किसानों पर जबरन खाद खरीदने का दबावमई और जून में कमजोर मॉनसून की वजह से खाद की मांग सुस्त रही, लेकिन जुलाई में बारिश सुधरने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई तेज हो गई. इसका असर खाद की बिक्री पर भी साफ दिखाई दिया. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, किसान अब भी सबसे ज्यादा सब्सिडी वाले यूरिया की खरीद कर रहे हैं. इससे यह भी पता चलता है कि सरकार संतुलित खाद के इस्तेमाल पर जोर दे रही है, लेकिन खेतों में अभी भी यूरिया का उपयोग सबसे अधिक हो रहा है. कृषि मंत्रालय के अनुसार, जुलाई में कुल 74.28 लाख टन खाद की मांग का अनुमान लगाया गया था. वहीं, 17 जुलाई तक ही 41.09 लाख टन खाद की बिक्री हो चुकी थी. यानी महीने की अनुमानित मांग का आधे से ज्यादा हिस्सा पहले ही पूरा हो गया.
17 जुलाई तक हुई बिक्री में सबसे बड़ा हिस्सा यूरिया का रहा.
कुल खाद बिक्री में लगभग दो-तिहाई हिस्सा अकेले यूरिया का रहा.
जुलाई में अच्छी बारिश होने से खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई है. 'बिजनेस लाइन' के मुताबिक, 10 जुलाई को धान की बुवाई पिछले साल से 9% कम थी, जो 31 जुलाई तक घटकर 2% रह गई. कपास की बुवाई में कमी 15% से घटकर 2% रह गई. वहीं, मक्के की बुवाई में कमी 20% से घटकर 7% रह गई. ऐसे में जुलाई के आखिर तक कुल खरीफ बुवाई पिछले साल के मुकाबले 3 प्रतिशत से भी कम पीछे रह गई, जबकि एक सप्ताह पहले यह अंतर 4.7 प्रतिशत था.
कृषि वैज्ञानिक एस. के. सिंह का कहना है कि जुलाई में धान, मक्का और कपास की बुवाई तेजी से बढ़ी है, इसलिए खाद की मांग भी बढ़ी है. वहीं, कई इलाकों में अब सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान है. ऐसे में अगस्त में भी खाद की मांग बढ़ने की संभावना है. इसी को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने अगस्त के लिए मांग का अनुमान लगाया है, जिसमें यूरिया 38.01 लाख टन, DAP 9.81 लाख टन, MOP 3.27 लाख टन और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर 15.27 लाख टन है.
जानकारी के मुताबिक, अप्रैल में खाद की बिक्री अचानक करीब 25 प्रतिशत बढ़ गई थी, जिसके बाद सरकार ने जरूरत से ज्यादा खरीद रोकने के लिए कुछ राज्यों में खाद वितरण को एग्रीस्टैक डेटा से जोड़ दिया. इसके बाद जून में कमजोर मॉनसून और सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण खरीफ बुवाई लगभग 20 प्रतिशत पीछे रह गई, जिससे खाद की मांग भी घट गई. लेकिन जुलाई में बारिश सामान्य होने के बाद बुवाई और खाद की बिक्री दोनों में तेजी लौट आई.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगस्त में भी अच्छी बारिश जारी रहती है, तो खरीफ फसलों की बुवाई और खाद की मांग दोनों में और बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, किसान अब भी सबसे ज्यादा यूरिया पर निर्भर हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और फसलों की बेहतर पैदावार मिल सके.
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