
गुलशन कुमार की सफलता की कहानीअगर आपको सरकारी नौकरी मिले तो क्या आप उसको छोड़कर खुद का स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोचेंगे. स्वाभाविक है नहीं, लेकिन पटना जिले के गुलशन कुमार की कहानी इससे काफी अलग है. उन्होंने केवल सरकारी नौकरी ही नहीं छोड़ी, बल्कि उन्होंने जो स्टार्टअप का चयन किया, उसको भी शुरू करने से पहले उसके उत्पादों का खुद निजी जीवन में प्रयोग किया, उसके बाद स्टार्टअप करने का विचार किया. पटना जिले के मनेर प्रखंड के गोपालपुर गांव के रहने वाले गुलशन कुमार ने माइक्रोग्रीन (Microgreens) का स्टार्टअप करीब 5 साल पहले शुरू किया और आज इस बिजनेस से वह महीने का करीब 1 लाख के आसपास की कमाई कर रहे हैं.
वह कहते हैं कि सरकारी नौकरी जाने की कोई चिंता नहीं है, बल्कि उन्हें खुशी है कि उनका जो स्टार्टअप है, वह लोगों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. जब लोग मेरे पास आते हैं और यह कहते हैं कि आपके दिए हुए माइक्रोग्रीन की वजह से ब्लड प्रेशर, शुगर, गैस सहित लीवर से जुड़े हुए रोगों से आराम मिला है या खत्म हो गए हैं, तो यह लगता है कि आज से करीब 5 से 6 साल पहले जिस स्टार्टअप के लिए मैंने नौकरी छोड़ी थी, वह सही निर्णय था.
माइक्रोग्रीन अलग-अलग फसलों का शुरुआती चरण होता है. वह पौधा जो बीज से उगाने के करीब 7 से 21 दिन के आसपास होते हैं, जिसे लोग खाते हैं. इसमें पालक, मूली, सरसों, धनिया, मेथी, ब्रोकली, मटर सहित अन्य पौधे शामिल होते हैं, जिनके शुरुआती चरण में जो दो पत्ते निकलते हैं, उसे माइक्रोग्रीन कहा जाता है. वही गुलशन कुमार कहते हैं कि इसमें करीब 40% तक विटामिन, खनिज सहित अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसे लोग सलाद में या सुबह खाली पेट खाते हैं. वही अलग-अलग फसलों के माइक्रोग्रीन अलग-अलग रोगों में काफी कारगर साबित होते हैं.
गुलशन कुमार कहते हैं कि 2019 में उन्हें फैटी लीवर ग्रेड 2 (लीवर की कोशिकाओं में मध्यम मात्रा में अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है) की समस्या आ गई थी. वहीं जब इसको लेकर जानकारों से सलाह लिया गया तो उन्होंने कहा कि मेडिसिन से ज्यादा प्रभावशाली माइक्रोग्रीन है. उसके बाद करीब 1 साल तक मैंने इसका सेवन शुरू किया. इसके बाद मैंने पाया कि मेरी जो समस्या थी, वह पूरी तरह से खत्म हो गई. इसके बाद मैंने निर्णय लिया कि क्यों न इसी का बिजनेस शुरू किया जाए. शुरुआती चरणों में मैंने लोगों को इसका सेवन करने के लिए दिया, तब लोगों की प्रतिक्रिया बढ़िया रही, जिसके बाद मैंने इसे स्टार्टअप करने का निर्णय लिया.

गुलशन कुमार अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं. उन्होंने 2015 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी की और उनकी नौकरी नवोदय विद्यालय में लैब असिस्टेंट के तौर पर हो गई. इसी नौकरी के बीच लीवर से जुड़ी हुई समस्या आई और उन्होंने माइक्रोग्रीन का सेवन जब शुरू किया. और इसे स्टार्टअप के तौर पर शुरू करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी. यह बताते हैं कि शुरुआत में स्थितियां बहुत संतोषजनक नहीं थीं, लेकिन जब से हम डाइटिशियन के संपर्क में आए हैं, उसके बाद से लोगों में इसको लेकर जागरुकता बढ़ी है. वहीं महीने का करीब ₹100000 का हम माइक्रोग्रीन बेच देते हैं.
गुलशन कुमार के पिता संजीव कुमार रंजन कहते हैं कि बेटे के नौकरी छोड़ने का कोई गम नहीं है. अगर हर कोई नौकरी ही करेगा तो खेती कौन करेगा. आज पढ़े-लिखे युवाओं को खेती में आने की जरूरत है, तभी स्थितियां बदलेंगी. वह कहते हैं कि मैं भी कभी नौकरी करता था, लेकिन अब उसको छोड़कर खेती करता हूं और खेती से ही अच्छी कमाई करता हूं. खेती के लिए सबसे जो महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको प्रबंधन बेहतर तरीके से करना आना चाहिए. समय से अगर आप फसलों की खेती करेंगे तो स्वाभाविक है, आपका उत्पादन और आपकी कमाई अच्छी होगी.
गुलशन कुमार कहते हैं कि माइक्रोग्रीन जो पौधे होते हैं, उन्हें तैयार करने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सबसे पहले तो वह कहते हैं कि अगर आप माइक्रोग्रीन की खेती कर रहे हैं तो आपको ऑर्गेनिक बीज का चयन करना होगा. इसके साथ ही जब आप बीज लगा रहे हैं तो आप मिट्टी की जगह कोकोपीट का उपयोग करें. वहीं बीज को कोकोपीट के अंदर डाल दीजिए और 2 से 3 दिनों तक उसे अंधेरे में रखिए, जहां पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच सके. जब उसमें अंकुरण आने लगे, तब आप उसे उजाले में लेकर आएं. वहीं यह कहते हैं कि जिस जगह पर आप इसकी खेती कर रहे हैं, वहां का तापमान 18 से 22 डिग्री के बीच ही रहना चाहिए. अगर ज्यादा तापमान होने पर फंगस का खतरा बढ़ जाता है और फसल को नुकसान पहुंच जाता है.
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