नाना पाटेकर ने साल 2015 में की थी नाम फाउंडेशन की शुरुआत. (Photo: NAAM/GettyImage)दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का आज सुबह कार्डियक अरेस्ट से 75 साल की उम्र में निधन हो गया. फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर सामाजिक सरोकारों के लिए भी जाने जाते थे. किसानों की मदद और ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण से जुड़े उनके काम का एक बड़ा हिस्सा NGO ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए सामने आया. नाना पाटेकर ने सितंबर 2015 में अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर इस फाउंडेशन की शुरुआत की थी. महाराष्ट्र में गंभीर सूखे, पानी की कमी और किसान परिवारों की मुश्किलों के बीच शुरू हुई यह पहल आगे चलकर जल संरक्षण, किसान विकास और ग्रामीण पुनर्वास के कई कामों से जुड़ गई.
‘नाम फाउंडेशन’ की शुरुआत सितंबर 2015 में नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे ने की थी. संस्था की शुरुआत महाराष्ट्र में गंभीर सूखे, पानी की कमी और किसान संकट के बीच हुई थी. शुरुआत में किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को सहायता देना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल था. समय के साथ संस्था ने तत्काल आर्थिक मदद से आगे बढ़कर परिवारों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर भी काम किया.
‘नाम फाउंडेशन’ के काम का सबसे बड़ा हिस्सा जल संरक्षण से जुड़ा रहा. संस्था का जोर सूखे के तत्काल प्रभावों से निपटने के साथ-साथ पानी की समस्या के लंबे समय के समाधान तैयार करने पर रहा. इसके तहत नदियों, धाराओं और नालों को गहरा और चौड़ा करने से लेकर झीलों और परकोलेशन टैंकों से गाद निकालने तक के काम किए गए. संस्था ने नदियों और पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन, नहरों के निर्माण और मरम्मत, खेत तालाबों के निर्माण, भूजल रिचार्ज और बोरवेल के पुनर्जीवन पर भी काम किया. इसके अलावा बांधों से गाद निकालने, कंटूर ट्रेंचिंग और डीप CCT जैसे काम भी किए गए.
‘नाम फाउंडेशन’ की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से 2025 के बीच उसके जल संरक्षण कार्यों में 2,246 जलस्रोतों और 178 नदियों का पुनर्जीवन शामिल रहा. इस दौरान 515 धाराओं और नालों को गहरा और चौड़ा किया गया, जबकि 769 परकोलेशन टैंकों का पुनर्जीवन और 26 बांधों से गाद निकालने का काम किया गया.
फाउंडेशन के मुताबिक, इन जल संरक्षण परियोजनाओं से करीब 40,847 करोड़ लीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता तैयार हुई और 77 लाख से अधिक किसानों को इसका फायदा मिला. फाउंडेशन के होमपेज पर वर्तमान में 198 नदियों के पुनर्जीवन का उल्लेख है, जो 2,187 गांवों से होकर गुजरती हैं.
किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की सहायता ‘नाम फाउंडेशन’ के शुरुआती उद्देश्यों में शामिल थी. संस्था ने ऐसे परिवारों को आर्थिक और नैतिक सहयोग दिया, जिसमें विधवाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान दिया गया. समय के साथ संस्था का काम केवल तत्काल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं रहा. प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया गया.
किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए भी ‘नाम फाउंडेशन’ ने काम किया. इसके तहत स्कूलों और संस्थागत साझेदारियों के जरिए शिक्षा से जुड़ी पहल की गई. जरूरतमंद बच्चों को साइकिल बांटने का काम भी संस्था के कार्यक्रमों में शामिल रहा. फाउंडेशन के मुताबिक, उसने प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई और दो स्कूलों का निर्माण भी किया.
‘नाम फाउंडेशन’ ने खेती से जुड़े तरीकों में सुधार और किसानों को जागरूक करने की दिशा में भी काम किया. इसका उद्देश्य ग्रामीण संकट के मूल कारणों को संबोधित करना रहा. इसमें पानी की कमी, पानी के असंतुलित इस्तेमाल और अधिक पानी वाली फसलों पर निर्भरता जैसे मुद्दों पर काम शामिल रहा.
फाउंडेशन के काम का दायरा केवल खेती और पानी तक सीमित नहीं रहा. गांवों में पीने के पानी की शुद्धता, आवास, स्वच्छता, पेड़ लगाने और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े काम भी किए गए. इस तरह ‘नाम फाउंडेशन’ ने ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण के साथ-साथ परिवारों और गांवों के विकास से जुड़े कई क्षेत्रों में काम किया. ‘नाम फाउंडेशन’ ने प्राकृतिक आपदाओं और संकट के समय भी राहत कार्य किए. संस्था के काम में बाढ़ और सूखे के दौरान राहत के अलावा कोरोना महामारी के समय किए गए राहत कार्य भी शामिल रहे.
फाउंडेशन की मौजूदा परियोजनाओं में सामूहिक विवाह, विधवा कल्याण और स्वास्थ्य से जुड़ी पहल भी शामिल हैं. इसके अलावा संस्था ने कुछ पायलट प्रोजेक्ट और सेना कल्याण से जुड़े काम भी किए हैं. नाना पाटेकर की पहचान भले ही सिनेमा के एक दिग्गज अभिनेता के तौर पर रही, लेकिन ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए किसानों, किसान परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा उनका सामाजिक काम भी उनकी सार्वजनिक जिंदगी का अहम हिस्सा रहा.
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