E85 Petrol: इथेनॉल ब्लेंडिंग का दायरा बढ़ाने की तैयारी में सरकार, सामने आया ड्राफ्ट, किसानों को मिलेगा नया बाजार!

E85 Petrol: इथेनॉल ब्लेंडिंग का दायरा बढ़ाने की तैयारी में सरकार, सामने आया ड्राफ्ट, किसानों को मिलेगा नया बाजार!

देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ाने की दिशा में सरकार ने E85 तक के फ्यूल पर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें नए फ्यूल स्टैंडर्ड और नियमों के बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है. इससे किसानों के लिए नई मांग और बाजार के अवसर बनने की संभावना बढ़ गई हैं. पढ़ें पूरी खबर...

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E85 Petrol: इथेनॉल ब्लेंडिंग का दायरा बढ़ाने की तैयारी में सरकार, सामने आया ड्राफ्ट, किसानों को मिलेगा नया बाजार!इथेनॉल ब्‍लेंडिग ड्राफ्ट पर सरकार ने मांगे सुझाव (AI Image)

देश में पेट्रोल की कीमतों को कंट्रोल में रखने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार इथेनॉल ब्‍लेड‍िंंग का दायरा बढ़ाकर बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है, जिससे किसानों को एक नया बाजार मिल सकता है. देश में अभी मुख्‍य तौर पर गन्‍ना और मक्‍के से इथेनॉल बनाया जाता है, लेकिन अब सरकार बड़ी मात्रा में चावल को इथेनॉल निर्माण में खपाने की तैयारी में है. ऐसे में आने वाले समय में इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को इस इंडस्‍ट्री के रूप में नया बाजार मिलने की संभावना है. दरअसल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 27 अप्रैल को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इस प्रस्‍ताव का उद्देश्य इमीशन नियमों, फ्यूल क्लासिफिकेशन और हाई इथेनॉल ब्लेंड से जुड़े तकनीकी मानकों में बदलाव करना है. फिलहाल इसे पब्लिक कमेंट यानी सुझाव के लिए जारी किया गया है. फिलहाल इस पर आम लोगों और इंडस्ट्री से सुझाव लिए जा रहे हैं और अंतिम फैसला इन सुझावों के बाद लिया जाएगा.

E85 और E100 जैसे हाई ब्लेंड फ्यूल को मिलेगी मान्यता

ड्राफ्ट में सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन कर E85 और E100 तक के फ्यूल के लिए व्हीकल स्टैंडर्ड शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसमें पेट्रोल की पहचान को E10 से बदलकर E10/E20 करने की बात कही गई है, जबकि E85 और E100 को भी आधिकारिक कैटेगरी में शामिल किया जाएगा. इसके अलावा बायोडीजल को B10 से बढ़ाकर B100 तक अपडेट करने का प्रस्ताव है. इससे सरकार हाई-ब्लेंड फ्यूल के पूरे दायरे को नियमों में शामिल करना चाहती है.

E20 के बाद अगला चरण

बता दें कि भारत पहले ही E20 ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर चुका है. अब सरकार E25, E27, E85 और E100 जैसे हाई ब्लेंड फ्यूल की दिशा में आगे बढ़ रही है. हालांकि यह बदलाव एकदम लागू नहीं होगा, बल्कि चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. E20 सामान्य फ्यूल के रूप में उपलब्ध रहेगा, जबकि हाई ब्लेंड फ्यूल केवल उन्हीं वाहनों में इस्तेमाल होंगे जो इसके अनुकूल होंगे. इसके लिए कंपनियों को फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां तैयार करनी होंगी.

बढ़ेगी फसलों की मांग

इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से कृषि क्षेत्र को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था कि पिछले वर्षों में इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से देश को हर साल करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल पेट्रोल के आयात में कमी आई है. इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ किसानों की फसलों की मांग भी बढ़ी है. सरकार का कहना है कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार है, इसलिए अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग ऊर्जा के रूप में किया जा सकता है.

इथेनॉल ने बदली किसानों की स्थिति: गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का के इस्तेमाल से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को बड़ा लाभ हुआ है. इस पहल से करीब 42,000 करोड़ रुपये किसानों की जेब में पहुंचे हैं. पहले मक्का की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम मिलती थी, लेकिन इथेनॉल उत्पादन शुरू होने के बाद कीमतों में सुधार हुआ और खेती का रकबा भी बढ़ा है.

तकनीकी बदलाव और वाहन मानकों में संशोधन

ड्राफ्ट के अनुसार ग्रॉस व्हीकल वेट लिमिट को 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है. HCNG यानी हाइड्रोजन और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस से जुड़े नामों में भी बदलाव किया जाएगा. फ्यूल क्लासिफिकेशन को “E10/E20” के रूप में अपडेट करने की बात कही गई है. ये सभी बदलाव वैकल्पिक ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अहम माने जा रहे हैं.

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