पानी का संकट हुआ गंभीर (Representational)दुनिया में पानी की कमी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की State of Global Water Resources 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में दुनिया की कई नदियों में पानी का बहाव सामान्य से कम रहा. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जमीन पर जमा पानी की मात्रा कई सालों से लगातार घट रही है. ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और कई जगहों पर भूजल का स्तर भी नीचे जा रहा है. इसका असर आने वाले समय में भारत समेत एशिया के कई देशों पर पड़ सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया के करीब 36 फीसदी नदी क्षेत्रों में पानी का बहाव सामान्य से कम रहा. पिछले सात साल से सामान्य मात्रा में पानी बहने वाली नदियों की संख्या भी कम बनी हुई है. 1991 से 2020 के बीच दुनिया के करीब 46 फीसदी नदी क्षेत्रों में पानी का बहाव सामान्य रहता था. लेकिन 2021 से 2025 के बीच यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 34 से 38 फीसदी रह गया. इसका मतलब है कि दुनिया के कई हिस्सों में नदियों में पानी की स्थिति लगातार बदल रही है.
एशिया में मध्य एशिया और मध्य पूर्व के कई इलाकों में नदियों में सामान्य से कम पानी रहा. वहीं दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा पानी देखा गया. यानी कुछ जगहों पर पानी की कमी है, तो कुछ जगहों पर ज्यादा पानी बाढ़ की वजह बन रहा है.
भारत के लिए भूजल का लगातार कम होना सबसे बड़ी चिंता में से एक है. रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में 2025 में जमीन पर जमा पानी सामान्य से कम रहा. उत्तर-पश्चिम भारत में भूजल का स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है. भारत में किसान खेती के लिए बड़ी मात्रा में भूजल का इस्तेमाल करते हैं. ट्यूबवेल और बोरवेल से खेतों की सिंचाई की जाती है. शहरों में भी पीने के पानी के लिए कई जगह भूजल पर निर्भरता है. अगर भूजल इसी तरह कम होता रहा तो आने वाले समय में खेती के लिए पानी की कमी बढ़ सकती है. इससे किसानों की परेशानी बढ़ेगी और फसल उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.
WMO के मुताबिक, पिछले पांच साल में एशिया और अफ्रीका पानी से जुड़ी बड़ी आपदाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इन दोनों क्षेत्रों में पानी से जुड़ी आपदाओं में हुई 80 फीसदी से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं. 2025 में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में बहुत ज्यादा बारिश और चक्रवात आए. श्रीलंका, पाकिस्तान, वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में बाढ़ और दूसरी जल आपदाओं ने भारी नुकसान किया.
भारत के लिए भी यह चिंता की बात है. मौसम में बदलाव के कारण कभी बहुत कम बारिश होती है और कभी थोड़े समय में ही बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है. इससे शहरों में पानी भर जाता है, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन होता है और खेतों में खड़ी फसल खराब हो सकती है.
दुनिया के ग्लेशियर भी तेजी से पिघल रहे हैं. WMO की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया के ग्लेशियरों ने करीब 408 गीगाटन बर्फ खो दी. इतनी बड़ी मात्रा में बर्फ पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ने पर भी असर पड़ रहा है. लगातार चौथे साल दुनिया के सभी प्रमुख ग्लेशियर क्षेत्रों में बर्फ कम हुई है. यह भारत और दक्षिण एशिया के लिए भी बड़ी चिंता है, क्योंकि हिमालय के ग्लेशियर कई बड़ी नदियों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत हैं. गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों का पानी हिमालय में होने वाली बर्फबारी और ग्लेशियरों से भी जुड़ा है. ग्लेशियर तेजी से पिघलने से कुछ समय के लिए नदियों में ज्यादा पानी आ सकता है. इससे अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. लेकिन लंबे समय में ग्लेशियर छोटे होते गए तो सूखे मौसम में नदियों में पानी कम हो सकता है. इससे खेती और पीने के पानी की समस्या बढ़ सकती है.
WMO की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया का पानी का चक्र तेजी से बदल रहा है. इसका मतलब है कि अब मौसम और पानी की स्थिति पहले की तरह स्थिर नहीं है. कहीं बहुत ज्यादा बारिश हो रही है तो कहीं लंबे समय तक बारिश नहीं हो रही. कई देशों में बाढ़ के बाद जल्द ही सूखे जैसी स्थिति बन रही है. इससे लोगों को एक समस्या से निकलने का समय भी नहीं मिल पाता और दूसरी समस्या सामने आ जाती है. इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता है. ज्यादा बारिश होने पर फसल खेत में ही खराब हो सकती है. वहीं बारिश कम होने पर खेतों में पानी की कमी हो जाती है और फसल की पैदावार घट सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बदलती जल स्थिति से निपटने के लिए अभी से तैयारी करना जरूरी है. केवल नए बांध बनाना या ज्यादा भूजल निकालना इसका पूरा समाधान नहीं है. बारिश के पानी को जमा करना, तालाबों और पुराने जल स्रोतों को बचाना और जमीन के अंदर पानी पहुंचाना जरूरी होगा. किसानों को भी पानी की कम खपत वाली सिंचाई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा.
इसके साथ ही बाढ़ और भारी बारिश की पहले से जानकारी देने वाली व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है. अगर लोगों को समय पर मौसम और बाढ़ की जानकारी मिल जाए तो जान-माल और फसल के नुकसान को कम किया जा सकता है.
WMO की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि पानी का संकट सिर्फ आने वाले समय की समस्या नहीं है. इसका असर अभी से दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है. भारत के सामने सिर्फ पानी की कमी की समस्या नहीं है. बड़ी चुनौती यह भी है कि एक तरफ कुछ इलाकों में सूखा पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश और बाढ़ आ रही है.
भूजल का गिरता स्तर, ग्लेशियरों का पिघलना, बदलता मॉनसून और अचानक होने वाली भारी बारिश भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं. इसलिए पानी को बचाने, भूजल बढ़ाने और बारिश के पानी का सही इस्तेमाल करने पर अभी से ज्यादा ध्यान देना जरूरी है.
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