भागलपुर का रामासी बनेगा देश का पहला ‘सिंदूर ग्राम’, महिलाओं को खेती से जोड़कर रोजगार बढ़ाने की तैयारी

भागलपुर का रामासी बनेगा देश का पहला ‘सिंदूर ग्राम’, महिलाओं को खेती से जोड़कर रोजगार बढ़ाने की तैयारी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने भागलपुर के रामासी गांव को देश के पहले ‘सिंदूर ग्राम’ के रूप में विकसित करने की पहल शुरू की है. इस योजना के तहत सीता सिंदूर (एनाट्टो) की खेती को बढ़ावा देकर महिला किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और गांव को प्राकृतिक सिंदूर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी की जा रही है.

Advertisement
भागलपुर का रामासी बनेगा देश का पहला ‘सिंदूर ग्राम’, महिलाओं को खेती से जोड़कर रोजगार बढ़ाने की तैयारीभागलपुर में सिंदूर की खेती बढ़ाने की पहल

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने भागलपुर जिले के रामासी गांव को देश के पहले ‘सिंदूर ग्राम’ के रूप में विकसित करने की शुरुआत कर दी है. विश्वविद्यालय ने इस गांव को गोद लेते हुए यहां सीता सिंदूर (एनाट्टो) की खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों, विशेष रूप से महिला किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ना और गांव को प्राकृतिक सिंदूर उत्पादन का मॉडल बनाना है.

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह, सन्हौला के विधायक सुभानंद मुकेश, रामासी पंचायत की मुखिया शोभा देवी, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, अधिकारी और करीब 100 महिला किसान और ग्रामीण शामिल हुए.

एक एकड़ में लगाए गए 250 सिंदूर के पौधे

कार्यक्रम के दौरान एक एकड़ जमीन पर 7 से 8 माह पुराने 250 सीता सिंदूर के पौधे लगाए गए. साथ ही 100 महिला किसानों को सिंदूर के पौधे वितरित किए गए ताकि वे अपने खेतों और घरों के आसपास इसकी खेती शुरू कर सकें. किसानों को खेती के कार्यों को आसान बनाने के लिए हॉर्टिकल्चर टूल किट, पावर नैपसैक स्प्रेयर और स्वीपिंग मशीन भी उपलब्ध कराई गई.

सिंदूर का धार्मिक ही नहीं, औद्योगिक महत्व भी

कार्यक्रम की शुरुआत में सीएबीटी के प्राचार्य डॉ. रवि केशरी ने सिंदूर के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सिंदूर केवल विवाहित महिलाओं के सुहाग का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसका उपयोग कई उद्योगों में भी किया जाता है. वहीं, निदेशक छात्र कल्याण डॉ. श्वेता सम्भावी ने भारतीय समाज में सिंदूर की परंपरा और उसके सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी.

रोजगार और स्वरोजगार के बढ़ेंगे अवसर

निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि रामासी में सिंदूर की खेती शुरू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. एस. के. पाठक ने किसानों को जैविक तरीके से सिंदूर की खेती अपनाने की सलाह दी. निदेशक सीड्स एवं फार्म डॉ. फेजा अहमद ने किसानों को जलवायु के अनुकूल और अधिक उत्पादन देने वाली सिंदूर की किस्मों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए विश्वविद्यालय टिशू कल्चर तकनीक से बड़े पैमाने पर पौधे तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहा है.

प्राकृतिक सिंदूर बनाकर बाजार तक पहुंचाने में मिलेगी मदद

विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि यदि किसान और महिला स्वयं सहायता समूह सिंदूर के बीज से प्राकृतिक सिंदूर पाउडर (बिक्सिन) तैयार करते हैं तो विश्वविद्यालय का स्टार्टअप सेल उन्हें पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने में पूरी मदद करेगा.

‘अब रामासी की पहचान होगी सिंदूर ग्राम के रूप में’

कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि अब रामासी गांव की पहचान ‘सिंदूर ग्राम’ के रूप में होगी. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक डॉ. वी. शाजीदा बानो के तीन वर्षों के प्रयासों से सीता सिंदूर की खेती की तकनीक किसानों तक पहुंच सकी है. उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय ने सिंदूर प्रौद्योगिकी का पेटेंट हासिल किया है और सीता सिंदूर के लिए जीआई टैग भी हासिल किया है.

अमूल समेत कई उद्योगों में होता है उपयोग

कुलपति ने बताया कि एनाट्टो का उपयोग अमूल सहित कई खाद्य उद्योग प्राकृतिक रंग के रूप में करते हैं. वहीं, बिक्सिन ऑयल का इस्तेमाल कई औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है. उनका कहना था कि आने वाले समय में रामासी गांव जैविक सिंदूर उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है. विश्वविद्यालय किसानों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बाजार से भी जोड़ेगा.

गांव में लगेगी सिंदूर प्रोसेसिंग यूनिट

विश्वविद्यालय ने गांव में सिंदूर प्रसंस्करण इकाई लगाने की भी योजना बनाई है. यहां सिंदूर के बीजों से शुद्ध प्राकृतिक सिंदूर पाउडर तैयार किया जाएगा. इसके अलावा गांव में सिंदूर नर्सरी, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन और कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि ग्रामीणों की आय के कई स्रोत विकसित हो सकें.

आगे जरदालू और कमल आधारित थीम गांव भी बनेंगे

कुलपति ने बताया कि भविष्य में विश्वविद्यालय जरदालू और कमल की खेती पर आधारित थीम गांव विकसित करने की योजना पर भी काम करेगा. इसके साथ ही दानापुर कैंटोनमेंट क्षेत्र में दुनिया का पहला ‘सिंदूर पार्क’ बनाने की तैयारी भी की जा रही है.

ग्रामीण विकास का बनेगा नया मॉडल

समापन अवसर पर सह निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर. एन. सिंह ने कहा कि जिस तरह विश्वविद्यालय ने पहले कुपोषण उन्मूलन अभियान के तहत 28 गांवों में सफल काम किया था, उसी तरह ‘सिंदूर ग्राम रामासी’ भी ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और रोजगार बढ़ाने का नया मॉडल बन सकता है.
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक, अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रतिनिधि, महिला किसान और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.

POST A COMMENT