पेट्रोल से छुटकारा, खेती होगी सस्ती!देश में खेती को आधुनिक और कम खर्चीला बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए KisanKraft ने दो नए इलेक्ट्रिक कृषि उपकरण लॉन्च किए हैं. कंपनी ने E-Inter-cultivator और E-Self Propelled Reaper को बाजार में उतारा है. इन मशीनों को खासतौर पर छोटे और मध्यम किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है. कंपनी का दावा है कि इन मशीनों से खेती की लागत कम होगी और किसानों को पेट्रोल पर होने वाले भारी खर्च से राहत मिलेगी.
कंपनी की ओर से किए गए फील्ड ट्रायल में सामने आया है कि पेट्रोल से चलने वाली समान मशीनों को चलाने में जहां करीब 170 रुपये प्रति घंटे का खर्च आता है, वहीं नई इलेक्ट्रिक मशीनों को चलाने का खर्च केवल 10 रुपये प्रति घंटे है. यानी किसान ऊर्जा खर्च में 90 प्रतिशत से अधिक की बचत कर सकते हैं.
खेती में ईंधन का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसके साथ ही इंजन की सर्विसिंग, इंजन ऑयल, स्पेयर पार्ट्स और बार-बार होने वाली खराबी भी किसानों के लिए अतिरिक्त खर्च का कारण बनती है. ऐसे में इलेक्ट्रिक मशीनें किसानों के लिए कम खर्च वाला विकल्प बनकर सामने आई हैं.
देश के कई हिस्सों में खेती के दौरान मजदूरों की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. खासकर निराई और कटाई के मौसम में किसानों को समय पर मजदूर नहीं मिलते. दूसरी ओर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण मशीनों से खेती करना भी महंगा होता जा रहा है. इसी वजह से कृषि क्षेत्र में ऐसी मशीनों की जरूरत महसूस की जा रही थी जो कम लागत में बेहतर काम कर सकें.
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी और मोटर तकनीक अब इतनी विकसित हो चुकी है कि उसका उपयोग खेती में भी आसानी से किया जा सकता है.
E-Inter-cultivator का उपयोग खेतों में निराई-गुड़ाई और फसलों के बीच की मिट्टी को ढीला करने के लिए किया जाता है. इसमें 32 जे-आकार के ब्लेड लगाए गए हैं और इसका वजन करीब 150 किलोग्राम है. यह मशीन एक घंटे में लगभग एक एकड़ खेत में काम कर सकती है. एक बार पूरी तरह चार्ज होने पर यह करीब 3.5 घंटे तक लगातार चलती है. इसमें रिवर्स गियर की सुविधा भी दी गई है, जिससे छोटे खेतों में इसे आसानी से चलाया जा सकता है.
कंपनी ने E-Self Propelled Reaper भी लॉन्च किया है. यह मशीन धान, गेहूं, मोटे अनाज (मिलेट्स) और सोयाबीन जैसी फसलों की कटाई कर सकती है. यह हल्के गीले धान के खेतों में भी काम करने में सक्षम बताई गई है. यह मशीन भी लगभग एक घंटे में एक एकड़ फसल की कटाई कर सकती है और एक बार चार्ज होने पर करीब 4 घंटे तक लगातार चलती है.
इन मशीनों में रिमूवेबल बैटरी दी गई है, जिसे मशीन से निकालकर भी चार्ज किया जा सकता है. बैटरी को पूरी तरह चार्ज होने में लगभग 5.5 घंटे लगते हैं. इसमें Lithium Iron Phosphate (LFP) बैटरी का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी उम्र लगभग 2,000 से 2,500 चार्जिंग साइकिल बताई गई है.
मशीनों में लगाए गए मोटर और कंट्रोलर को IP67 रेटिंग मिली है, जिससे वे धूल और पानी से सुरक्षित रहते हैं.
इन इलेक्ट्रिक मशीनों में पेट्रोल, इंजन ऑयल, फिल्टर, कार्बोरेटर और स्पार्क प्लग जैसी चीजों की जरूरत नहीं पड़ती. इससे किसानों का रखरखाव खर्च काफी कम हो जाता है. साथ ही मशीनें कम आवाज करती हैं और इनमें कंपन भी कम होता है, जिससे लंबे समय तक काम करने पर थकान कम महसूस होती है.
आगे मोबाइल ऐप से भी होगी निगरानी
कंपनी ने बताया कि भविष्य में इन मशीनों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तकनीक से जोड़ा जाएगा. इसके बाद किसान मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी की स्थिति, मशीन की कार्यक्षमता और अन्य जरूरी जानकारी देख सकेंगे. किराये पर मशीन उपलब्ध कराने वाले लोगों के लिए जियो-फेंसिंग जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी.
KisanKraft के अनुसार, दोनों इलेक्ट्रिक कृषि उपकरण अब बिक्री के लिए उपलब्ध हैं. किसान इन्हें कंपनी के देशभर में मौजूद 5,000 से अधिक डीलर नेटवर्क के माध्यम से खरीद सकते हैं.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इलेक्ट्रिक कृषि मशीनों का उपयोग बड़े स्तर पर बढ़ता है तो इससे खेती की लागत कम होगी, किसानों की आय बढ़ सकती है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह तकनीक आने वाले समय में खेती का तरीका बदल सकती है.
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