BHU वैज्ञानिकों की बड़ी खोजगेहूं की फसल को बीमारी और खेती के दौरान होने वाले अलग-अलग तनाव से बचाने के लिए बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण खोज की है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि मिट्टी में मौजूद कुछ फायदेमंद बैक्टीरिया गेहूं के पौधों को बीमारियों से लड़ने में मजबूत बनाने के साथ-साथ मुश्किल परिस्थितियों में भी बेहतर बढ़ने और पैदावार देने में मदद कर सकते हैं. BHU के बॉटनी विभाग में प्रशांत सिंह के नेतृत्व में वंदना देवी, निधि यादव और नंदिता दुबे की टीम ने इस विषय पर रिसर्च की है. यह रिसर्च अमेरिका की एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय Q1 जर्नल ‘फिजियोलॉजिकल एंड मॉलिक्यूलर प्लांट पैथोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है.
वैज्ञानिकों ने गेहूं के पौधों पर पौधों की ग्रोथ बढ़ाने वाले फायदेमंद बैक्टीरिया (PGPR) का असर देखा. इसमें खासतौर पर Bacillus amyloliquefaciens बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया गया. रिसर्च के दौरान गेहूं के पौधों को Bipolaris sorokiniana नाम के फंगस से संक्रमित किया गया. यह फंगस गेहूं में स्पॉट ब्लॉच बीमारी फैलाता है. वैज्ञानिकों ने पौधों को अलग-अलग दूरी और संख्या में भी उगाया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ज्यादा पौधे होने पर एक-दूसरे से होने वाली प्रतिस्पर्धा का क्या असर पड़ता है. दरअसल, खेत में पौधों की संख्या ज्यादा होने पर उन्हें धूप, पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए एक-दूसरे से ज्यादा मुकाबला करना पड़ता है. इससे पौधों की बढ़त कम हो सकती है और उन पर तनाव बढ़ जाता है.
रिसर्च में सामने आया कि जब खेत में पौधों की संख्या ज्यादा होती है, तो गेहूं के पौधों की बढ़त कुछ कम हो जाती है. लेकिन जिन पौधों को PGPR जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया से तैयार किया गया था, वे दूसरे पौधों के मुकाबले बेहतर बढ़े. जब गेहूं के पौधों पर बीमारी फैलाने वाले Bipolaris sorokiniana फंगस का हमला हुआ, तो फायदेमंद बैक्टीरिया वाले पौधों ने बीमारी का ज्यादा मजबूती से सामना किया. खास बात यह रही कि बीमारी और पौधों के बीच ज्यादा प्रतिस्पर्धा, दोनों तरह के दबाव के बावजूद इन पौधों की बढ़त और पैदावार बेहतर बनी रही.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, फायदेमंद बैक्टीरिया पौधे की बीमारी से लड़ने की ताकत को हर समय सक्रिय नहीं रखते. बल्कि वे पौधे को पहले से इस तरह तैयार कर देते हैं कि बीमारी का हमला होते ही पौधा जल्दी और मजबूती से उसका मुकाबला कर सके. इसे ‘डिफेंस प्राइमिंग’ कहा जाता है. इसका फायदा यह होता है कि पौधा बिना जरूरत अपनी ऊर्जा बीमारी से लड़ने में खर्च नहीं करता. वह ऊर्जा का इस्तेमाल अच्छी तरह बढ़ने और जरूरत पड़ने पर बीमारी से बचाव करने में करता है.
रिसर्चर्स को गेहूं के पौधों के PR1 और PR3 डिफेंस जीन से जुड़े हिस्सों में DNA मिथाइलेशन में बदलाव भी मिले. इससे संकेत मिलता है कि फायदेमंद बैक्टीरिया पौधे के डिफेंस सिस्टम को जीन स्तर पर भी प्रभावित और रीप्रोग्राम कर सकते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह रिसर्च सिर्फ गेहूं की बीमारी से बचाव तक सीमित नहीं है. जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, पानी की कमी और दूसरी पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाने में ऐसे फायदेमंद सूक्ष्मजीव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
इस अध्ययन से यह उम्मीद बढ़ी है कि भविष्य में फसलों की सुरक्षा के लिए रसायनों पर निर्भरता कम करके फायदेमंद बैक्टीरिया जैसे जैविक विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है. यानी पौधों की जड़ों के आसपास मौजूद अच्छे बैक्टीरिया फसल को मजबूत बनाने और मुश्किल परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन लेने में किसानों की मदद कर सकते हैं. (एएनआई)
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