Stubble Burning: पराली जलाई तो रेड एंट्री, दो सीजन तक मंडी में नहीं बिकेगी फसल

Stubble Burning: पराली जलाई तो रेड एंट्री, दो सीजन तक मंडी में नहीं बिकेगी फसल

करनाल में धान की पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. एफआईआर और मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री के साथ 5 हजार से 30 हजार रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान है. खेतों की रात में ड्रोन से निगरानी होगी और करीब 750 अधिकारी-कर्मचारियों को तैनात किया गया है. वहीं पराली का उचित प्रबंधन करने पर किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि मिलेगी.

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Stubble Burning: पराली जलाई तो रेड एंट्री, दो सीजन तक मंडी में नहीं बिकेगी फसलपराली की आग पर सख्ती (फाइल फोटो)

धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए करनाल जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है. खेतों में फसल अवशेषों में आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर रेड एंट्री की जाएगी. ऐसे किसान अगले दो सीजन तक मंडी में अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे. इसके अलावा पराली जलाने पर जमीन के क्षेत्रफल के हिसाब से 5 हजार से लेकर 30 हजार रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि लगाने का प्रावधान है.

जिला उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि धान की कटाई के बाद फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी तरह अलर्ट है. प्रशासन ने निगरानी और कार्रवाई के लिए करीब 750 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है. इतना ही नहीं, रात के समय भी खेतों पर नजर रखने के लिए ड्रोन से निगरानी की जाएगी.

पराली में आग लगाई तो होगी FIR

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि फसल अवशेषों में आग लगाने के मामले सामने आने पर संबंधित किसानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए. इसमें एफआईआर दर्ज करने के साथ मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के रिकॉर्ड में रेड एंट्री करना भी शामिल है.

प्रशासन के मुताबिक, रेड एंट्री होने के बाद संबंधित किसान दो सीजन तक अपनी फसल मंडी में नहीं बेच सकेंगे. प्रशासन का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से रोकने के साथ फसल अवशेषों के वैकल्पिक प्रबंधन के लिए प्रेरित करना है.

5 हजार से 30 हजार रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति

पराली जलाने के मामलों में किसानों को आर्थिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा. इनपुट में दी गई पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर तय होगी.

  • 2 एकड़ से कम भूमि: प्रति घटना 5,000 रुपये तक
  • 2 एकड़ या उससे अधिक और 5 एकड़ से कम भूमि: प्रति घटना 10,000 रुपये तक
  • 5 एकड़ से अधिक भूमि: प्रति घटना 30,000 रुपये तक

इस तरह प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि खेतों में पराली जलाने के मामले में निगरानी से लेकर कार्रवाई तक सख्त व्यवस्था लागू की जाएगी.

रात में ड्रोन से खेतों पर नजर

पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए इस बार निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. प्रशासन की ओर से रात के समय ड्रोन के जरिए किसानों के खेतों की निगरानी की जाएगी. इसका मकसद रात के समय होने वाली आगजनी की घटनाओं का पता लगाना और समय रहते संबंधित टीमों तक इसकी सूचना पहुंचाना है.

प्रशासन ने जिला, खंड/तहसील और गांव स्तर पर कमेटियों और एनफोर्समेंट टीमों का गठन किया है. इन टीमों में करीब 750 अधिकारी-कर्मचारियों को तैनात किया गया है. ये टीमें पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के साथ नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई करेंगी.

पराली नहीं जलाएं, प्रबंधन पर पाएं 1,200 रुपये प्रति एकड़

जिला प्रशासन ने दंडात्मक कार्रवाई के साथ किसानों को पराली का उचित प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया है. उपायुक्त के मुताबिक किसान कृषि यंत्रों की मदद से पराली का उचित प्रबंधन कर 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि हासिल कर सकते हैं.

किसानों से पराली जलाने की बजाय फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करने की अपील की गई है. इनमें सुपर SMS, बेलिंग मशीन, हैप्पी सीडर, रोटरी स्लेशर/श्रब मास्टर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर/मल्चर, हाइड्रोलिक रिवर्सल एमबी प्लो, जीरो टिल ड्रिल और सुपर सीडर जैसे कृषि यंत्र शामिल हैं.

प्रशासन की ओर से गांवों में जागरुकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि किसान पराली जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को समझें और फसल अवशेषों के प्रबंधन के उपलब्ध विकल्पों को अपनाएं.

किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील

उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने किसानों से धान की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को आग नहीं लगाने और कृषि यंत्रों की मदद से उनका प्रबंधन करने की अपील की है. प्रशासन का जोर इस बात पर है कि किसान पराली को समस्या मानकर जलाने के बजाय उपलब्ध मशीनों और योजनाओं की मदद से उसका प्रबंधन करें.

एक तरफ प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने पर एफआईआर, रेड एंट्री और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जैसी कार्रवाई का प्रावधान रखा है, वहीं दूसरी तरफ फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि देकर इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

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