश दिया.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परियोजना को सीमांचल और बिहार के लिए ऐतिहासिक परियोजना बताया. उन्होंने कहा कि इसके पूरा होने से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, कृषि की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी. वहीं, इस परियोजना की अनुमानित लागत 6,282.32 करोड़ रुपये है और इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, परियोजना के तहत बाढ़ के दौरान कोसी नदी में आने वाला वो पानी जो बाढ़ का रूप ले लेता है, उस पानी को लिंक नहर के माध्यम से मेची नदी तक पहुंचाने की योजना है. योजना का सबसे बड़ा लाभ ये होगा कि इससे महानंदा बेसिन में जल की उपलब्धता बढ़ेगी. साथ ही कोसी नदी के बाढ़ का प्रभाव भी कम होगा. ये आपदा से उपलब्ध हुआ पानी अब संसाधन बनेगा.
कोसी-मेची रिवर लिंक परियोजना से सीमांचल के चार प्रमुख जिलों में सिंचाई का दायरा बढ़ेगा. परियोजना के पूरा होने के बाद अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार को फायदा मिलेगा. परियोजना के पूरा होने पर अररिया की 69,642 हेक्टेयर कृषि भूमि, पूर्णिया की 69,970 हेक्टेयर कृषि भूमि, किशनगंज की 39,548 हेक्टेयर कृषि भूमि और कटिहार की 35,653 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिल सकेगा.
परियोजना के तहत पूर्वी कोसी के मुख्य नहर की पानी ले जाने की क्षमता 15,000 क्यूसेक से बढ़ाकर 20,000 क्यूसेक की जाएगी. इसके अलावा मुख्य नहर के विस्तार के साथ चार शाखा नहरों, छह वितरणियों और आवश्यक नहर प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा. परियोजना के अंतिम छोर पर करीब 950 क्यूसेक पानी मेची नदी में प्रवाहित होगा. साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्माण दौरान किसानों को खेती-किसानी में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए, उन्होंने कहा कि काम में गति, क्वालिटी और समय के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए और परियोजना के हर चरण की लगातार निगरानी की जाए.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कोसी और गंडक नदियों के पानी को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए एक बड़ी योजना तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि डैम और दूसरी जल संरचनाएं बनाई जाएं, ताकि पानी को सही तरीके से रोका और इस्तेमाल किया जा सके. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे छोटी नदियों में भी पूरे साल पर्याप्त पानी उपलब्ध रहे. इससे सिंचाई के साथ-साथ किसानों और आम लोगों को भी फायदा मिलेगा.
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