किसानों की डिजिटल पहचान बनाने में तेजीदेश में कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है. एग्रीस्टैक और डिजिटल कृषि मिशन के तहत अब तक 10.31 करोड़ से अधिक किसानों को डिजिटल पहचान यानी किसान आईडी जारी की जा चुकी है. इससे किसानों की जमीन, फसल और कृषि गतिविधियों से जुड़ी जानकारी यूनिफाइ़ड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल सकेगा.
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि एग्रीस्टैक एक किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है, जिसे किसानों को आसान, तेज और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने के मकसद से विकसित किया गया है.
सरकार के अनुसार एग्रीस्टैक के तहत प्रत्येक किसान की एक व्यापक डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा रही है. इसमें किसान का व्यक्तिगत विवरण, भूमि रिकॉर्ड, बोई गई फसलों की जानकारी, पशुधन और मत्स्य पालन जैसी कृषि संपत्तियों का विवरण शामिल रहेगा.
इस सिस्टम के तीन प्रमुख आधार हैं
इन सभी रिकॉर्ड का रखरखाव राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाएगा.
सरकार ने स्पष्ट किया कि किसान आईडी किसानों की जानकारी को उनके डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जोड़कर बनाई जा रही है. इससे किसान की पहचान और भूमि स्वामित्व का डिजिटल वेरिफिकेशन आसान होगा.
3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी तैयार की जा चुकी हैं. वहीं, मणिपुर ने भी डिजिटल फसल सर्वेक्षण और किसान आईडी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
कृषि मंत्रालय के अनुसार किसान रजिस्ट्री को अलग-अलग किसान-केंद्रित योजनाओं और डिजिटल प्लेटफार्मों के साथ जोड़ा जा रहा है. इसका उद्देश्य:
सरकार का मानना है कि यूनिफाइड किसान डेटाबेस से कृषि सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी.
डिजिटल कृषि मिशन के तहत रबी 2025-26 सीजन में देश के 648 जिलों में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) कराया गया. इस सर्वेक्षण में 31.3 करोड़ से अधिक प्लॉटों को कवर किया गया.
इस पहल से फसलों की वास्तविक स्थिति, बोआई क्षेत्र और उत्पादन अनुमान संबंधी जानकारी बेहतर तरीके से उपलब्ध हो सकेगी.
किसानों के डेटा की सुरक्षा को लेकर सरकार ने कहा कि एग्रीस्टैक को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के अनुरूप विकसित किया गया है.
सरकार के अनुसार राज्य किसान रजिस्ट्री का स्वामित्व संबंधित राज्यों के पास रहेगा, जबकि केंद्र जरूरी तकनीकी ढांचा उपलब्ध करा रहा है.
सरकार ने बताया कि फसल बीमा योजना की YES-TECH पहल के तहत धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए तकनीक आधारित उपज आकलन किया जा रहा है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग किया जा रहा है.
इसके अलावा, डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सिस्टम (DGCES) विकसित किया गया है, जो फसल उत्पादन के अधिक सटीक और समयबद्ध अनुमान उपलब्ध कराने में मदद करेगा.
केंद्र सरकार का मानना है कि एग्रीस्टैक और किसान रजिस्ट्री भविष्य में भारतीय कृषि के लिए डिजिटल रीढ़ साबित होंगे, जिससे किसानों तक सेवाओं की पहुंच आसान होगी और कृषि प्रशासन की दक्षता में बड़ा सुधार आएगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today