मध्यप्रदेश का दुर्लभ ‘नूरजहां’ आम, स्वाद ऐसा कि पेड़ पर फल लगते ही शौकीन करा लेते हैं बुकिंग, एक फल की कीमत 2500 रुपए

मध्यप्रदेश का दुर्लभ ‘नूरजहां’ आम, स्वाद ऐसा कि पेड़ पर फल लगते ही शौकीन करा लेते हैं बुकिंग, एक फल की कीमत 2500 रुपए

मध्यप्रदेश का दुर्लभ ‘नूरजहां’ आम इन दिनों फिर चर्चा में है। अपने विशाल आकार, खास मिठास और अनोखी खुशबू के लिए मशहूर यह आम इतना खास है कि फल पेड़ पर लगते ही लोग इसकी एडवांस बुकिंग करा लेते हैं. सीमित उत्पादन वाले इस आम की कीमत बाजार में एक फल के लिए करीब 2500 रुपए तक पहुंच जाती है.

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‘नूरजहां’ आम: स्वाद ऐसा कि पेड़ पर फल लगते ही शौकीन करा लेते हैं बुकिंग, एक फल की कीमत 2500 रुपए

गर्मी का मौसम आते ही आमों की मिठास लोगों को अपनी ओर खींचने लगती है. देशभर में दशहरी, लंगड़ा, अल्फांसो और केसर जैसे आमों की खूब मांग रहती है, लेकिन मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल अलीराजपुर का एक खास आम इन सबमें अलग पहचान रखता है. यह है ‘नूरजहां’ आम, जिसे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे खास आमों में गिना जाता है. अपने विशाल आकार, शाही स्वाद और दुर्लभ पैदावार के कारण यह आम हर साल चर्चा में रहता है.

पेड़ पर फल लगते ही हो जाती है बुकिंग

कट्ठीवाड़ा के किसान शिवराज सिंह जाधव बताते हैं कि इस बार उनके बाग में नूरजहां के सिर्फ तीन पेड़ों पर करीब 80 फल लगे हैं.मौसम की मार के कारण उत्पादन कम रहा, लेकिन मांग में कोई कमी नहीं आई. आम के पेड़ पर फल लगते ही इसकी बुकिंग शुरू हो जाती है।

उन्होंने बताया कि इस बार एक नूरजहां आम की कीमत 1000 रुपये से लेकर 2500 रुपये प्रति फल तक रखी गई है. खास बात यह है कि मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात से भी लोग इसकी एडवांस बुकिंग कर चुके हैं.

4 किलो तक हो सकता है एक आम का वजन

नूरजहां आम का सबसे बड़ा आकर्षण इसका आकार है. यह आम सामान्य आमों से कई गुना बड़ा होता है. किसानों के मुताबिक इस बार एक फल का वजन 2 किलो से 4 किलो तक पहुंच सकता है. इसकी गुठली का वजन ही 150 से 200 ग्राम तक होता है.

शिवराज जाधव बताते हैं कि उनके बाग के पुराने पेड़ से वर्ष 1978 में 4.700 किलोग्राम वजन का नूरजहां आम पैदा हुआ था, जिसका रिकॉर्ड आज भी कायम है.यह पेड़ उनके पिता ठाकुर पवनेंद्र सिंह जाधव ने लगाया था.

स्वाद ऐसा, जो बना देता है खास

नूरजहां आम केवल आकार में ही बड़ा नहीं होता, बल्कि स्वाद के मामले में भी बेहद खास माना जाता है.इसका गूदा काफी रसीला, मुलायम और कम रेशेदार होता है. इसमें एक अलग तरह की शाही खुशबू होती है, जो इसे अन्य आमों से अलग पहचान देती है. आम प्रेमियों के बीच इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यही स्वाद और सुगंध है.

अलीराजपुर के काठीवाड़ा में होती है खास खेती

नूरजहां आम की खेती मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के काठीवाड़ा क्षेत्र में की जाती है, जो गुजरात सीमा से सटा हुआ इलाका है. इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र अपने खास मौसम और मिट्टी की वजह से इस दुर्लभ प्रजाति के लिए अनुकूल माना जाता है. स्थानीय किसानों का दावा है कि नूरजहां आम मूल रूप से अफगानिस्तान की प्रजाति है, जिसे दशकों पहले भारत लाया गया था.

अफगानिस्तान से मालवा तक का सफर

स्थानीय लोगों के अनुसार नूरजहां आम की उत्पत्ति अफगान क्षेत्र में हुई थी. बाद में यह भारत पहुंचा और 1950-60 के दशक में मालवा एवं झाबुआ-अलीराजपुर क्षेत्र में इसकी खेती शुरू हुई.कट्ठीवाड़ा के जूना क्षेत्र स्थित शिव बावड़ी आम फार्म के किसान भरतराज सिंह जाधव बताते हैं कि उनके पिता रणवीरसिंह जाधव करीब 55-60 वर्ष पहले गुजरात के बनमाह क्षेत्र से इसका पौधा लेकर आए थे.

उन्होंने इस पौधे को कट्ठीवाड़ा की मिट्टी में तैयार किया और धीरे-धीरे यह पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया. जाधव परिवार ने ग्राफ्टिंग यानी कलम तकनीक के जरिए इस दुर्लभ प्रजाति को संरक्षित रखा है. वर्तमान में उनके पास पुराने मुख्य पेड़ के अलावा 11 नए ग्राफ्टेड पौधे भी तैयार हो रहे हैं.

मौसम की मार से घटा उत्पादन

इस साल बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने नूरजहां आम की फसल को नुकसान पहुंचाया है.किसानों का कहना है कि पहले की तुलना में इस बार उत्पादन काफी कम हुआ है. बावजूद इसके बाजार में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।.पिछले वर्ष शिवराज जाधव के बाग में पैदा हुए सबसे भारी नूरजहां आम का वजन करीब 3.8 किलोग्राम था, जिसे 2000 रुपये में बेचा गया था.

जून में बाजार में आता है नूरजहां

नूरजहां आम के पेड़ों पर जनवरी-फरवरी में बौर आना शुरू हो जाता है. इसके बाद जून की शुरुआत तक फल पूरी तरह पककर तैयार हो जाते हैं.सीमित उत्पादन और अनोखी विशेषताओं के कारण यह आम आम लोगों की पहुंच से थोड़ा दूर जरूर है, लेकिन स्वाद और आकार की वजह से यह हर साल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है.

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