
"हर एवोकाडो के पैकेट पर लिखा था – Sourced from Israel"यही एक लाइन भोपाल के युवा किसान हर्षित गोधा की जिंदगी बदलने की वजह बन गई. यूके से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई करने वाले हर्षित ने पारिवारिक व्यापार संभालने के बजाय खेती को अपना करियर चुना और आज मध्यप्रदेश की धरती पर इजरायल जैसी आधुनिक एवोकाडो खेती की सफल मिसाल बन चुके हैं.
आज उनके 8.5 एकड़ के खेत में चार अलग-अलग किस्मों के एवोकाडो के पेड़ लहलहा रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने हाईटेक नर्सरी तैयार कर देशभर के किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधों की व्यवस्था भी शुरू कर दी है.
हर्षित गोधा बताते हैं कि बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई के दौरान उनका वजन काफी बढ़ गया था.फिट रहने के लिए उन्होंने नियमित रूप से एवोकाडो खाना शुरू किया. इसी दौरान उन्होंने देखा कि लगभग हर पैक पर "Sourced from Israel" लिखा होता था.
यहीं से उनके मन में सवाल उठा कि जब इजरायल जैसे गर्म देश में एवोकाडो उग सकता है, तो क्या भारत में इसकी खेती संभव नहीं है? इसी सवाल ने उन्हें खेती की नई राह पर आगे बढ़ा दिया.
सिर्फ सोचने तक सीमित न रहते हुए हर्षित ने इजरायल के एवोकाडो उत्पादक किसानों और विशेषज्ञों से संपर्क किया.उन्होंने वहां की आधुनिक खेती, पौध तैयार करने की तकनीक, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और बागवानी के विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण लिया.कोर्स पूरा होने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि भारत लौटकर एवोकाडो की खेती करेंगे.
व्यावसायिक परिवार से आने वाले हर्षित के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने पिता को मनाना था.परिवार चाहता था कि वह व्यापार संभालें, लेकिन हर्षित खेती करना चाहते थे.आखिरकार उनके पिता ने एक शर्त रखी कि यदि इजरायल के विशेषज्ञ यह प्रमाणित कर दें कि भोपाल की मिट्टी और जलवायु एवोकाडो के लिए उपयुक्त है, तभी उन्हें अनुमति मिलेगी.
हर्षित ने इजरायल से तीन विशेषज्ञों को भारत बुलाया. विशेषज्ञों ने खेत की मिट्टी, जलवायु और अन्य परिस्थितियों का परीक्षण किया. जांच के बाद उन्होंने बताया कि यहां सफलतापूर्वक एवोकाडो की खेती की जा सकती है. इसके बाद परिवार भी तैयार हो गया.
साल 2023 में हर्षित ने इजरायल से लगभग 2,000 एवोकाडो पौधे मंगवाकर अपने खेत में लगाए.लगभग तीन वर्षों की मेहनत के बाद आज उनके 8.5 एकड़ के बगीचे में चार अलग-अलग किस्मों के एवोकाडो के पेड़ फल दे रहे हैं.पहली सफल फसल ने उनके उस सपने को साकार कर दिया, जो कभी यूके में पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ था.
खेती में सफलता मिलने के बाद हर्षित ने केवल उत्पादन तक खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने इजरायल की तकनीक पर आधारित एक आधुनिक नर्सरी भी विकसित की है.नर्सरी में वर्तमान में 5,000 से अधिक पौधे तैयार किए जा रहे हैं. पौधों को कोकोपीट, वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन और ड्रिप सिस्टम के माध्यम से विकसित किया जाता है.
हर्षित का दावा है कि उनके तैयार किए गए पौधे खेत में लगाने के बाद लगभग दो वर्षों में फल देना शुरू कर देते हैं.
आज उनकी नर्सरी से देश के कई राज्यों के किसान एवोकाडो के पौधे खरीद रहे हैं. एक पौधे की कीमत लगभग 2,500 रुपये रखी गई है, जबकि परिवहन का खर्च अलग से लिया जाता है.
उनका कहना है कि पौध तैयार करने में इजरायल की उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है, इसलिए उनकी गुणवत्ता बेहतर होती है.
हर्षित ने एवोकाडो उत्पादन का एक आर्थिक मॉडल भी तैयार किया है. उनके अनुसार शुरुआती तीन वर्षों में प्रति एकड़ लगभग 7 लाख रुपये तक की लागत आती है.हालांकि तीसरे वर्ष से पेड़ व्यावसायिक उत्पादन देने लगते हैं और अच्छी पैदावार मिलने पर प्रति एकड़ सालाना 10 लाख रुपये से अधिक की आय संभव है.
वर्तमान में भारतीय बाजार में एवोकाडो का थोक भाव 200 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक है, जबकि खुदरा बाजार में इसे प्रति फल के हिसाब से बेचा जाता है.
हर्षित ने एवोकाडो की खेती को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया है. उन्होंने अलग-अलग स्तर के ऑनलाइन कोर्स तैयार किए हैं, जिनमें खेत की तैयारी, पौध रोपण, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, छंटाई, अधिक उत्पादन प्राप्त करने की तकनीक और बाजार से जुड़ने तक की पूरी जानकारी दी जाती है.
आज देशभर के युवा और किसान इन कोर्सों में रुचि ले रहे हैं और उनसे आधुनिक एवोकाडो खेती सीखने के लिए संपर्क कर रहे हैं.
हर्षित गोधा का सपना केवल अपनी खेती तक सीमित नहीं है.उनका लक्ष्य भारत में एवोकाडो की खेती का ऐसा मॉडल विकसित करना है, जिससे देश आयात पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं बड़े स्तर पर उत्पादन कर सके. उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर भारतीय किसान भी एवोकाडो की खेती से बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं.
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