बैलगाड़ी से ट्रैक्टर खींचकर डीजल भरवाने पहुंचा किसानखाड़ी क्षेत्र में शुरू हुए युद्ध का असर अब दुनिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है. भारत में भी युद्ध के बाद पेट्रोल और डीजल को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है. कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. इसी बीच महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने किसानों की परेशानी को उजागर कर दिया है. यहां एक किसान को अपने ट्रैक्टर में डीजल भरवाने के लिए बैलगाड़ी की मदद लेनी पड़ी.
बुलढाणा जिले के मेहकर तहसील के आरेगांव गांव के किसान विनायकराव टाले खेती का काम कर रहे थे. इसी दौरान उनके ट्रैक्टर का डीजल खत्म हो गया. आमतौर पर किसान कैन या बोतल में डीजल लेकर खेत तक पहुंच जाते हैं, लेकिन जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से प्लास्टिक की कैन और बोतलों में पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा रखी है. ऐसे में किसान के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई.
खेत में काम रुके नहीं, इसके लिए किसान ने एक अलग रास्ता निकाला. उन्होंने अपने ट्रैक्टर को बैलगाड़ी से बांधा और करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित पेट्रोल पंप तक खींचकर ले गए. वहां पहुंचकर उन्होंने ट्रैक्टर में डीजल भरवाया और फिर वापस खेत में काम शुरू किया.
इस घटना के बाद किसान विनायकराव टाले ने सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर की. उनका कहना है कि अगर वास्तव में डीजल और पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, तो फिर कैन में ईंधन देने पर रोक क्यों लगाई गई है. किसान का आरोप है कि प्रशासन लोगों को भरोसा दिला रहा है कि किसी तरह की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही दिखाई दे रहे हैं.
किसान ने कहा कि जब वे जिला प्रशासन की अपील टीवी या मोबाइल पर सुनते हैं, तो उन्हें गुस्सा आता है. उनका कहना है कि किसानों को खेती के काम के लिए तुरंत डीजल की जरूरत होती है और ऐसी स्थिति में कैन में डीजल नहीं मिलने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
खाड़ी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है. हालांकि सरकार लगातार यह कह रही है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. इसके बावजूद कई इलाकों में लोग एहतियात के तौर पर पेट्रोल और डीजल जमा करने की कोशिश कर रहे हैं.
महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले की यह घटना दिखाती है कि किसी भी तरह की पाबंदी या अफवाह का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता है. खेती का काम पूरी तरह डीजल पर निर्भर रहता है और यदि समय पर ईंधन नहीं मिले तो किसानों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है. ऐसे में किसान उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन उनकी जरूरतों को समझते हुए उचित व्यवस्था करेगा, ताकि खेती का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे.
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