एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव (फोटो- एएनआई)भारत के कृषि निर्यात को नई रफ्तार देने के लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) अब तीन बड़े स्तंभों पर फोकस कर रहा है. इनमें मुक्त व्यापार समझौते (FTA), एग्री-स्टार्टअप और किसान उत्पादक संगठन (FPO) शामिल हैं. APEDA का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में यही मॉडल भारत के कृषि निर्यात को नए बाजार और नई ऊंचाई दे सकता है. APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने कहा कि हाल में हुए ब्रिटेन और यूरोपीय बाजारों से जुड़े व्यापार समझौते भारतीय कृषि निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर लेकर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन समझौतों के बाद भारतीय उत्पादों को उन बाजारों में प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर मौका मिल सकता है. खासकर प्रोसेस्ड फूड सेगमेंट में टैरिफ में राहत मिलने का असर ज्यादा दिखाई देने की उम्मीद है.
सिर्फ समझौते करने तक सीमित रहने के बजाय APEDA अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि निर्यातक इनका वास्तविक लाभ भी उठा सकें. इसके लिए क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए एक्सपोर्टर्स को ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ समेत जरूरी व्यापारिक नियमों की जानकारी दी जा रही है. उद्देश्य यह है कि भारतीय कंपनियां किसी तकनीकी कारण से समझौतों के लाभ से वंचित न रहें.
कृषि निर्यात में नवाचार बढ़ाने के लिए APEDA स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भी दांव लगा रहा है. संस्था के ‘भारती’ कार्यक्रम के पहले चरण में 100 से ज्यादा एग्री-स्टार्टअप को सहयोग दिया गया. इनमें से चुने गए आठ स्टार्टअप को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति का मौका मिलेगा. इससे तकनीक आधारित कृषि कारोबार और वैश्विक खरीदारों के बीच संपर्क मजबूत करने की कोशिश होगी.
APEDA अब किसानों की सीधी भागीदारी बढ़ाने पर भी काम कर रहा है. फिलहाल करीब 1,400 FPO इससे जुड़े हैं और इस संख्या को चालू वर्ष में लगभग 3,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही अगले दो से तीन महीनों में FPO के लिए अलग निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है, ताकि छोटे किसानों की उपज भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सके.
कृषि निर्यात को कुछ राज्यों तक सीमित रखने के बजाय APEDA अब नए क्षेत्रों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है. पूर्वोत्तर और भू-आवेष्ठित राज्यों से निर्यात योग्य उत्पादों की पहचान की जा रही है. हाल में झारखंड से लीची और आम्रपाली आम का निर्यात इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है.
अभी भारत के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में कृषि निर्यात की हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी है. APEDA को उम्मीद है कि व्यापार समझौतों, तकनीकी नवाचार और किसानों की बढ़ती भागीदारी के सहारे आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और मजबूत हो सकता है. (ANI)
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