Explained: होर्मुज स्ट्रेट विवाद से खाद संकट गहराया, 6 पॉइंट्स में जानें पूरी बात

Explained: होर्मुज स्ट्रेट विवाद से खाद संकट गहराया, 6 पॉइंट्स में जानें पूरी बात

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक खाद सप्लाई को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है. खाड़ी देशों से आने वाली नाइट्रोजन और फॉस्फेट खादों की आपूर्ति बाधित होने से खेती, फसल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. इस संकट के चलते दुनिया भर में खादों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे महंगाई और भुखमरी का जोखिम भी बढ़ सकता है.

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Explained: होर्मुज स्ट्रेट विवाद से खाद संकट गहराया, 6 पॉइंट्स में जानें पूरी बातईरान युद्ध ने खाद सप्लाई को प्रभावित किया

मध्य पूर्व का विवाद अब खेती-बाड़ी पर भारी पड़ रहा है. इससे पहले हमने कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस जैसी चीजों के निर्यात पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जाना था. लेकिन उससे कई गुणा गंभीर मामला कृषि से जुड़ा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान से सटा होर्मुज स्ट्रेट अगर जल्द नहीं खुला तो दुनिया के कई देशों में भुखमरी के हालात पैदा होंगे. इसकी वजह है खाद की सप्लाई का प्रभावित होना. 

FAO की रिपोर्ट के मुताबिक, खाद उत्पादन और निर्यात में खाड़ी क्षेत्र की सबसे बड़ी भूमिका का मतलब है कि इस क्षेत्र में कोई भी उथल-पुथल दुनिया भर के किसानों, फसल उत्पादन और खाने-पीने की चीजों के दाम को तेजी से प्रभावित कर सकती है.

तेल के अलावा, खाड़ी क्षेत्र खाद बाजार का एक प्रमुख केंद्र है, जो दुनिया भर में कृषि में इस्तेमाल होने वाले नाइट्रोजन और फॉस्फेट खादों का एक बड़ा हिस्सा सप्लाई करता है. भरपूर प्राकृतिक गैस की मदद से, खाड़ी देश कम कीमतों पर खाद बनाते हैं, जिससे वे एशिया, अफ्रीका और उससे आगे के कई देशों के लिए जरूरी सप्लायर बन जाते हैं. इस गंभीर मुद्दे को समझने के लिए नीचे दिए गए 6 पॉइंट्स पर गौर करें.

1-दुनिया के लिए जरूरी खाड़ी की खाद

अनाज, फल सब्जी के मामले में पूरी दुनिया को खिलाने में खाड़ी देशों का रोल सबसे अहम है क्योंकि इसे उगाने में जिन खादों की जरूरत पड़ती है, उसकी अधिकांश सप्लाई इन देशों से निकलती है. खाड़ी देशों के पास प्राकृतिक गैसों की भरमार है जिससे वे सस्ते रेट पर खाद बनाते हैं और दुनिया के देशों को बेचते हैं. होर्मुज के बाधित होने से खादों की सप्लाई प्रभावित हुई है. प्रमुख सप्लायर देशों की बात करें तो इसमें कतर, सऊदी अरब और ईरान शामिल हैं जो नाइट्रोजन और फॉस्फेट खादों के बड़े सप्लायर हैं.

2-चोकपॉइंट बना होर्मुज स्ट्रेट

ईरान से सटा होर्मुज स्ट्रेट केवल तेल सप्लाई के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि दुनिया में खादों की सप्लाई का भी यह सबसे बड़ा रूट है. संकरा सा दिखने वाला यह स्ट्रेट कई देशों के लिए लाइफलाइन है. इस स्ट्रेट के बाधित होने का सीधा मतलब है जरूरतमंद देशों तक खाद की सप्लाई बंद होना जिसका असर कृषि उत्पादन पर दिख सकता है. दुनिया की जरूरत का 30 परसेंट उर्वरक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है. एक साल का यह आंकड़ा लगभग 160 लाख टन है.

3-फारस की खाड़ी का बड़ा रोल

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी में स्थित है जो ईरान युद्ध के बाद सबसे अधिक चर्चा में है. होर्मुज अगर सप्लाई का रूट है तो फारस की खाड़ी खादों का आधार है. यानी फारस की खाड़ी के बिना खाद उत्पादन के बारे में सोचना मुश्किल है. इस खाड़ी में आने वाले कई देश दुनिया में खाद सप्लाई का हब हैं. कतर इसी खाड़ी देश में आता है जहां की कंपनी क्वाफको अकेले पूरी दुनिया के यूरिया उत्पादन का 14 परसेंट हिस्सा देती है.

4-युद्ध से उत्पादन और ढुलाई पर असर

ईरान और उससे सटे खाड़ी देशों में छिड़ी जंग ने खाद उत्पादन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है. कंपनियों पर अटैक का डर है, उनमें असुरक्षा की भावना भी बैठ गई है. इससे खाद उत्पादन पूरी तरह से ठप पड़ गया है. 2 मार्च को कतर के रास लफान रिफाइनरी पर ईरान के हमले ने 112 अरब क्यूबिक मीटर्स एलएनजी के उत्पादन को प्रभावित किया, अमोनिया उत्पादन भी गिर गया. इसकी वजह से कतर, यूएई, सऊदी अरब, ईरान और जॉर्डन ने खाद उत्पादन कम कर दिया या बंद कर दिया. इस हमले की वजह से 30-40 लाख टन खाद बाजार में नहीं पहुंच पा रही है.

5-पूरी दुनिया में खादों के दाम बढ़े

गैस और खाद की सप्लाई ठप होने से पूरी दुनिया में दाम बढ़ गए हैं. गैस, तेल और सप्लाई जोखिमों की वजह से कुछ ही दिनों में खादों के दाम आसमान छूने लगे हैं. फरवरी अंत में खादों के दाम कुछ वाजिब थे, लेकिन मार्च पहले हफ्ते में बड़ा उछाल देखा गया. अप्रैल आते-आते इसमें बड़ी तेजी दर्ज की गई है. अकेले मिस्र में यूरिया के दाम में 28 फीसद की बढ़ोतरी हुई है.

6-खाद के अधिक दाम से जोखिम बढ़ेगा

होर्मुज का बंद होना खाद्य सुरक्षा को जोखिम में डालने के बराबर है. होर्मुज बंद होने से जरूरतमंद देशों को समय पर खाद नहीं मिलेगी, इससे फसल उत्पादन घटेगा और महंगाई बढ़ेगी. महंगाई बढ़ने से कम आय वाले लोगों पर बड़ा असर पड़ेगा जिससे भुखमरी और आर्थिक तंगी से गरीबी बढ़ने की आशंका है. साल 2026 की पहली छमाही की तुलना में अभी खादों के दाम में 15-20 फीसद की वृद्धि है. 

इन बातों से समझना आसान है कि ईरान का युद्ध कई मोर्चों पर एकसाथ वार कर रहा है. पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट में है. साथ ही खेती-बाड़ी भी कई चुनौतियों से जूझ रही है.

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