जालना में पानी पर पहरामहाराष्ट्र के जालना जिले में सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है. ऐसे में अब उपलब्ध जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को पुलिस का पहरा लगाना पड़ रहा है. भोकरदन तालुका स्थित धामणा बांध के पानी पर इन दिनों पुलिस की निगरानी है. बांध परिसर में दिन और रात पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गश्त कर रही है.
धामणा बांध में फिलहाल महज 2 फीसदी जलसाठा (पानी का स्टॉक) बचा हुआ है. इस बांध के पानी पर आसपास के कई गांव निर्भर हैं. इस साल भोकरदन तालुका और आसपास के इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण बांध में पानी की आवक बेहद कम रही. इसके चलते उपलब्ध जलसाठा तेजी से घट गया है.
धामणा बांध में बचे पानी को पीने के लिए रिजर्व रखा गया है. ऐसे में इस पानी का अवैध तरीके से उपसा यानी पानी निकालने की कोशिश न हो, इसे लेकर प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती है.
बांध से पानी की चोरी और अनधिकृत उपसा रोकने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को तैनात किया गया है. यह टीम बांध परिसर में दिन के साथ-साथ रात में भी पेट्रोलिंग कर रही है.
बांध में रिजर्व पानी का इस्तेमाल केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए हो, इस पर प्रशासन की लगातार नजर है. किसी भी तरह से पानी का अवैध इस्तेमाल या चोरी पाए जाने पर कारवाई की चेतावनी भी दी गई है.
मराठवाड़ा में सूखे का संकट लगातार गहराता जा रहा है. कई जलस्रोतों में पानी का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. ऐसे में जो पानी उपलब्ध है, उसे पीने के लिए सुरक्षित रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गया है. इसी वजह से अब धामणा बांध के जलसाठे की सुरक्षा के लिए पुलिस का पहरा लगाया गया है.
अवैध पानी की निकासी और पानी की चोरी रोकने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग का संयुक्त पथक धामणा बांध परिसर में तैनात किया गया है. यह पथक दिन के साथ-साथ रात में भी बांध परिसर में गश्त कर रहा है.
बांध के आसपास होने वाली गतिविधियों पर प्रशासन की लगातार नजर है. बांध में अब बेहद कम पानी बचे रहने के कारण इस जलसाठे का इस्तेमाल केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए हो, यह सुनिश्चित करने की कोशिश प्रशासन की ओर से की जा रही है.
उपलब्ध पानी का अवैध उपसा पाए जाने पर कारवाई की चेतावनी भी दी गई है.
मराठवाड़ा में सूखे का संकट लगातार गहराता जा रहा है. ऐसे में धामणा बांध में बचा हुआ पानी आने वाले दिनों में आसपास के गांवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसी वजह से इस जलसाठे की सुरक्षा के लिए अब पुलिस और राजस्व विभाग की टीम दिन-रात पहरा देती नजर आ रही है.
दूसरी ओर, अंबड तहसील के बारसवाड़ा स्थित गल्हाटी मध्यम प्रकल्प में पानी पूरी तरह खत्म हो गया है. सूखे के कारण इस जलाशय की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है और इसकी भयावह तस्वीरें ड्रोन कैमरे में कैद हुई हैं.
पिछले करीब डेढ़ से दो महीने से जालना जिले में बारिश ने पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है. बारिश नहीं होने के कारण जिले की नदियां, नाले, छोटी जलधाराएं, कुएं और जलाशयों में पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है. इसका सीधा असर खेती और ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता पर भी दिखाई दे रहा है.
अंबड तहसील के बारसवाड़ा स्थित गल्हाटी मध्यम प्रकल्प की बात करें, तो यहां फिलहाल पानी की एक बूंद भी नजर नहीं आ रही है. कभी पानी से भरा रहने वाला यह जलाशय अब पूरी तरह सूख चुका है. जलाशय के तल में जगह-जगह सूखी जमीन और दरारें दिखाई दे रही हैं.
गल्हाटी मध्यम प्रकल्प पर आसपास के 15 से 20 गांवों की पानी की जरूरतें निर्भर हैं. ऐसे में प्रकल्प के पूरी तरह सूख जाने से आने वाले दिनों में ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या और गंभीर होने की चिंता बढ़ गई है. ड्रोन कैमरे से सामने आई इन तस्वीरों में जलाशय की सूखी और वीरान स्थिति साफ दिखाई दे रही है. इन दृश्यों से जालना जिले में सूखे की तीव्रता और इसकी भयावह स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
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