
किसानों की आय में वृद्धि और उत्तर प्रदेश को सब्जी निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्यरत भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने महत्वपूर्ण पहल की है.मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) परियोजना के तहत आयोजित एक विशेष बैठक में किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के प्रतिनिधियों को निर्यातोन्मुख सब्जी उत्पादन की संभावनाओं, चुनौतियों और अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.
बैठक का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में सब्जी उत्पादन की वर्तमान स्थिति का आकलन करना, किसानों की उत्पादन क्षमता को समझना तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए तैयार करना था. कार्यक्रम में विशेष रूप से मिर्च के निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की गई और किसानों को निर्यात मानकों के अनुरूप खेती करने के लिए प्रेरित किया गया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि निर्यातोन्मुख खेती किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है.इसके लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, सुरक्षित कृषि पद्धतियां और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन आवश्यक है.
डॉ. कुमार ने किसानों एवं एफपीओ प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं को समझा तथा निर्यात से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की. उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी उपज को बेहतर कीमत मिल सकती है.
बैठक में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुदर्शन मौर्य ने पौध संरक्षण विषय पर किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने बताया कि निर्यात फसलों में किन रसायनों का उपयोग प्रतिबंधित है और किन स्वीकृत रसायनों का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है.उन्होंने किसानों को अवशेष-मुक्त (Residue Free) उत्पादन अपनाने की सलाह दी ताकि निर्यात के दौरान किसी प्रकार की गुणवत्ता संबंधी समस्या न आए.
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के. दुबे ने किसानों को निर्यात के लिए उपयुक्त मटर की उन्नत किस्मों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वैश्विक बाजार में भारतीय मटर की अच्छी मांग है और यदि किसान गुणवत्तापूर्ण किस्मों का चयन कर वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन करें तो उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है.
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इंदीवर प्रसाद ने विभिन्न सब्जी फसलों की उन्नत किस्मों और संकर प्रजातियों की विशेषताओं, उत्पादन क्षमता और निर्यात संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी. उन्होंने किसानों को बाजार की मांग के अनुसार किस्मों का चयन करने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी.इस दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कर्माकर ने भी किसानों के साथ तकनीकी विषयों पर चर्चा कर उनके सवालों का समाधान किया.
बैठक में 20 से अधिक किसानों और विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. कार्यक्रम के समापन पर किसानों को निर्यातोन्मुख मिर्च के संकर बीज वितरित किए गए ताकि वे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन कर सकें और वैश्विक बाजारों की मांग को पूरा कर सकें.
संस्थान के वैज्ञानिकों ने विश्वास व्यक्त किया कि किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयासों से उत्तर प्रदेश से सब्जियों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे किसानों की आय में स्थायी सुधार आएगा और प्रदेश राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सब्जी उत्पादन एवं निर्यात के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगा.
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