El Nino के बीच ऑस्‍ट्रेलिया में गेहूं उत्‍पादन अनुमान में सुधार, ग्‍लोबल सप्‍लाई और कीमतों पर क्‍या रहेगा असर?

El Nino के बीच ऑस्‍ट्रेलिया में गेहूं उत्‍पादन अनुमान में सुधार, ग्‍लोबल सप्‍लाई और कीमतों पर क्‍या रहेगा असर?

ऑस्‍ट्रेलिया में समय पर हुई बारिश और उर्वरक-ईंधन की आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने से 2026 की गेहूं फसल का अनुमान बढ़ा है. राबोबैंक ने उत्पादन का अनुमान 2.13 करोड़ टन से बढ़ाकर 3 करोड़ टन तक कर दिया है. वैश्विक गेहूं सप्लाई पर दबाव के बीच ऑस्‍ट्रेलिया इंडोनेशिया, फिलीपींस और अन्य आयातक देशों के लिए अहम सप्लायर बन सकता है.

Advertisement
ऑस्‍ट्रेलिया में गेहूं उत्‍पादन अनुमान में सुधार, ग्‍लोबल सप्‍लाई और कीमतों पर क्‍या रहेगा असर?ऑस्‍ट्रेलिया के गेहूं उत्‍पादन में सुधार का अनुमान (AI Image)

ऑस्‍ट्रेलिया में 2026 की गेहूं फसल को लेकर तस्वीर पहले के मुकाबले बेहतर होती दिख रही है. न्यू साउथ वेल्स, क्वींसलैंड और विक्टोरिया जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में समय पर हुई बारिश से फसल की स्थिति मजबूत हुई है. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण खाद और ईंधन की कमी को लेकर बनी आशंकाएं भी कम हुई हैं. इन कारणों से कई कृषि विश्लेषकों ने गेहूं उत्पादन के अपने अनुमान बढ़ा दिए हैं. ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में राबोबैंक ने अनुमान लगाया था कि ऑस्‍ट्रेलिया का गेहूं उत्पादन घटकर 2.13 करोड़ टन तक रह सकता है, जो पिछले साल की तुलना में 40 फीसदी से ज्‍यादा गिरावट होती. 

अब बैंक का अनुमान है कि उत्पादन 3 करोड़ टन तक पहुंच सकता है. हालांकि, यह पिछले साल के 3.58 करोड़ टन से कम रहेगा, लेकिन ऑस्‍ट्रेलिया के पिछले 10 वर्षों के औसत उत्पादन से ऊपर होगा. वहीं, बेंडिगो बैंक एग्रीबिजनेस ने भी करीब 3 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे 3.3 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना जताई है.

वैश्विक गेहूं बाजार के लिए अहम है ऑस्‍ट्रेलिया

ऑस्‍ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े गेहूं निर्यातकों में शामिल है और दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया के देशों को बड़ी मात्रा में गेहूं भेजता है. ऐसे समय में उत्पादन अनुमान बढ़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वैश्विक गेहूं सप्लाई पर दबाव बना हुआ है. काला सागर (Black Sea) क्षेत्र में शिपिंग बाधित होने और उत्तरी गोलार्ध में हीटवेव के कारण गेहूं की उपलब्धता प्रभावित हुई है. इसी वजह से जुलाई में शिकागो गेहूं वायदा भाव दो साल के उच्च स्तर तक पहुंच गए थे.

आयातक देशों को मिल सकता है विकल्प

अगर अन्य प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों से निर्यात सीमित रहता है तो ऑस्‍ट्रेलिया- इंडोनेशिया, फिलीपींस और संभवत: चीन जैसे बड़े आयातक देशों की जरूरत पूरी करने में अहम भूमिका निभा सकता है. उत्तरी-पूर्वी विक्टोरिया की किसान जूलिया हॉसलर ने कहा कि साल की शुरुआत में उन्हें इतनी अच्छी फसल की उम्मीद नहीं थी. उस समय अल नीनो के कारण ज्‍यादा गर्मी और सूखे की आशंका थी. साथ ही ईरान में जारी संघर्ष के कारण ईंधन और खाद की सप्‍लाई प्रभावित होने की चिंता भी थी. 

उन्होंने कहा कि साल के पहले छह महीनों में हुई लगातार अच्छी बारिश से उनके परिवार के खेतों में फसल की स्थिति मजबूत हुई है. साथ ही युद्ध का खेती में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों पर असर भी पहले की आशंका से कम रहा है. ऑस्‍ट्रेलिया में अप्रैल के उच्च स्तर के मुकाबले डीजल की कीमतें करीब एक-चौथाई घट चुकी हैं और वैश्विक स्तर पर उर्वरक की कीमतों में भी नरमी आई है. जूलिया ने कहा कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दुनिया में गेहूं की सप्लाई घटने के बावजूद कीमतों में वैसी तेजी नहीं दिख रही है, जैसी किसानों को उम्मीद थी.

बेहतर फसल से कीमतों पर दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, बेंडिगो बैंक के कृषि विश्लेषक रॉड बेकर ने कहा कि ऑस्‍ट्रेलिया में बेहतर फसल की संभावना और पिछले साल का बचा हुआ बड़ा स्टॉक अमेरिकी गेहूं वायदा कीमतों पर दबाव बना रहा है. इसी कारण इस हफ्ते कीमतें करीब एक महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गईं. वहीं, रूस और यूक्रेन के बीच हाल में संघर्ष बढ़ने से दोनों देशों के बंदरगाह ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे कम से कम निकट भविष्य में गेहूं निर्यात प्रभावित हुआ है.

कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्‍ट्रेलिया के कृषि अर्थशास्त्री डेनिस वोजनेसेंस्की ने कहा कि काला सागर क्षेत्र से गेहूं निर्यात के लिए नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं, लेकिन अगर क्षतिग्रस्त बंदरगाहों के कारण लंबे समय तक देरी होती है तो खरीदार दूसरे देशों की ओर रुख करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर ब्‍लैक सी रीजन से निर्यात वास्तव में लंबे समय तक सीमित रहता है तो खरीदार दूसरे स्रोतों पर गंभीरता से नजर डालेंगे.

दूसरे देशों में भी मौसम का असर

अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ में भीषण गर्मी का असर गेहूं की फसल पर पड़ा है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं. फ्रांस में अत्यधिक गर्मी के कारण उत्पादन घटने का अनुमान है, जबकि कनाडा में गेहूं का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम रहा है.

हालांक‍ि, बेहतर शुरुआत के बावजूद ऑस्‍ट्रेलिया के किसानों के सामने सबसे बड़ा जोखिम अल नीनो को लेकर बना हुआ है. अनुमान है कि साल की दूसरी छमाही में इसका असर बढ़ सकता है, जिससे अधिक गर्मी और कम बारिश हो सकती है. यह गेहूं की फसल के महत्वपूर्ण विकास चरण के दौरान चुनौती पैदा कर सकता है. ऑस्‍ट्रेलिया में गेहूं की कटाई आमतौर पर अक्टूबर से शुरू होती है.

वहीं, क्वींसलैंड के किसान आर्थर गियरॉन ने कहा कि उन्होंने AI आधारित एक एप्लिकेशन की मदद से आगे बारिश की संभावना का आकलन किया, लेकिन नतीजे उत्साहजनक नहीं रहे. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अपनी कुछ गेहूं की फसल हटाकर गर्मियों में ज्वार की खेती करेंगे, क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें यह ज्‍यादा फायदेमंद ऑप्‍शन लगता है.

POST A COMMENT