धान छोड़ अदरक की खेती से किसान बना मालामाल! एक एकड़ से 5 लाख की कमाई, फसल विविधीकरण से बदली तस्वीर

धान छोड़ अदरक की खेती से किसान बना मालामाल! एक एकड़ से 5 लाख की कमाई, फसल विविधीकरण से बदली तस्वीर

छत्तीसगढ़ की कृषक उन्नति योजना के तहत किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर अदरक जैसी लाभकारी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं.सरगुजा के किसान अमित कुमार सिंह ने आधुनिक तकनीक से एक एकड़ में अदरक की खेती कर करीब 5 लाख रुपये की आय अर्जित की. सरकार प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता देकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है.

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धान छोड़ अदरक की खेती से किसान बना मालामाल! एक एकड़ से 5 लाख की कमाई, फसल विविधीकरण से बदली तस्वीर

छत्तीसगढ़ में किसानों को पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़ाकर अधिक लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित करने के लिए राज्य सरकार की कृषक उन्नति योजना प्रभावी साबित हो रही है. योजना के तहत फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान के स्थान पर उद्यानिकी एवं अन्य नकदी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता दी जा रही है. इसका सकारात्मक असर अब प्रदेश के कई जिलों में दिखाई देने लगा है, जहां किसान कम भूमि में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं.

इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल सरगुजा जिले के ग्राम दरिमा के प्रगतिशील किसान अमित कुमार सिंह हैं. उन्होंने परंपरागत धान की खेती छोड़कर अदरक की खेती शुरू की और पहले ही वर्ष उल्लेखनीय सफलता हासिल की. अमित बताते हैं कि पिछले वर्ष उन्होंने एक एकड़ में अदरक की खेती से लगभग 5 लाख रुपये की आय अर्जित की. उनका कहना है कि यदि बाजार में अनुकूल भाव मिले तो अदरक की खेती से प्रति एकड़ 10 लाख रुपये तक की कमाई संभव है.

कृषि विभाग के मार्गदर्शन से मिली नई दिशा

अमित कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में अदरक की खेती शुरू की. बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिलने के बाद इस वर्ष उन्होंने अदरक की खेती का रकबा भी बढ़ा दिया है. उन्हें उम्मीद है कि क्षेत्रफल बढ़ने के साथ इस बार उनकी आय भी पिछले वर्ष से कहीं अधिक होगी.

वैज्ञानिक खेती से बढ़ी पैदावार और गुणवत्ता

अमित ने अदरक की खेती वैज्ञानिक पद्धति से मेड़ बनाकर की है.इस तकनीक से जल निकासी बेहतर रहती है, जिससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन के साथ गुणवत्ता में भी सुधार होता है. उनका मानना है कि यदि किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अदरक जैसी नकदी फसलों की खेती करें तो सीमित भूमि में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है.

15 हजार रुपये की सहायता से कम हो रही खेती की लागत

अमित कुमार सिंह का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत दी जा रही प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता किसानों के लिए बड़ी राहत है. इससे खेती की शुरुआती लागत कम होती है और किसान नई एवं लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं.उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश के अन्य किसानों से भी धान के साथ-साथ अदरक और अन्य नकदी फसलों की खेती अपनाने की अपील की.

फसल विविधीकरण से मजबूत होगी कृषि अर्थव्यवस्था

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि तकनीकी मार्गदर्शन, विशेषज्ञ परामर्श और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है. विभाग का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाना है. स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लाभकारी फसलों की खेती को बढ़ावा देकर प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.फसल विविधीकरण की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बन रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में आधुनिक और लाभकारी कृषि मॉडल को भी नई पहचान दे रही है.

सरगुजा के किसान अमित कुमार सिंह की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही तकनीक, सरकारी सहयोग और बाजार की समझ के साथ खेती को अधिक लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है.

 

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