किसानों की 14 साल पुरानी मांग पूरी, जेवर के लोगों को यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल से राहत

किसानों की 14 साल पुरानी मांग पूरी, जेवर के लोगों को यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल से राहत

जेवर के किसानों और स्थानीय नागरिकों की 14 साल पुरानी मांग अब पूरी हो गई है. यमुना एक्सप्रेसवे से प्रभावित और आसपास के पात्र गांवों के लोगों को जेवर टोल प्लाजा पर टोल शुल्क से राहत मिलेगी. इसके लिए स्थानीय निवासियों को प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और वाहन की आरसी के साथ पंजीकरण कराना होगा.

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किसानों की 14 साल पुरानी मांग पूरी, जेवर के लोगों को यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल से राहतजमीन दी, अब टोल से मिली राहत!

यमुना एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों और आसपास के ग्रामीणों की करीब 14 साल पुरानी मांग अब पूरी होने जा रही है. जेवर क्षेत्र के किसान और स्थानीय नागरिक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि रोजमर्रा के काम के लिए एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने पर उनसे टोल शुल्क न लिया जाए. अब यमुना एक्सप्रेसवे से प्रभावित और आसपास के पात्र गांवों के स्थानीय नागरिकों को जेवर टोल प्लाजा पर टोल शुल्क से राहत देने का फैसला किया गया है. इससे रोजाना एक्सप्रेसवे से आने-जाने वाले किसानों और स्थानीय परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी.

किसानों की जमीन से बना एक्सप्रेसवे, अब टोल से राहत

यमुना एक्सप्रेसवे के निर्माण में जेवर और आसपास के क्षेत्र के किसानों की जमीन का बड़ा योगदान रहा है. एक्सप्रेसवे बनने के बाद इलाके में विकास और आवागमन को बढ़ावा मिला, लेकिन स्थानीय लोगों के सामने रोजाना टोल शुल्क देने की समस्या बनी रही. किसानों और स्थानीय नागरिकों का कहना था कि एक्सप्रेसवे उनके लिए सिर्फ लंबी दूरी की यात्रा का रास्ता नहीं है. जिला मुख्यालय, अस्पताल, अदालत, शिक्षण संस्थानों, यमुना प्राधिकरण और दूसरे जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए उन्हें अक्सर इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है. ऐसे में बार-बार टोल देना उनके लिए अतिरिक्त खर्च बन गया था.

14 साल से उठ रही थी किसानों की मांग

यमुना एक्सप्रेसवे के संचालन के बाद से ही स्थानीय किसान, किसान संगठन और सामाजिक प्रतिनिधि टोल शुल्क से राहत की मांग करते रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखी गई. जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने भी किसानों और स्थानीय लोगों की इस मांग को गंभीरता से उठाया. उन्होंने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और एक्सप्रेसवे का संचालन करने वाली कंपनी के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की. इन बैठकों में किसानों के योगदान और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों को प्रमुखता से रखा गया.

पात्र गांवों के लोगों को मिलेगा फायदा

अब तय किया गया है कि यमुना एक्सप्रेसवे से प्रभावित और आसपास के पात्र गांवों के स्थानीय नागरिकों को जेवर टोल प्लाजा पर टोल शुल्क से छूट मिलेगी. यानी पात्र स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में आने-जाने के लिए जेवर टोल प्लाजा पर टोल नहीं देना होगा. इस सुविधा के लिए स्थानीय नागरिकों को अपने स्थानीय निवासी होने का प्रमाण, आधार कार्ड और वाहन की आरसी की प्रति जमा करनी होगी. इन दस्तावेजों के आधार पर वाहन का पंजीकरण किया जाएगा. जरूरी सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र लोगों को निर्धारित व्यवस्था के तहत टोल फ्री आवागमन की सुविधा मिलेगी.

17 सितंबर से मिल सकता है लाभ

जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने पात्र स्थानीय नागरिकों से अपने वाहन का पंजीकरण कराने की अपील की है. इसके लिए उन्हें जरूरी दस्तावेज लेकर जेवर टोल प्लाजा के मैनेजर या निर्धारित कार्यालय में संपर्क करना होगा. विधायक ने कहा है कि स्थानीय लोग 17 सितंबर से पहले या बाद में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पंजीकरण करा सकते हैं. पंजीकरण और सत्यापन पूरा होने के बाद उन्हें इस सुविधा का लाभ मिलेगा.

किसानों के योगदान का सम्मान, बोले विधायक

जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि यह फैसला केवल टोल शुल्क से राहत देने का मामला नहीं है, बल्कि उन किसानों और स्थानीय नागरिकों के योगदान का सम्मान भी है, जिनकी जमीन और सहयोग से यमुना एक्सप्रेसवे और पूरे क्षेत्र में विकास का रास्ता तैयार हुआ. उन्होंने कहा कि किसान और स्थानीय लोग करीब 14 वर्षों से इस मांग को उठा रहे थे. किसान संगठनों ने भी लगातार इस मुद्दे को सामने रखा. लंबे समय तक चले प्रयासों के बाद अब इस मांग का सकारात्मक समाधान हुआ है.

जेवर के किसानों और ग्रामीणों को होगी बचत

स्थानीय लोगों के लिए टोल से राहत का मतलब रोजाना के सफर के खर्च में कमी भी है. किसानों को मंडी, सरकारी कार्यालय, अस्पताल या दूसरे जरूरी कामों के लिए एक्सप्रेसवे से गुजरना पड़ता है. ऐसे में बार-बार टोल देने से उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था. अब पात्र स्थानीय लोगों को टोल से छूट मिलने के बाद इस खर्च में बचत होगी. इससे किसानों और ग्रामीण परिवारों को अपने रोजमर्रा के काम निपटाने में भी आसानी होगी.

किसान संगठनों और स्थानीय लोगों के प्रयास का नतीजा

विधायक धीरेन्द्र सिंह ने इस फैसले के लिए यमुना प्राधिकरण, यमुना एक्सप्रेसवे प्रबंधन के साथ-साथ क्षेत्र के किसानों, किसान संगठनों और स्थानीय नागरिकों के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया. करीब 14 वर्षों से चली आ रही इस मांग का समाधान जेवर क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.

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