किसान की बेटी बनी सब इंस्पेक्टरउत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की रहने वाली 23 वर्षीय अंजलि ने अपनी मेहनत, लगन और अटूट हौसले के दम पर उत्तर प्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. अनुसूचित जाति के एक गरीब किसान परिवार से आने वाली अंजलि की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो एक असफलता के बाद अपने सपनों को छोड़ देते हैं.
हरदोई के सुरसा थाना क्षेत्र के खुटेहना गांव की रहने वाली अंजलि के पिता राम मूर्ति एक छोटे किसान हैं. उनके पास बहुत कम खेती योग्य जमीन है और परिवार का पालन-पोषण करने के लिए वे दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती करते हैं. परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं, जिनमें अंजलि सबसे बड़ी हैं. सीमित आर्थिक संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी पुलिस विभाग में अधिकारी बने, और अंजलि ने भी इस सपने को अपना लक्ष्य बना लिया.
अंजलि ने हरदोई शहर के आवास विकास क्षेत्र में रहकर एक कोचिंग संस्थान से पुलिस भर्ती की तैयारी शुरू की. उन्होंने वर्ष 2024 की उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा भी दी थी, लेकिन 2400 मीटर की दौड़ में निर्धारित समय से केवल 10 सेकेंड अधिक लग जाने के कारण वह भर्ती से बाहर हो गईं. यह असफलता उनके लिए बड़ा झटका थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और निराश होने की बजाय उन्होंने अपनी तैयारी को और मजबूत किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ अगले लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं.
लगातार मेहनत और पुलिस सेवा में जाने के जुनून का ही परिणाम रहा कि वर्ष 2025 में आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में उन्होंने सफलता हासिल कर अपना सपना पूरा कर लिया. शिक्षा के क्षेत्र में भी अंजलि का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा. उन्होंने वर्ष 2018 में हाईस्कूल 71 प्रतिशत अंक और 2020 में इंटरमीडिएट 73 प्रतिशत अंक के साथ दयानंद इंटर कॉलेज, सुरसा से पास किया. इसके बाद उन्होंने हरदोई के आर कन्या डिग्री कॉलेज से स्नातक (बीए) की पढ़ाई पूरी की और फिर पूरी तरह पुलिस भर्ती की तैयारी में जुट गईं.
अपनी सफलता पर अंजलि ने इसका पूरा श्रेय अपने माता-पिता, भाई-बहनों और कोचिंग संस्थान के शिक्षकों को दिया. उनका कहना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और पूरी ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है. उन्होंने बताया कि उनके शिक्षकों ने हर कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. अंजलि की कहानी यह साबित करती है कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो असफलताओं से सीख कर दोबारा पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ते हैं. उनकी यह उपलब्धि आज न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव और जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है. (प्रशांत पाठक की रिपोर्ट)
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