महाराष्ट्र के 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित (सांकेतिक तस्वीर)महाराष्ट्र में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया है. ये तालुका 32 जिलों में फैले हुए हैं और राज्य के करीब 74 फीसदी हिस्से को कवर करते हैं. सरकार ने प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को राहत देने की भी घोषणा की है. सूखाग्रस्त घोषित किए गए इलाकों में किसानों को फसल लोन के पुनर्गठन की सुविधा मिलेगी. खेती से जुड़े कर्ज की वसूली को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है. इसके अलावा भूमि राजस्व में छूट और खेती में इस्तेमाल होने वाले बिजली पंपों के बिजली बिल में राहत देने का भी फैसला किया गया है.
सरकार के मुताबिक, 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ किए जा चुके हैं. अब प्रभावित इलाकों में इससे ज्यादा क्षमता वाले कृषि पंपों को भी बिजली बिल में छूट देने का प्रावधान किया गया है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का सर्वे तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए हैं. सर्वे के दौरान फसल की स्थिति की तस्वीरें और GPS लोकेशन भी दर्ज की जाएगी. इसके आधार पर नुकसान की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि किसानों को फसल नुकसान के लिए कितनी आर्थिक मदद दी जाएगी, इसका फैसला जमीन पर होने वाले सर्वे के बाद किया जाएगा. इसके लिए अलग से सरकारी आदेश जारी किया जाएगा.
सूखे से प्रभावित गांवों में जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकर भेजे जाएंगे. लोगों और पशुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करने के साथ ही किसानों के लिए पानी बचाने से जुड़े काम भी किए जाएंगे. खेती पर निर्भर किसानों और मजदूरों के लिए अनाज, जबकि पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने का भी फैसला लिया गया है. ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के नियमों में भी जरूरत के हिसाब से ढील दी जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके.
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में 74 तालुका सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं. इसके बाद अमरावती में 56, नासिक में 49, नागपुर में 39, पुणे में 35 और ठाणे में 12 तालुका शामिल हैं. मराठवाड़ा के जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड, परभणी और हिंगोली जैसे जिले भी प्रभावित सूची में शामिल हैं. इसके अलावा विदर्भ, नासिक, पुणे और कोंकण क्षेत्र के कई तालुका भी सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में जून से 18 सितंबर तक 755.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 932.3 मिलीमीटर होती है. यानी राज्य में करीब 18.8 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. सरकार ने सूखा प्रबंधन संहिता के तहत 'ट्रिगर-1' सक्रिय किया है. इसके तहत बारिश में 25 फीसदी से ज्यादा कमी और लगातार 21 दिनों तक बारिश नहीं होने जैसी स्थिति को ध्यान में रखा जाता है.
वहीं, विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रभावित किसानों को सीधे आर्थिक मदद देने के लिए और ठोस कदम उठाने की जरूरत है. किसान संगठनों ने फसल नुकसान के आधार पर मुआवजा, कर्ज राहत और फसल बीमा के तहत भुगतान की मांग भी की है. (PTI)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today