
तोरई की खेतीजायद का मौसम आते ही किसान ठंडी तासीर वाली सब्जियों की खेती में जुट गए हैं. ऐसे में किसान इस महीने उपज शुरू होने के बाद हर दिन कमाई कराने वाली एक ऐसी ही सब्जी तोरई की खेती कर सकते हैं, जिसे नकदी फसल भी कहा जाता है. देश के कई हिस्सों में किसान तोरई की खूब बुवाई करते हैं. तोरई ऐसी फसल है, जिसकी बुवाई बीज और पौधों दोनों तरह से की जा सकती है. 50-60 दिनों में तोरई फल देना शुरू कर देती है. लेकिन, सबसे जरूरी है तोरई का अच्छी क्वालिटी का बीज मिलना. ऐसे में अगर आप भी अप्रैल महीने में ताजा तोरई की उपज लेना चाहते हैं तो यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह से घर बैठे ऑनलाइन तरीके से आप तोरई के बीज मंगा सकते हैं.
किसान नकदी फसलों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन तोरई की काशी रक्षिता किस्म का बीज बेच रहा है. इस बीज को आप एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद कर बंपर कमाई कर सकते हैं. साथ ही इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर भी मंगवा सकते हैं.

तोरई की काशी रक्षिता एक उन्नत किस्म है, जो अधिक पैदावार और बीमारियों के प्रति सहनशीलता के लिए जानी जाती है. यह मुख्य रूप से भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) द्वारा विकसित किस्मों का हिस्सा है. यह किस्म 50-60 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है और उच्च तापमान तथा रोगों के प्रति प्रतिरोधी है. इसके लिए 6.5 से 7.5 pH मान वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है. खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करें. वहीं, सही देखभाल से 100-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज मिल सकती है.
अगर आप भी तोरई की काशी रक्षिता किस्म की खेती करना चाहते हैं तो इस किस्म के बीज का 10 ग्राम का पैकेट फिलहाल 40 फीसदी की छूट के साथ 60 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल जाएगा. इसे खरीद कर आप आसानी से तोरई की खेती कर सकते हैं.
तोरई की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर होती है. बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह जोतकर उसमें गोबर की सड़ी हुई खाद मिला देनी चाहिए. बीजों को सीधे खेत में गड्ढों या मेड़ों पर बोया जाता है और पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाती है, ताकि बेलों को फैलने की जगह मिल सके. फसल की अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और सहारा (मचान) देना जरूरी होता है. साथ ही कीट और रोगों से बचाव के लिए उचित दवाओं का छिड़काव करना चाहिए. सही देखभाल और पोषण मिलने पर तोरई की फसल 50–60 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
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