एक आरोपी अधिकारी को फ्रांस से लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू (Photo: ITG)एसी दफ्तरों में बैठकर जिम्मेदार सरकारी एजेंसियां कागजों पर ओके की मुहर लगाती रहीं. जबकि भारत से गए प्रोडक्ट को एक के बाद एक लगातार दूसरे देश लौटा रहे हैं. यहां तक की बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों ने भी भारत के गेहूं-चावल को नकार दिया है. चीन भी हमारा चावल लौटा चुका है. अमेरिका ने तो साफ कह दिया कि भारत से आए अंडे हमारे यहां के कुत्ते-बिल्लिेयों के लिए हैं. इतना ही नहीं जिन मसालों पर हम दंभ भरते हैं कि हम सर्वश्रेष्ठ हैं उसे भी सिंगापुर और हांगकांग ने खराब बताकर वापस लौटाने का फरमान सुना दिया.
इंडोनेशिया ने भारतीय मूंगफली (ग्राउंडनट) के इंपोर्ट को ही सस्पेंड कर दिया है. जिस दशहरी, चौंसा और लंगड़ा, केसरिया आम पर हम इतराते हैं उसे जापान ने लौटा दिया. बावजूद इस सब के हमारी एजेंसियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है. लगातार भारत के कृषि प्रधान देश होने की साख पर बट्टा लग रहा है. लेकिन एक्सपोर्ट होने वाले खाने के आइटम पर मुहर लगाने वाली एजेंसियों को इससे क्या.
भारत से हर साल केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे आम जापान भेजे जाते रहे हैं. जापान के गुणवत्ता मानकों को देखते हुए भारत ने कई साल पहले वेपर हीट ट्रींटमेंट यानी VHT सिस्टम विकसित किया था. लेकिन, जापान ने 20 साल बाद एक बार फिर से इसके आयात पर बैन लगा दिया है. बेशक जापान भारतीय आम का बड़ा खरीदार नहीं है, लेकिन जापान के इस फैसले से भारत के एक्स पोर्टर्स को बड़ा नुकसान हुआ है. इतना ही नहीं साल 2025 में अमेरिका ने भी भारत के आम पर बैन लिया था.
रूस-यूक्रेन वॉर के चलते साल 2022 में तुर्की ने भारत से 50 हजार टन गेहूं मंगाया था. लेकिन गेहूं की जांच के बाद तुर्की ने अचानक से भारतीय गेहूं लेने से इंकार कर दिया. तुर्की का आरोप था कि भारतीय गेहूं में रूबेला वायरस का असर है.
बांग्लादेश और चीन ने इसी साल भारत का हजारों टन चावल लेने से ही इंकार कर दिया. बात तो तब और बड़ी हो गई जब बांग्लादेश ने भी भारतीय चावल की गुणवत्ता पर सवाल उठा दिए. इसके अलावा इसी साल चीन ने भी भारतीय चावल पर जीएमओ संबंधी आरोप लगाकर अपने देश में एंट्री देने से मना कर दिया.
भारतीय मूंगफली कई देशों में पसंद की जाती है. देश में भी खूब खाई जाती है. हाल ही में इंडोनेशिया ने भी भारत से मूंगफली खरीदने की सहमति जताई थी. शुरुआत भी हो गई थी, लेकिन 02 सितंबर 2025 को इंडोनशिया ने भारत से मूंगफली इंपोर्ट एग्रीमेंट को ही सस्पेंड कर दिया.
साल 2024 में भारतीय मसाला सेक्टर में उस वक्त हंगामा हो गया जब हांगकांग ने एमडीएच (MDH) और एवरेस्ट (Everest) के कुछ मसाला उत्पादों की बिक्री पर अपने यहां रोक लगाने के आदेश दे दिए. जबकि सिंगापुर ने एवरेस्टE के एक मसाला प्रोडक्ट के बारे में ये आदेश जारी कर दिया कि भारत उसके देश के बाजारों से अपने मसाले को हटा दें.
अमेरिका ने बीते साल जून में भारत से एक करोड़ अंडे खरीदे थे. जिसके चलते देश के पोल्ट्री सेक्टर में खुशी दौड़ गई थी कि चलो भारत के पोल्ट्री बाजार को एक और बड़ा ग्राहक मिला. लेकिन ये खुशी ज्यादा देर तक नहीं रही, क्योंकि अमेरिका ने भारतीय अंडों के बारे में ये साफ कर दिया की वो भारतीय अंडों का इस्तेमाल अपने यहां के कुत्ते-बिल्लि यों के लिए करेगा. भारतीय अंडे उसकी जनता के लिए नहीं हैं. इधर बीते एक साल में अमेरिका 545 टन भारतीय झींगा की खेप भी वापस कर चुका है.
ये भी पढ़ें-
Milk Adulteration: दूध में पानी मिलाया है या पूरा दूध ही सिंथेटिक है, खुद से ऐसे करें जांच
Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today