'अरुणाचल कीवी' को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने की तैयारी, किसानों और युवाओं को मिलेगा फायदा

'अरुणाचल कीवी' को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने की तैयारी, किसानों और युवाओं को मिलेगा फायदा

अरुणाचल प्रदेश की कीवी को अब देश के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने की तैयारी है. राज्य सरकार ने कीवी की खेती, प्रोसेसिंग, कोल्ड-चेन, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट को मजबूत करने के लिए करीब 167 करोड़ रुपये का मिशन शुरू किया है.

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'अरुणाचल कीवी' को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने की तैयारी, किसानों और युवाओं को मिलेगा फायदाअरुणाचल कीवी

अरुणाचल प्रदेश की कीवी अब देश के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट में भी अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है. दरअसल, राज्य के उपमुख्यमंत्री चौना मेन ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश देश में कीवी उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है. कीवी की खेती से खासकर पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में किसानों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं. राज्य सरकार कीवी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी काम कर रही है. इसके लिए 'मिशन अरुणाचल कीवी', 'आत्मनिर्भर बागवानी योजना' और 'वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम' जैसी योजनाओं के जरिए किसानों को मदद दी जा रही है.

उप-मुख्यमंत्री चौना मेन के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य सिर्फ खेतों में कीवी का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि ऐसी पूरी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे किसान अपनी उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचा सकें. इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं.

167 करोड़ रुपये का कीवी मिशन

अधिकारियों के अनुसार, इसी साल मई में 'अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की USP' मिशन शुरू किया गया है. इस मिशन के लिए करीब 167 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. इस योजना के तहत कीवी की खेती से लेकर उसकी कटाई, भंडारण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात तक की पूरी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सकेगा.

बनाए जाएंगे पोस्ट-हार्वेस्ट हब

कीवी उत्पादक क्षेत्रों में 6 इंटीग्रेटेड पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट हब बनाने की योजना है. इनमें लोअर सुबनसिरी की जीरो वैली, वेस्ट कामेंग के दिरांग और कलाकतांग, शी योमी और दिबांग वैली जैसे इलाके शामिल हैं. इन केंद्रों पर कीवी की सफाई, ग्रेडिंग, पैकिंग, भंडारण और प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके लिए कोल्ड-चेन व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि फसल कटने के बाद खराब न हो और लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सके.

सालाना 7000 टन से ज्यादा कीवी उत्पादन

अरुणाचल प्रदेश में हर साल 7,000 टन से ज्यादा कीवी का उत्पादन होता है. अधिकारियों के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश देश के कुल कीवी उत्पादन का आधे से ज्यादा हिस्सा पैदा करता है. अरुणाचल प्रदेश को कीवी की जैविक खेती के क्षेत्र में भी खास पहचान मिली है. अरुणाचल प्रदेश को MOVCD-NER के तहत कीवी की खेती के लिए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन हासिल करने वाला देश का पहला राज्य बताया गया है.

किसानों को मिलेगी सब्सिडी 

राज्य सरकार आत्मनिर्भर बागवानी योजना के जरिए किसानों को बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है. विभाग के अनुसार, इस योजना में 45 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी, 45 प्रतिशत बैंक फंडिंग और 10 प्रतिशत राशि लाभार्थी को लगानी होती है. सरकार की योजना कीवी जैसे महंगे फलों के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को भी बढ़ावा देने की है, ताकि किसान मिलकर उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग कर सकें.

बिक्री की समस्या कम करने की कोशिश

कीवी किसानों के सामने फसल तैयार होने के बाद उसे जल्दी बेचने और उचित कीमत नहीं मिलने की समस्या भी रहती है, क्योंकि कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को कई बार मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ सकती है. वहीं, नए कीवी मिशन के जरिए सरकार कोल्ड-चेन, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और बेहतर बाजार संपर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इससे कीवी को घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कीवी की खेती को मजबूत करने से सिर्फ किसानों को बाजार नहीं मिलेगा, बल्कि पहाड़ी और सीमावर्ती गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और युवाओं को अपने गांवों में ही काम करने के मौके मिल सकेंगे. (PTI)

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