विश्व दुग्ध दिवससुबह की चाय हो, बच्चों का गिलास हो या मिठाइयों की मिठास-दूध भारतीय जीवन का अहम हिस्सा रहा है. यही वजह है कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और करोड़ों किसानों की रोजी-रोटी डेयरी सेक्टर से जुड़ी हुई है. लेकिन अब दूध की दुनिया में एक नया खिलाड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा है-वीगन मिल्क (Vegan Milk). हर साल 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस (World Milk Day) मनाया जाता है. इस मौके पर दूध के पोषण और डेयरी क्षेत्र के योगदान की चर्चा होती है, लेकिन साथ ही यह सवाल सवाल उठता है कि क्या वीगन मिल्क भविष्य में पारंपरिक डेयरी दूध को चुनौती दे सकता है?
वीगन मिल्क ऐसा दूध होता है, जो किसी पशु से नहीं बल्कि पौधों से तैयार किया जाता है. इसे बादाम, सोयाबीन, ओट्स (जई), नारियल, चावल और काजू जैसी चीजों से बनाया जाता है. यह पूरी तरह पौधों पर आधारित होता है और इसमें किसी भी प्रकार का पशु उत्पाद शामिल नहीं होता.
वीगन मिल्क की बढ़ती मांग के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य को माना जा रहा है. कुछ लोगों को गाय या भैंस के दूध से एलर्जी होती है या वे लैक्टोज पचा नहीं पाते. ऐसे लोगों के लिए वीगन मिल्क एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा है. इसके अलावा, पर्यावरण को लेकर भी लोगों की सोच बदल रही है. कई रिपोर्ट में बताया गया है कि पशुपालन से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है और बड़ी मात्रा में पानी और संसाधनों की जरूरत पड़ती है. ऐसे में पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग पौधों से बने दूध को अधिक अच्छा विकल्प मान रहे हैं. साथ ही पशु अधिकारों को लेकर संवेदनशील लोगों के बीच भी वीगन मिल्क की मांग तेजी से बढ़ी है. वे पशु आधारित उत्पादों के बजाय पौधों से बने उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल वीगन मिल्क पूरी तरह डेयरी दूध की जगह नहीं ले सकता. भारत जैसे देश में दूध सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि पोषण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम आधार है. करोड़ों किसान डेयरी व्यवसाय से जुड़े हैं और दूध उत्पादन उनके लिए आय का प्रमुख स्रोत है. इसके अलावा, डेयरी दूध में प्राकृतिक रूप से कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12 और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. हालांकि कई कंपनियां वीगन मिल्क में भी इन पोषक तत्वों को मिलाकर बाजार में उतार रही हैं, लेकिन स्वाद, उपलब्धता और कीमत के मामले में अभी भी डेयरी दूध की मजबूत पकड़ बनी हुई है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में डेयरी दूध और वीगन मिल्क दोनों का अपना-अपना बाजार होगा. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवा, फिटनेस प्रेमी और पर्यावरण संरक्षण को महत्व देने वाले लोग वीगन मिल्क की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जबकि पारंपरिक दूध की मांग भी बनी रहेगी. विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर यह साफ है कि वीगन मिल्क एक उभरता हुआ विकल्प जरूर है, लेकिन फिलहाल डेयरी उद्योग के लिए यह सीधी चुनौती से ज्यादा एक नया बाजार और बदलती पसंद का संकेत है. आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लोग किस विकल्प को ज्यादा अपनाते हैं और खाद्य उद्योग इस बदलाव के साथ खुद को कैसे ढालता है.
साल 2001 में संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य और कृषि संगठन ने दूध के अलग-अलग महत्वों को समझते हुए उपस्थित देशों के प्रतिनिधियों की सर्वसम्मति से 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाने की घोषणा की थी. इसका मुख्य उद्देश्य जन-जन को दूध में पाए जाने वाले पौष्टिक तत्वों के प्रति जागरूक करना. वहीं, डेयरी क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक विकास को मजबूत बनाना था. इस दिवस की महत्व को देखते हुए प्रत्येक वर्ष दुग्ध दिवस मनाने वाले देशों की संख्या में वृद्धि हो रही है.
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