होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही भारत को राहत: खाद से लदे 16 जहाज लौटेंगे, किसानों की किल्लत होगी दूर

होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही भारत को राहत: खाद से लदे 16 जहाज लौटेंगे, किसानों की किल्लत होगी दूर

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को बड़ी राहत मिली है. खाद से लदे 16 जहाज, जो स्ट्रेट में फंसे हुए थे, अब भारत पहुंच सकेंगे. इससे खरीफ सीजन में यूरिया और डीएपी की कमी दूर होगी और किसानों को समय पर उर्वरक मिल पाएगा.

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होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही भारत को राहत: खाद से लदे 16 जहाज लौटेंगे, किसानों की किल्लत होगी दूरहोर्मुज के खुलते ही खादों की सप्लाई बढ़ जाएगी

अमेरिका और ईरान में डील होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुल गया है. इस स्ट्रेट के खुलने से सबसे ज्यादा फायदा भारत के किसानों को मिलने वाला है क्योंकि अब खादों की सप्लाई बढ़ जाएगी. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पूरी सप्लाई चेन ठप हो गई थी जिसमें सबसे बड़ा नुकसान कच्चे तेल, गैस और खादों को लेकर हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने वाली डील होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट में खादों से भरे कई जहाज फंसे थे और वे ब्लॉकेड खुलने का इंतजार कर रहे थे. अब इसके खुलते ही खाद लदे जहाजों को हरी झंडी मिल जाएगी जिससे भारत में खादों की किल्लत दूर हो जाएगी. 

फर्टिलाइजर मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी वंदना प्रेयशी ने अभी हाल में बताया था कि भारत आ रही खाद से लदे 16 जहाज होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में फंसे हुए हैं. प्रेयशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में 3,30,000 मीट्रिक टन यूरिया ले जा रहे आठ जहाज, 2,57,000 टन डाई-अमोनियम फॉस्फेट से लदे चार जहाज, अमोनिया वाला एक जहाज और 1,10,000 टन सल्फर ले जा रहे तीन जहाज मौजूद हैं.

उन्होंने कहा कि खरीफ फसल के मौसम में स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए, भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के अलावा यूरिया सहित 50 लाख टन फसल पोषक तत्वों का आयात पहले ही कर लिया है. भारत ने 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए एक ग्लोबल टेंडर भी जारी किया है. 

खाद लदे जहाजों की वापसी का रास्ता साफ

अब होर्मुज खुलने के बाद इन 16 जहाजों की सुरक्षित वापसी का रास्ता साफ हो गया है. ये सभी जहाज खरीफ फसलों के लिए जरूरी यूरिया और डीएपी जैसी खादों से लदे हैं. अगर होर्मुज नहीं खुलता तो भारत सरकार को इन जहाजों में लदी खाद को सड़क के रास्ते लाने का बंदोबस्त करना पड़ता. सरकार ने इस प्लान पर सोचना शुरू भी कर दिया था. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट बताती है कि इस प्लान के तहत खादों को सऊदी अरब के यानबू पोर्ट पर लाने और वहां से भारत के तटों तक पहुंचाने की योजना थी. 

TOI ने रिपोर्ट में लिखा, फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह (iGoM) को बताया कि वे इस विकल्प (सड़क के रास्ते खादों को लाना) पर विचार कर रहे हैं, हालांकि सड़क और रेड सी (Red Sea) से होकर जाने वाला यह रास्ता लंबा है. इस बातचीत की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि पर्शियन गल्फ के बंदरगाहों से यानबू पोर्ट (Yanbu Port) तक सड़क मार्ग से दूरी लगभग 1,200 किलोमीटर है जो कि भारत के लिए बेहद महंगा सौदा पड़ता. हालांकि मामला अह सुलझ गया है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद जहाजों का रेगुलर आवागमन शुरू हो चुका है.

खाड़ी से यूरिया का सबसे अधिक निर्यात

मैरीटाइम इंटेलिजेंस कंपनी 'सिग्नल ग्रुप' के डेटा से पता चलता है कि अमोनिया, फॉस्फेट और सल्फर जैसे मुख्य फर्टिलाइज़र के ग्लोबल ट्रेड वॉल्यूम में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी 20% है. इन खादों के निर्यात का अधिकांश हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से निकलता है और भारत जैसे देशों तक पहुंचता है.

ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के अनुसार, दुनिया में ट्रेड होने वाले यूरिया — जो सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला नाइट्रोजन फर्टिलाइज़र है — का लगभग आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है, और अकेले कतर की हिस्सेदारी ग्लोबल सप्लाई का दसवां हिस्सा है. जब ईरान के हमलों के बाद कतरएनर्जी ने दुनिया के सबसे बड़े LNG और फर्टिलाइजर हब, रास लाफान में प्रोडक्शन रोक दिया, तो लाखों टन मुख्य खादों की सप्लाई रुक गई. बाकी देशों के साथ भारत को भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

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